समाचार · मध्य प्रदेश
सरदार सरोवर समझौते पर संग्राम:जीतू बोले- गुजरात लॉबी के आगे झुकी सरकार, बीजेपी का जवाब- ₹1268 करोड़ बचाए
करीब 30 साल पुराने सरदार सरोवर परियोजना के वित्तीय विवाद के वन टाइम सेटलमेंट पर मध्यप्रदेश में सियासी घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि मोहन सरकार ने गुजरात के सामने मध्यप्रदेश के हितों से समझौता कर लिया, जबकि बीजेपी ने पलटवार करते हुए इसे प्रदेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। बीजेपी का दावा है कि समझौते से मध्यप्रदेश पर आने वाली करीब 1500 करोड़ रुपए की संभावित देनदारी घटकर 231.80 करोड़ रह गई, यानी प्रदेश के लगभग 1268 करोड़ रुपए बच गए। जीतू पटवारी का आरोप- सरकार ने प्रदेश के अधिकार छोड़ दिए पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जिस मध्यप्रदेश ने सरदार सरोवर परियोजना के लिए अपनी जमीन, जंगल और गांवों का बलिदान दिया तथा लाखों लोगों का विस्थापन झेला, उसी प्रदेश ने गुजरात से 7,669 करोड़ रुपए के मुआवजे का दावा किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के अधिकारों के लिए लड़ने के बजाय गुजरात सरकार से समझौता कर लिया और अब उल्टा गुजरात को 550 करोड़ रुपए देने पर सहमति जता दी। पटवारी ने कहा कि नर्मदा का उद्गम और अधिकांश प्रवाह मध्यप्रदेश में होने के बावजूद प्रदेश के किसान सिंचाई और पेयजल संकट झेल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने प्रदेश के हितों से समझौता किया है। बीजेपी का पलटवार- कांग्रेस भ्रम फैला रही कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस जनता को भ्रमित कर रही है। उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 में भारत के अटॉर्नी जनरल की राय के अनुसार मध्यप्रदेश पर गुजरात को करीब 1,500 करोड़ रुपए का भुगतान करने की स्थिति बन रही थी। प्रधानमंत्री की पहल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयास और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के मार्गदर्शन में चारों राज्यों के बीच सहमति बनी। बीजेपी के मुताबिक इस समझौते से मध्यप्रदेश की देनदारी घटकर केवल 231.80 करोड़ रुपए रह गई और प्रदेश के लगभग 1,268 करोड़ रुपए बच गए। पार्टी ने इसे सहकारी संघवाद और मजबूत नेतृत्व का उदाहरण बताया। बीजेपी के प्रदेश महामंत्री बोले: कांग्रेस केवल एक आंकड़ा दिखाकर भ्रमित कर रही बीजेपी के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने कहा कि सरदार सरोवर परियोजना का विवाद करीब 30 वर्षों तक लंबित रहा, लेकिन कांग्रेस सरकारें इसका समाधान नहीं निकाल सकीं। उनके मुताबिक ऐतिहासिक समझौते से मध्यप्रदेश की संभावित करीब 1,500 करोड़ रुपए की देनदारी घटकर 231.80 करोड़ रुपए रह गई, जिससे प्रदेश को लगभग 1,268 करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष वित्तीय लाभ हुआ। कोठारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल एक आंकड़ा दिखाकर जनता को भ्रमित कर रही है, जबकि इस समझौते से हजारों करोड़ रुपए की बचत हुई और दशकों पुराना अंतरराज्यीय विवाद समाप्त हो गया। उन्होंने कहा कि सरदार सरोवर परियोजना केवल वित्तीय मामला नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के बिजली उत्पादन, 31 लाख हेक्टेयर सिंचाई और नर्मदा जल आपूर्ति से जुड़ा विषय है, इसलिए इसका समाधान प्रदेश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। क्या है पूरा मामला? नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध को लेकर मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच पिछले करीब तीन दशकों से वित्तीय लेन-देन का विवाद चल रहा था। मध्यप्रदेश का दावा था कि बांध से उसकी सबसे अधिक जमीन, जंगल और गांव डूबे हैं, इसलिए गुजरात उसे 7,669 करोड़ रुपए का मुआवजा दे। दूसरी ओर गुजरात परियोजना की बढ़ी हुई लागत का हिस्सा मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्यों से मांग रहा था। मंगलवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में चारों राज्यों ने वन टाइम सेटलमेंट पर हस्ताक्षर कर विवाद खत्म कर दिया। समझौते में क्या तय हुआ? मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान गुजरात को 550-550 करोड़ रुपए देंगे। तीनों राज्यों से गुजरात को कुल 1,650 करोड़ रुपए मिलेंगे। केंद्र सरकार की मध्यस्थता में चारों राज्यों ने पुराने सभी वित्तीय दावों को समाप्त करने पर सहमति बनाई। वर्षों से लंबित विवाद का स्थायी समाधान हो गया। सबसे ज्यादा नुकसान मध्यप्रदेश को क्यों हुआ? डूब क्षेत्र की कुल 37,533 हेक्टेयर जमीन में 55.5% हिस्सा मध्यप्रदेश का है। 178 गांव जलमग्न हुए, बाद में संख्या बढ़कर 192 तक पहुंच गई। 2014 में बांध की ऊंचाई बढ़ने से 5,000 हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त जमीन डूब गई। बड़ी मात्रा में खेती की जमीन, जंगल और सरकारी ढांचे प्रभावित हुए।