समाचार · मध्य प्रदेश
छतरपुर में केन-बेतवा परियोजना विस्थापितों का 'चिता आंदोलन':पानी में उतरे, जल सत्याग्रह शुरू; अमित भटनागर के अनशन का तीसरा दिन
छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित मझगाय, रूंझ, नेगुवा और एनटीपीसी परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापित परिवारों का 'चिता आंदोलन' बुधवार को छठे दिन भी जारी रहा। जय किसान संगठन के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में भारी बारिश के बावजूद आदिवासी, किसान और ग्रामीण प्रदर्शन स्थल पर डटे रहे। आंदोलन को तेज करते हुए प्रदर्शनकारियों ने बुधवार से नदी में उतरकर जल सत्याग्रह शुरू कर दिया। सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर 'न्याय दो या मार दो' के नारे के साथ आमरण अनशन पर बैठे हैं, जिसका बुधवार को तीसरा दिन रहा। वहीं ग्रामीणों का मिट्टी सत्याग्रह भी दूसरे दिन जारी रहा। लगातार हो रही बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से आ रहे पानी के कारण नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। ऐसे में आंदोलन स्थल पर अचानक बाढ़ या अन्य अप्रिय घटना की आशंका जताई जा रही है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी आंदोलन जारी रखे हुए हैं। प्रशासन पर सुविधाएं बंद करने का आरोप प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक विस्थापित परिवारों को न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन समाप्त नहीं होगा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने आंदोलन स्थल पर पेयजल की व्यवस्था बंद कर दी है। इससे महिलाएं, बच्चे और अन्य आंदोलनकारी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जिसके कारण कई लोगों की तबीयत बिगड़ रही है। उनका आरोप है कि प्रशासन समस्याओं के समाधान के बजाय आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है। अधिकारियों के पहुंचने पर बनी तनाव की स्थिति आंदोलन स्थल पर बिजावर तहसीलदार अभिनय शर्मा, सटई तहसीलदार इंद्र कुमार गौतम और किशनगढ़ थाना प्रभारी कमलजीत सिंह मवई पहुंचे। इस दौरान कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई। प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों पर डराने-धमकाने का प्रयास करने और सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी के आरोप लगाए। सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण आंदोलन का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि जब तक वास्तविक विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजा, पुनर्वास और न्याय नहीं मिलेगा तथा परियोजनाओं में कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारी सभी प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास, परियोजनाओं में कथित भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई तथा विस्थापितों के कथित उत्पीड़न पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल प्रशासन की ओर से मांगों पर कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। वहीं, बढ़ते जलस्तर के बीच आंदोलन स्थल पर सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।