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Jharkhand OBC Reservation: झारखंड में OBC को अभी कितना आरक्षण, 27% की मांग क्यों और पंचायत चुनाव से क्या है कनेक्शन?

Jharkhand OBC Reservation: झारखंड में OBC आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर सड़क से लेकर सरकारी नीतियों तक चर्चा में है. 6 अक्टूबर को OBC आरक्षण और अन्य अधिकारों की मांग को लेकर केंद्रीय पिछड़ी जाति संघर्ष समिति के आह्वान पर रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा और लोहरदगा में बंद और चक्का जाम किया गया. गुमला में सड़कें और बाजार प्रभावित हुए, जबकि रांची के अरगोड़ा चौक पर भी प्रदर्शन के कारण कुछ समय के लिए यातायात बाधित हुआ.
आबादी के अनुपात में अधिकार
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में OBC को सरकारी नौकरियों में आरक्षण, राजनीतिक भागीदारी, जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम और देने की मांग शामिल है. ऐसे में सवाल यह है कि झारखंड में OBC को फिलहाल कितना आरक्षण मिलता है, 27 प्रतिशत की मांग कहां से आयी और पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट क्यों जरूरी है.
झारखंड में OBC को अभी कितना आरक्षण ?
केंद्र सरकार ने अप्रैल 2022 में राज्यसभा में दी गयी जानकारी में बताया था कि झारखंड में राज्य सरकार की सेवाओं में OBC के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण है. केंद्र के आंकड़ों में झारखंड उन राज्यों में शामिल था, जहां OBC आरक्षण 27 प्रतिशत से कम था. केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया था कि राज्य सरकार की आरक्षण नीति संबंधित राज्य सरकार तय और लागू करती है.
झारखंड सरकार के कार्मिक विभाग के रिकॉर्ड में भी पिछड़े वर्गों से संबंधित आरक्षण अधिनियम और उसके संशोधनों के दस्तावेज उपलब्ध हैं. यही 14 प्रतिशत आरक्षण OBC संगठनों की 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग का मुख्य आधार है. 2026 में सरकारी शिक्षक भर्ती को लेकर भी OBC संगठनों ने आरक्षण में अपने हिस्से पर सवाल उठाये थे.
27 प्रतिशत आरक्षण की मांग क्यों ?
झारखंड में OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव पहले भी विधानसभा तक पहुंच चुका है. नवंबर 2022 में राज्य सरकार ने OBC आरक्षण को 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने वाला विधेयक विधानसभा में लाने की प्रक्रिया शुरू की थी. इसलिए मौजूदा स्थिति को समझने में एक बात साफ रखना जरूरी है - 14 प्रतिशत को लागू राज्य सेवा आरक्षण के आंकड़े के तौर पर और 27 प्रतिशत को बढ़ोतरी की मांग/प्रस्ताव के तौर पर देखना चाहिए. 27 प्रतिशत को वर्तमान में लागू आरक्षण बताना सही नहीं होगा. केंद्र सरकार के 2022 के आधिकारिक आंकड़ों में भी झारखंड का OBC आरक्षण 14 प्रतिशत बताया गया था.
पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण क्यों अटका ?
पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट महत्वपूर्ण है. सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार स्थानीय निकायों में OBC आरक्षण तय करने के लिए तीन स्तरों की प्रक्रिया जरूरी है - पिछड़ेपन की स्थिति का अनुभवजन्य अध्ययन, उसके आधार पर आरक्षण की उचित मात्रा तय करना और SC, ST तथा OBC के कुल आरक्षण को 50 प्रतिशत की सीमा के भीतर रखना.
झारखंड में OBC आयोग को इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका दी गयी है. राज्य में नगर निकाय चुनाव के लिए भी OBC आरक्षण तय करने को लेकर ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया अपनायी गयी थी. पंचायत चुनाव के लिए भी इसी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद OBC आरक्षण तय किया जाना है. सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार पंचायत चुनाव 2027 में अप्रैल-मई के आसपास होने की संभावना जतायी गयी थी.
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की क्या भूमिका है?
झारखंड राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग राज्य में पिछड़े वर्गों की सूची से जुड़े मामलों की जांच और सलाह देने वाली वैधानिक संस्था है. आयोग किसी वर्ग को पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल करने, किसी वर्ग के अधिक या कम प्रतिनिधित्व से जुड़ी शिकायतों की जांच कर राज्य सरकार को सलाह दे सकता है. पंचायत चुनाव के लिए OBC आरक्षण की प्रक्रिया में भी आयोग की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि ट्रिपल टेस्ट के तहत जुटाये गये आंकड़ों और अध्ययन के आधार पर आरक्षण का निर्धारण किया जाना है.
जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम की मांग क्यों?
सितंबर 2026 में झारखंड कांग्रेस ने जनगणना में OBC के लिए अलग कोड/कॉलम और स्पष्ट पहचान की मांग उठायी थी. पार्टी का कहना था कि इससे OBC की आबादी और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का अधिक स्पष्ट आंकड़ा सामने आ सकेगा. कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर 16 सितंबर को राजभवन मार्च की घोषणा भी की थी. हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि अलग OBC कॉलम की मांग राजनीतिक दल की मांग है, कोई लागू सरकारी फैसला नहीं. इसलिए खबर में इसे इसी रूप में प्रस्तुत करना ज्यादा तथ्यात्मक रहेगा.
OBC आंदोलन की प्रमुख मांगें क्या हैं?
6 अक्टूबर के बंद के दौरान सामने आयी मांगों में सिर्फ 27 प्रतिशत आरक्षण ही शामिल नहीं था. आंदोलनकारियों ने सरकारी नौकरियों में OBC आरक्षण, राजनीतिक भागीदारी, जनगणना में अलग OBC कॉलम और PESA के तहत अधिकारों की भी मांग उठायी. इससे साफ है कि मौजूदा आंदोलन को केवल आरक्षण बढ़ाने की मांग तक सीमित नहीं देखा जा रहा है. इसके साथ सरकारी नौकरियों, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और जनसंख्या के आंकड़ों से जुड़े मुद्दे भी जोड़े गये हैं.
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OBC आरक्षण को समझने के लिए 4 जरूरी बातें
1. मौजूदा आरक्षण: केंद्र सरकार के 2022 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार झारखंड में राज्य सेवाओं में OBC के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण था.
2. 27 प्रतिशत की मांग: OBC संगठनों और कुछ राजनीतिक नेताओं की ओर से आरक्षण को 27 प्रतिशत करने की मांग उठती रही है. 2022 में इसे बढ़ाने का विधेयक भी विधानसभा की प्रक्रिया में आया था.
3. पंचायत चुनाव: पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट के तहत पिछड़ेपन, प्रतिनिधित्व और आरक्षण की सीमा से जुड़े पहलुओं का अध्ययन जरूरी है.
4. जनगणना में अलग कॉलम: OBC के लिए अलग कॉलम की मांग का उद्देश्य समर्थकों के अनुसार समुदाय की वास्तविक आबादी और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का स्पष्ट आंकड़ा हासिल करना है. यह फिलहाल राजनीतिक मांग है.
अब आगे क्या देखना होगा?
अब सबसे अहम यह होगा कि राज्य सरकार OBC आरक्षण को लेकर क्या नीतिगत कदम उठाती है. इसके साथ पंचायत चुनाव के लिए ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया कब पूरी होती है और उसके आधार पर OBC आरक्षण का कितना हिस्सा तय होता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा. दूसरी ओर, जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम की मांग पर केंद्र का रुख भी इस बहस का अहम हिस्सा रहेगा. फिलहाल झारखंड में OBC आरक्षण की बहस तीन बड़े सवालों के इर्द-गिर्द है - 14 प्रतिशत से 27 प्रतिशत की मांग, पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण और OBC की आबादी का स्पष्ट आंकड़ा.
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