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Agriculture: सूखे से निपटने के लिए केंद्र ने जिला स्तर पर कंटीजेंसी प्लान सख्ती से लागू करने का दिया निर्देश

Agriculture: सामान्य से कम बारिश होने के कारण खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है. केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार कमजोर मानसून के कारण पिछले साल के मुकाबले खरीफ फसलों की बुवाई में लगभग 25 फीसदी की कमी आयी है. मंत्रालय के आंकड़ों पिछले साल जून में 236.46 लाख हेक्टेयर भूमि पर खरीफ फसलों की बुवाई हुई थी, जो इस साल घटकर 182.72 लाख हेक्टेयर ही है. कम बुवाई से कृषि उत्पादन कम होने की संभावना है और इससे महंगाई बढ़ सकती है. इस साल अल नीनो के प्रभाव के कारण सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. कमजोर मानसून के कारण खरीफ फसलों की स्थिति का आकलन करने के लिए शुक्रवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय बैठक हुई. इस बैठक में खरीफ फसलों की बुवाई के मौजूदा हालात, मानसून, अल नीनो के प्रभाव का आकलन, वर्षा की कमी से प्रभावित जिलों की संख्या, कंटिंजेंसी प्लान (आकस्मिक योजना) के क्रियान्वयन, उर्वरकों की उपलब्धता तथा खाद्यान्नों के भंडारण की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की गयी.
बैठक के दौरान यह तय किया गया कि वर्षा की कमी से अधिक प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक आयोजित कर कंटिंजेंसी प्लान के क्रियान्वयन की समीक्षा की जायेगी. राज्यों के मुख्यमंत्री के नेतृत्व में संभावित मानसून चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जायेगा साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के प्रभावी क्रियान्वयन और कृषि ऋण कवरेज बढ़ाने पर विशेष बल दिया जायेगा. बैठक के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अल नीनो के संभावित प्रभावों का आकलन कर इससे निपटने के लिए बनायी गयी कार्य योजना के सतत एवं सख्त निगरानी करें. देशभर में वर्षा की कमी की आशंका वाले 262 संवेदनशील जिलों की पहचान की गयी है, जिसमें से 52 जिलों में पिछले कुछ दिनों में वर्षा होने से हालात बेहतर हुए हैं. लेकिन अभी भी 210 जिले मानसून की बेरुखी का सामना कर रहे हैं, जबकि देश में 8 जिले पूरी तरह सूखे का सामना कर रहे हैं.
सूखे की लगातार हो रही है निगरानी
बैठक में मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अगले 2-3 दिनों में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में मानसून की प्रगति होने की संभावना है. लेकिन इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान है. उत्तर गुजरात के कुछ क्षेत्रों में वर्षा कम हुई है, महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों में वर्षा हुई है, लेकिन वहां जलाशयों में जलस्तर कम होना चिंता का विषय है.
बैठक में बताया गया कि देश के 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण पिछले वर्ष की तुलना में कम हैं, जबकि अधिकांश क्षेत्रों में भूजल की स्थिति स्थिर बनी हुई है. फसल मौसम निगरानी समूह की साप्ताहिक बैठकों के जरिये सूखे की स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है और 15 राज्यों ने इस बाबत नोडल अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी है. बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (क्रिडा) द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी समीक्षा की गयी. दलहन, तिलहन और कपास मिशन की प्रगति की समीक्षा के अलावा बागवानी फसलों की बुवाई की स्थिति, साप्ताहिक औसत मंडी मूल्य, दलहन, तिलहन, गेहूं एवं चावल के बफर स्टॉक की स्थिति की भी समीक्षा की गयी.