Friday, 9 October 2026
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Durga Puja में आस्था का केंद्र बनते हैं झारखंड के ये प्रसिद्ध शक्ति स्थल, जानें कहां विराजती हैं मां

INT News9 October 2026 at 02:43 am

रांची : शारदीय नवरात्र और दुर्गा पूजा के साथ पूरा झारखंड मां दुर्गा की भक्ति में डूब जाता है. शहरों से लेकर गांवों तक पूजा पंडालों की रौनक दिखाई देती है, वहीं राज्य के प्राचीन देवी मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. झारखंड के कई ऐसे शक्तिस्थल हैं, जहां सालभर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन नवरात्र और दुर्गा पूजा के दौरान इन मंदिरों का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है.

प्राकृतिक खूबसूरती, आदिवासी परंपराओं और प्राचीन धार्मिक मान्यताओं से समृद्ध झारखंड में मां शक्ति के कई ऐतिहासिक मंदिर हैं. इनमें रांची का दिउड़ी मंदिर, रजरप्पा का मां छिन्नमस्तिका मंदिर, इटखोरी का मां भद्रकाली मंदिर और धनबाद का शक्ति मंदिर प्रमुख हैं.

दिउड़ी मंदिर : जहां मां दुर्गा की 16 भुजाओं वाली प्रतिमा

रांची से करीब 60 किलोमीटर दूर तमाड़ के पास स्थित दिउड़ी मंदिर झारखंड के सबसे प्रसिद्ध देवी मंदिरों में शामिल है. यहां मां दुर्गा की 16 भुजाओं वाली प्राचीन प्रतिमा स्थापित है. मंदिर की सबसे खास परंपरा यह है कि यहां आदिवासी पाहन और ब्राह्मण पुजारी मिलकर पूजा-अर्चना करते हैं.

नवरात्र के दौरान दिउड़ी मंदिर में विशेष पूजा होती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. स्थानीय लोगों के बीच इस मंदिर को लेकर गहरी आस्था है.

रजरप्पा : मां छिन्नमस्तिका के दरबार में उमड़ता है सैलाब

रामगढ़ जिले में दामोदर और भैरवी नदी के संगम पर स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर झारखंड के प्रमुख शक्तिस्थलों में से एक है. मंदिर अपनी अनोखी प्रतिमा और तांत्रिक परंपराओं के लिए भी जाना जाता है.

नवरात्र में यहां दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं. नदी संगम और पहाड़ियों के बीच स्थित यह धार्मिक स्थल आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी आकर्षण का केंद्र है. सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की कतार देखने को मिलती है.

इटखोरी का मां भद्रकाली मंदिर : इतिहास और आस्था का संगम

चतरा जिले के इटखोरी में स्थित मां भद्रकाली मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है. इस क्षेत्र में हिंदू, बौद्ध और जैन परंपराओं से जुड़े ऐतिहासिक अवशेष भी मिले हैं.

नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है. मां भद्रकाली के दर्शन के लिए झारखंड के अलावा दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं. मंदिर परिसर की ऐतिहासिक विरासत इसे दूसरे देवी स्थलों से अलग पहचान देती है.

धनबाद का शक्ति मंदिर : अखंड ज्योति के लिए प्रसिद्ध

धनबाद का शक्ति मंदिर भी झारखंड के प्रमुख देवी मंदिरों में गिना जाता है. यह मंदिर मां दुर्गा की आराधना के साथ अपनी अखंड ज्योति के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है.

नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं. धनबाद और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर मां की पूजा करते हैं.

कौलेश्वरी मंदिर : पहाड़ पर विराजती हैं मां शक्ति

चतरा जिले के हंटरगंज क्षेत्र में स्थित कौलेश्वरी मंदिर भी झारखंड के प्राचीन धार्मिक स्थलों में शामिल है. पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है.

नवरात्र में यहां विशेष पूजा होती है. धार्मिक महत्व के साथ पहाड़ी क्षेत्र में स्थित होने के कारण यह स्थान प्रकृति प्रेमियों को भी आकर्षित करता है.

महामाया मंदिर : प्राचीन देवी उपासना का केंद्र

झारखंड के प्राचीन देवी स्थलों में महामाया मंदिर का भी विशेष स्थान है. यहां मां महामाया की पूजा-अर्चना की जाती है. मंदिर से जुड़ी पुरानी मान्यताएं और धार्मिक परंपराएं इसे श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण बनाती हैं.

दुर्गा पूजा और नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं और भक्त मां का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं.

राजगढ़ दुर्गा मंदिर : सदियों पुरानी पूजा परंपरा

धनबाद के झरिया क्षेत्र का राजगढ़ दुर्गा मंदिर अपनी पुरानी दुर्गा पूजा परंपरा के लिए जाना जाता है. यहां वर्षों से चली आ रही पूजा परंपरा आज भी लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई है.

दुर्गा पूजा के दौरान मंदिर और आसपास का क्षेत्र भक्तिमय हो जाता है. पुरानी परंपराओं और बदलते समय के बीच यह मंदिर झरिया की धार्मिक विरासत को आगे बढ़ा रहा है.

झारखंड में दुर्गा पूजा सिर्फ उत्सव नहीं, आस्था की यात्रा भी

झारखंड में दुर्गा पूजा का रंग केवल शहरों के भव्य पूजा पंडालों तक सीमित नहीं है. राज्य के प्राचीन देवी मंदिर इस पर्व को धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से और खास बनाते हैं. कहीं आदिवासी और पारंपरिक पूजा पद्धति का अनोखा मेल देखने को मिलता है, तो कहीं नदियों और पहाड़ियों के बीच स्थित शक्तिस्थल श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं.

इस दुर्गा पूजा अगर आप मां के दर्शन के साथ झारखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखना चाहते हैं, तो दिउड़ी, रजरप्पा, इटखोरी, धनबाद और कौलेश्वरी जैसे शक्तिस्थल आपकी यात्रा का हिस्सा बन सकते हैं.