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Explained: 2030 तक भारत से खत्म हो जाएगी बेरोजगारी, कितना हकीकत-कितना फसाना है यह दावा?

INT News24 October 2026 at 07:45 am

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में भारत की कुल बेरोजगारी दर 5% थी. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा क्रमशः 4.2% और 6.9% था. इससे अलग, इंडिया डिडैक्टिक्स एसोसिएशन (IDA) ने एक बयान में कहा कि भारत के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में 2030 तक 35 करोड़ से अधिक नए रोजगार पैदा हो सकते हैं और ऐसा होने पर 2030 तक देश से बेरोजगारी खत्म हो जाएगी!

हालांकि, अहम सवाल यह है कि 35 करोड़ नौकरियां पैदा करने का यह अनुमान कितना व्यावहारिक है? अगर ऐसा होता है तो यह कैसे होगा? और क्या इससे सच में देश से बेरोजगारी खत्म हो जाएगी? इसे आसान भाषा में 3 सवालों के जवाब से समझते हैं.

पहला सवाल: 35 करोड़ नौकरियां आएगा कहां से?

23 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित PTI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिया डिडैक्टिक्स एसोसिएशन (IDA) ने अपने बयान में अनुमान जताया कि भारत के मैन्युफैक्चरिंग यानी विनिर्माण और सर्विस सेक्टर में 2030 तक 35 करोड़ से ज्यादा रोजगार पैदा हो सकते हैं.

दिसंबर 2025 में नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) ने बताया था कि देश में रोजगार बढ़ाने के लिए लोगों को काम से जुड़ी बेहतर ट्रेनिंग देने, छोटे कारोबारों को आगे बढ़ाने और मैन्युफैक्चरिंग व सर्विस सेक्टर के ऐसे उद्योगों को बढ़ावा देने की जरूरत है, जहां ज्यादा लोगों को नौकरी मिल सके.

NCAER के मुताबिक, अगर कामगारों को औपचारिक तरीके से कौशल प्रशिक्षण देने का दायरा 9 प्रतिशत अंक बढ़ाया जाए, तो 2030 तक करीब 93 लाख अतिरिक्त नौकरियां पैदा हो सकती हैं. आसान भाषा में कहें तो, हर 100 कामगारों में कौशल प्रशिक्षण पाने वालों की हिस्सेदारी में 9 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी होने पर इतनी नौकरियां पैदा होने की संभावना है.

जून 2025 में द इकोनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट में NCAER की स्टडी के हवाले से मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में 2030 तक 35 करोड़ लोगों को रोजगार मिलने का दावा किया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक इसमें सर्विस सेक्टर की हिस्सेदारी करीब 28 करोड़ बताई गई थी और बाकी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में.

दूसरा सवाल: किन सेक्टरों में मिल सकती हैं सबसे ज्यादा नौकरियां?

NCAER और IDA के अनुमान के अनुसार टेक्सटाइल, गारमेंट, फुटवियर, फूड प्रोसेसिंग, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने की संभावनाएं जताई गई है. इसमें प्रमुख हैं.

टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर : इसमें कपड़े बनाने, सिलाई, डिजाइनिंग, पैकिंग और निर्यात जैसे काम शामिल हैं. इन कामों के लिए मशीन चलाने वाले कर्मचारियों से लेकर डिजाइनर और सामान पहुंचाने का काम करने वाले लोगों की जरूरत होती है.

केंद्र सरकार के मुताबिक, वर्तमान में टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर में देश के 4.5 करोड़ से ज्यादा लोग काम करते हैं.

ऑटोमोबाइल : इसमें गाड़ियां बनाने, उनके पुर्जे तैयार करने, इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मरम्मत और सर्विसिंग जैसे काम शामिल हैं. इस क्षेत्र में तकनीकी काम जानने वाले युवाओं के लिए रोजगार के नए मौके बन सकते हैं.

लॉजिस्टिक्स यानी सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम : ऑनलाइन खरीदारी बढ़ने के साथ सामान रखने के लिए गोदामों, ट्रकों से माल ढोने और घर-घर सामान पहुंचाने वाले कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी.

टेलीकॉम यानी मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं का क्षेत्र : मोबाइल नेटवर्क लगाने, इंटरनेट की तारें बिछाने, नेटवर्क की खराबी ठीक करने और दूरसंचार से जुड़े उपकरण बनाने जैसे कामों में रोजगार के मौके बन सकते हैं.

केंद्र सरकार के राष्ट्रीय दूरसंचार नीति 2025 में, 2030 तक इस क्षेत्र में 10 लाख नई नौकरियां पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है.

अलग-अलग रिपोर्ट में टेक्सटाइल उद्योग में करीब 2 करोड़ नौकरियां, ऑटोमोबाइल क्षेत्र में 20 से 25 लाख नौकरियां, लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में 47 लाख कुशल कर्मचारियों और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में 44 लाख से ज्यादा रोजगार पैदा होने का अनुमान लगाया गया है. इन आंकड़ों पर गौर कीजिए कि ये सभी आंकड़े एक ही तरह के नहीं हैं. कहीं नई नौकरियों का अनुमान है, तो कहीं अतिरिक्त कुशल कर्मचारियों की जरूरत का.

तीसरा सवाल: क्या इससे बेरोजगारी खत्म हो जाएगी?

35 करोड़ रोजगार अवसर पैदा होने का अनुमान इस बात की गारंटी नहीं है कि भारत से बेरोजगारी खत्म हो जाएगी. इसकी वजह समझने के लिए रोजगार से जुड़े कुछ अहम आंकड़ों को समझना जरूरी है.

केंद्र सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 में कहा गया था कि बढ़ते कार्यबल की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत को 2030 तक गैर-कृषि क्षेत्र में हर साल औसतन करीब 78.5 लाख नए रोजगार पैदा करने होंगे. यानी रोजगार की चुनौती सिर्फ नौकरियां पैदा करने की नहीं, बल्कि हर साल श्रम बाजार में आने वाले लोगों के लिए पर्याप्त अवसर तैयार करने की भी है.

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के सितंबर 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में 15 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों की बेरोजगारी दर 5% हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में यह बेरोजगारी दर 4.2% और शहरी क्षेत्रों में 6.9% दर्ज की गई. यानी शहरी बेरोजगारी दर ग्रामीण बेरोजगारी दर से काफी ज्यादा है.

युवाओं के आंकड़े देखें, तो तस्वीर और चुनौतीपूर्ण नजर आती है.

PLFS की 2025 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, 15 से 29 साल के युवाओं में बेरोजगारी दर 2024 के 10.3% से घटकर 2025 में 9.9% रही. शहरी युवाओं में यह दर 13.6% थी, जबकि ग्रामीण युवाओं में 8.3%. इसका मतलब है कि बेरोजगारी की चुनौती सभी आयु समूहों और क्षेत्रों में एक जैसी नहीं है.

एक और अहम पहलू है रोजगार की गुणवत्ता .

PLFS 2025 के मुताबिक, नियमित वेतन या वेतनभोगी रोजगार में काम करने वालों की हिस्सेदारी 2024 के 22.4% से बढ़कर 2025 में 23.6% हुई. यह सुधार का संकेत है, लेकिन यह आंकड़ा अपने आप यह नहीं बताता कि सभी लोगों को पर्याप्त वेतन, नौकरी की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा मिल रही है.

जैसे, 5% बेरोजगारी दर का मतलब यह नहीं कि देश की 5% आबादी बेरोजगार है. इसमें वे लोग शामिल नहीं हैं जो काम नहीं कर रहे और काम की तलाश भी नहीं कर रहे हैं. इसलिए रोजगार की सही तस्वीर समझने के लिए यह भी देखना जरूरी है कि कितने लोग काम करना चाहते हैं, कितनों को काम मिला है, युवाओं की क्या स्थिति है और नौकरियां कितनी अच्छी हैं. इसे समझने के लिए देखिए इन्फोग्राफिक्स

2030 तक भारत से खत्म हो जाएगी बेरोजगारी का मतलब क्या है

35 करोड़ रोजगार अवसर पैदा होने का दावा सही साबित भी हो जाए, तब भी यह देखना जरूरी होगा कि उनमें कितनी वास्तव में नई नौकरियां हैं, कितने लोग काम की तलाश में हैं और पैदा होने वाले रोजगार उनकी योग्यता, स्थान और जरूरतों के अनुरूप हैं या नहीं. यानी रोजगार के अवसर बढ़ना और बेरोजगारी पूरी तरह खत्म होना दो अलग बातें हैं. कुल मिलाकर, भारत में मैन्युफैक्चरिंग, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में रोजगार बढ़ने की संभावनाएं जरूर हैं. लेकिन 2030 तक 35 करोड़ नए रोजगार पैदा होने का अनुमान अपने आप में बेरोजगारी खत्म होने का प्रमाण नहीं है. इसके लिए यह देखना होगा कि वास्तव में कितनी नई नौकरियां पैदा होती हैं, कितने नए लोग श्रम बाजार में आते हैं और इन नौकरियों में कितने लोगों को उनकी योग्यता के अनुरूप नियमित तथा पर्याप्त आय वाला काम मिलता है. फिलहाल, 2030 तक बेरोजगारी खत्म होने का दावा एक संभावना ही है.