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पेपर लीक केस : पूर्व IAS अफसर को नहीं मिली जमानत, कोर्ट बोला- यह मर्डर से भी बड़ा क्राइम

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार रिटायर आईएएस अधिकारी को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली. अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक करना मर्डर से भी अधिक गंभीर क्राइम है, क्योंकि इससे लाखों मेहनती युवाओं का भविष्य बर्बाद हो जाता है.
बेटे का चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ
62 साल के आरोपी जीवन किशोर ध्रुव वर्ष 2020 से 2022 के बीच हुई कथित भर्ती अनियमितताओं के दौरान छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) में सचिव के पद पर तैनात थे. इसी मामले में सीबीआई ने सितंबर 2025 में उन्हें गिरफ्तार किया था. सीबीआई की जांच में आरोपी बनाए गए लोगों में जीवन किशोर ध्रुव के बेटे सुमित ध्रुव भी शामिल हैं. जांच के दायरे में रही CGPSC भर्ती परीक्षा में सुमित ध्रुव का चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ था, जिसके बाद उन्हें भी इस मामले में आरोपी बनाया गया.
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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा, "प्रतियोगी परीक्षाओं का पेपर लीक कराने वाला व्यक्ति लाखों मेहनती युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करता है. ऐसे युवा दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं. इसलिए पेपर लीक का अपराध हत्या से भी अधिक गंभीर है. हत्या से एक परिवार प्रभावित होता है, लेकिन पेपर लीक से लाखों युवाओं का भविष्य और पूरे समाज का भरोसा टूट जाता है."
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इस मामले में जस्टिस बिभू दत्ता गुरु ने 31 जुलाई को जीवन किशोर ध्रुव की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. इसके बाद बुधवार (5 अगस्त) को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी.
किशोर ध्रुव ने अपने पद का दुरुपयोग किया
अदालत ने कहा कि शुरुआती जांच में ऐसे पर्याप्त सबूत मिले हैं, जिनसे पहली नजर में यह पता चलता है कि जीवन किशोर ध्रुव ने CGPSC के सचिव रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग किया. उन पर आरोप है कि उन्होंने 2021 की मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र (confidential question papers) अपने पास रखे और उन्हें अपने बेटे को उपलब्ध कराया.