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Nepal Flood: नेपाल बाढ़ में मौत का आंकड़ा 392 पहुंचा, 30 से ज्यादा देशों के करीब 1500 लोग लापता

Nepal Flood: नेपाल और तिब्बत में अचानक आई भीषण बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 392 हो गई है. वहीं, बचावकर्मी 290 भारतीय नागरिकों समेत लापता सैकड़ों लोगों का पता लगाने के लिए युद्धस्तर पर जुटे हुए हैं. नेपाल पुलिस ने अपने एक बयान में कहा कि प्रभावित इलाकों से अब तक 50 विदेशियों समेत 796 लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिये बचाया गया है, जबकि अन्य 796 लोगों को सड़क मार्ग से सुरक्षित निकाला गया है.
हिमनद टूटने के बाद मची भारी तबाही
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमनद टूटने से चट्टानें खिसक गईं और हिमस्खलन हुआ. इसके कारण बुधवार को पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव मध्य नेपाल की ओर आया. इससे कई कस्बे और गांव तबाह हो गए. मकान, वाहन, सड़कें और पुल बह गए और हाइड्रो प्रोजेक्ट को भी नुकसान पहुंचा.
नेपाल और तिब्बत में 1468 लोग लापता
नेपाल के अधिकारियों ने 910 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है. बचावकर्मी कीचड़ और मलबे से भरे नदी क्षेत्रों में उनकी तलाश कर रहे हैं. अपने परिजनों का पता लगाने के लिए बड़ी संख्या में लोग अस्पतालों में भी पहुंच रहे हैं. अधिकारियों के अनुसार, तिब्बत में भी 558 लोग लापता हैं. इस तरह सीमा के दोनों ओर लापता लोगों की कुल संख्या 1468 हो गई है.
नई झील से दोबारा बाढ़ का खतरा
भोटे कोशी नदी के ऊपरी इलाके में एक नई झील बनने से निचले क्षेत्रों में फिर बाढ़ आने का खतरा बढ़ गया है. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर झील को रोककर रखने वाला प्राकृतिक बांध टूट गया, तो नदी में अचानक तेज पानी आ सकता है. चीनी अधिकारियों के मुताबिक, गुरुवार सुबह तक झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा था. अगले तीन दिनों में इसमें करीब 30 लाख घन मीटर और पानी आने की आशंका है, जिससे खतरा और बढ़ गया है.
छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो के संगम के पास बनी झील
यह झील छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास बनी है. ये नदियां तिब्बत से निकलती हैं और नेपाल में भोटे कोशी नदी तंत्र का हिस्सा बनती हैं. नेपाल के जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग ने कहा कि उसे चीनी प्राधिकारियों से इस झील के बारे में जानकारी मिली है और भोटे कोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है. विभाग ने लोगों से नदी किनारों से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है. यात्रियों, सुरक्षा कर्मियों और तलाश एवं बचाव दलों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
चीन का बचाव दल ग्यिरोंग पहुंचा
चीनी अधिकारी झील की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और संभावित बाढ़ का आकलन और जोखिम विश्लेषण कर रहे हैं. संचार और खोज उपकरणों से लैस चीन का एक बचाव दल ग्यिरोंग पहुंच गया है, ताकि नदी के ऊपरी हिस्से में बने अवरोध का आकलन किया जा सके. अधिकारियों को आशंका है कि इस अवरोध के कारण दूसरी आपदा आ सकती है और जारी बचाव अभियान और मुश्किल हो सकता है.
290 भारतीय नागरिकों से अब भी संपर्क नहीं
इस आपदा के बाद भारत ने भी अपने नागरिकों का पता लगाने के प्रयास तेज कर दिए हैं. विदेश मंत्रालय ने कहा कि 290 भारतीय नागरिकों से अब भी संपर्क नहीं हो पाया है. मंत्रालय ने कहा कि उनका पता लगाने और उन्हें बचाने के लिए तत्काल प्रयास किए जा रहे हैं. विदेश मंत्रालय ने बताया कि अब तक 84 भारतीय नागरिकों को बचाया गया है. इनमें निर्माणाधीन त्रिशूली हाइड्रो प्रोजेक्ट में काम करने वाले 63 श्रमिक और तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं.
तिब्बत में करीब 200 भारतीयों ने मांगी मदद
विदेश मंत्रालय के अनुसार, तिब्बत की ओर मौजूद करीब 200 भारतीय नागरिकों ने वहां से सुरक्षित निकाले जाने के लिए सहायता मांगी है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने काठमांडू और बीजिंग में भारत के राजदूतों के साथ डिजिटल माध्यम से एक हाई लेवल मीटिंग के बाद कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में मौजूद भारतीयों की स्थिति और उनकी कुशलक्षेम का पता लगाने के लिए तत्काल प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि मंत्रालय नेपाल के अधिकारियों, अन्य मंत्रालयों, राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटरों और संबंधित प्राधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है.
भारत ने अब तक भेजी 47.5 टन राहत सामग्री
भारत ने नेपाल के लिए राहत सहायता भी बढ़ा दी है. बुधवार को 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजने के बाद गुरुवार को एक सैन्य परिवहन विमान से 37.5 टन और सामग्री, दवाएं और खाद्य सामग्री भेजी गई. इस तरह भारत की ओर से अब तक कुल 47.5 टन राहत सहायता भेजी जा चुकी है.
हेलीकॉप्टर, ड्रोन और जमीनी दल चला रहे तलाश अभियान
नेपाल के सुरक्षाकर्मी अब तक प्रभावित जिलों से 800 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाल चुके हैं. हेलीकॉप्टर, ड्रोन और जमीनी दल अलग-थलग पड़ी बस्तियों, नदी किनारों और निचले इलाकों में तलाश अभियान चला रहे हैं.
35 सड़क पुल और 45 झूलानुमा पुल क्षतिग्रस्त
नेपाल के सड़क विभाग ने बताया कि नुवाकोट के बेत्रावती से रसुवागढ़ी के बीच 42 किलोमीटर लंबी सड़क कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गई है और कई कंक्रीट के पुल बह गए हैं. नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण ने कहा कि बाढ़ से 35 सड़क पुल, 45 झूलानुमा पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़कें टूट गई हैं. त्रिशूली और देवीघाट हाइड्रो प्रोजेक्ट के साथ-साथ बिजली से जुड़े अन्य बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है.
चितवन से अब तक 137 शव बरामद
नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अबी नारायण काफले ने कहा कि चितवन से अब तक 137 शव बरामद किए गए हैं. यह बाढ़ प्रभावित जिलों में बरामद किए गए शवों की सबसे अधिक संख्या है. रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहूं और नवलपरासी जिलों से भी शव बरामद किए गए हैं.
सेना और पुलिस के कई कर्मी भी लापता
अधिकारियों ने बताया कि नेपाल सेना के कम से कम 44 कर्मी, नेपाल पुलिस के 28 कर्मी और सशस्त्र पुलिस बल के 13 कर्मी अब भी लापता हैं. जलविद्युत परियोजनाओं और सीमा शुल्क कार्यालयों में काम करने वाले करीब 160 लोगों के भी लापता होने की सूचना है.
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