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परवीन बाबी का थप्पड़, पाकिस्तान में बवाल और जीनत अमान से पंगा... विवादों के बादशाह थे 'बॉलीवुड काउबॉय' Feroz Khan

INT News25 September 2026 at 07:46 am

Feroz Khan Birth Anniversary: हिंदी सिनेमा में कुछ सितारे ऐसे रहे हैं, जिन्हें सिर्फ उनकी फिल्मों से नहीं, बल्कि उनके अंदाज से भी पहचाना जाता है. फिरोज खान भी ऐसे ही अभिनेता थे. आंखों पर काला चश्मा, हाथ में सिगार, शानदार कपड़े और बात करने का बेबाक अंदाज... वह जब पर्दे पर आते थे तो नजरें उन पर टिक जाती थीं.

25 सितंबर 1939 को जन्मे फिरोज खान ने अपने लंबे फिल्मी सफर में अभिनेता, निर्देशक और निर्माता के तौर पर पहचान बनाई. 'धर्मात्मा', 'कुर्बानी', 'जांबाज' और 'काला सोना' जैसी फिल्मों ने उन्हें स्टार बनाया, लेकिन उनकी जिंदगी सिर्फ कामयाबी की कहानियों से नहीं भरी थी. उनकी बेबाकी कई बार विवादों की वजह भी बनी. आज उनके जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ ऐसे किस्से, जिनकी वजह से वह फिल्मों के अलावा भी खूब चर्चा में रहे.

परवीन बाबी का वो थप्पड़... सच या सिर्फ फिल्मी गॉसिप?

फिरोज खान और परवीन बाबी की जोड़ी को 1975 की फिल्म 'काला सोना' में देखा गया था. फिल्म में दोनों मुख्य भूमिकाओं में थे और उस दौर में उनकी जोड़ी को लेकर काफी चर्चा हुई थी. इसी फिल्म से जुड़ा एक किस्सा इंटरनेट और गॉसिप की दुनिया में लंबे समय से घूमता रहा है. दावा किया जाता है कि किसी बात को लेकर परवीन बाबी ने फिरोज खान को थप्पड़ मार दिया था.

लेकिन कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यही है कि इस थप्पड़ की कोई पक्की पुष्टि नहीं मिलती. उपलब्ध विश्वसनीय स्रोतों में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि परवीन बाबी ने सच में फिरोज खान को थप्पड़ मारा था. इसलिए इस किस्से को सच बताने के बजाय पुराना और अपुष्ट फिल्मी किस्सा कहना ज्यादा सही होगा. यानी जिस कहानी को लेकर इंटरनेट पर इतने सालों से चर्चा है, उसकी सच्चाई आज भी सवालों के घेरे में है.

पाकिस्तान में एक बयान और मच गया बड़ा बवाल

फिरोज खान की जिंदगी का सबसे अच्छी तरह दर्ज विवाद साल 2006 का है. वह अपने भाई अकबर खान की फिल्म 'ताजमहल' के प्रीमियर के लिए पाकिस्तान गए थे. लाहौर में फिल्म के प्रीमियर के दौरान उनकी कार्यक्रम के एंकर सकरे आलम से तीखी बहस हो गई. उस समय की रिपोर्ट के मुताबिक, मामला इतना बढ़ गया कि वहां मौजूद भारतीय फिल्मी दल को बीच-बचाव करना पड़ा. इसके बाद फिरोज खान के कथित पाकिस्तान-विरोधी बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया.

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मामला इतना बढ़ा कि टाइम्स ऑफ इंडिया ने 19 मई 2006 को रिपोर्ट किया कि तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने फिरोज खान के पाकिस्तान में प्रवेश पर रोक लगा दी थी. लेकिन इस कहानी का दूसरा पक्ष भी था. फिरोज खान के भाई अकबर खान ने एजेंसियों से कहा था कि उनके भाई का मतलब वैसा नहीं था और उन्होंने इसे जुबान फिसलने का मामला बताया था. यानी उस समय भी इस विवाद को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए थे.

जीनत अमान से भी हुआ था ऐसा विवाद

फिरोज खान की बेबाकी का एक किस्सा अभिनेत्री जीनत अमान ने भी याद किया है. जीनत अमान के मुताबिक, फिरोज खान ने उन्हें अपनी फिल्म 'धर्मात्मा' में एक सेकेंडरी रोल ऑफर किया था, लेकिन उन्होंने वह भूमिका करने से मना कर दिया. जीनत के मुताबिक, उनके इस फैसले से फिरोज खान नाराज हुए और फोन पर उन्होंने जीनत से काफी नाराजगी जताई.

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दोनों के बीच कुछ समय तक बातचीत भी नहीं हुई. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. बाद में फिरोज खान ने जीनत अमान को अपनी फिल्म 'कुर्बानी' में मुख्य भूमिका दी. यानी जिस अभिनेत्री से कभी उनकी अनबन हुई थी, वही बाद में उनकी सबसे चर्चित फिल्मों में से एक की हीरोइन बनीं. यही किस्सा फिरोज खान के रिश्तों और उनके बेबाक स्वभाव को समझने के लिए काफी दिलचस्प है.

फिल्मों में भी दिखता था उनका अलग अंदाज

फिरोज खान ने 1960 में 'दीदी' से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने कई फिल्मों में काम किया और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई. 'आदमी और इंसान', 'काला सोना', 'धर्मात्मा', 'कुर्बानी' और 'जांबाज' जैसी फिल्मों ने उनके करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. खास बात यह थी कि फिरोज खान सिर्फ अभिनेता बनकर नहीं रहना चाहते थे. उन्होंने निर्देशन और निर्माण में भी हाथ आजमाया. उनकी फिल्मों में ग्लैमर, एक्शन, संगीत और स्टाइल का ऐसा मेल देखने को मिला, जो उस दौर में काफी अलग था.

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'कुर्बानी' ने बदल दिया था स्टारडम का अंदाज

फिरोज खान की सबसे यादगार फिल्मों में 'कुर्बानी' का नाम जरूर आता है. इस फिल्म में उनके साथ विनोद खन्ना और जीनत अमान नजर आए थे.फिल्म की सफलता के साथ इसके गाने भी जबरदस्त लोकप्रिय हुए. फिरोज खान का स्क्रीन स्टाइल और फिल्म का ग्लैमरस अंदाज दर्शकों को खूब पसंद आया. आज भी जब बॉलीवुड के सबसे स्टाइलिश सितारों की बात होती है, तो फिरोज खान का नाम पुराने दौर के उन कलाकारों में लिया जाता है, जिन्होंने अपनी पर्सनैलिटी को ही अपनी पहचान बना लिया था.

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आखिरी फिल्म में भी नहीं छोड़ा अपना अंदाज

फिरोज खान ने अपने करियर के आखिरी दौर में 'वेलकम' में आर.डी.एक्स. का किरदार निभाया. उनका यह किरदार भी दर्शकों को खूब पसंद आया. बीमारी के बावजूद उन्होंने इस फिल्म में काम किया और पर्दे पर अपनी वही खास अकड़ और स्टाइल दिखाई, जिसके लिए वह दशकों से पहचाने जाते थे. 27 अप्रैल 2009 को 69 साल की उम्र में फिरोज खान का निधन हो गया. उनके जाने के बाद भी उनकी फिल्मों और उनके अंदाज की चर्चा खत्म नहीं हुई.

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