Sunday, 9 August 2026
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ठाकुरगंज–सिलीगुड़ी रेल दोहरीकरण: कागजों से निकलकर ज़मीन पर उतरी योजना, 916 करोड़ की मंजूरी के बाद भूमि अधिग्रहण शुरू

INT News9 August 2026 at 08:50 am

Thakurganj Siliguri Rail Doublement Project: लंबे समय से ठाकुरगंज–सिलीगुड़ी रेलखंड के दोहरीकरण की उम्मीद लगाए बैठे स्थानीय निवासियों और यात्रियों के लिए बड़ी खबर है. दिल्ली से लेकर ज़मीन तक इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को लेकर प्रशासनिक हलचल अचानक तेज हो गई है. महज कुछ ही हफ्तों के भीतर जारी हुए तीन महत्वपूर्ण सरकारी आदेशों के बाद 56.41 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन के निर्माण की रूपरेखा पूरी तरह साफ हो चुकी है.

₹916.18 करोड़ की प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति

परियोजना को पहली बड़ी प्रशासनिक मंजूरी 8 जून 2026 को मिली, जब रेलवे बोर्ड ने ठाकुरगंज–सिलीगुड़ी डबलिंग कार्य के लिए ₹916.18 करोड़ की अनुमानित लागत स्वीकृत की.

इस स्वीकृत बजट में से ₹671.55 करोड़ सिविल कार्यों, ₹149.69 करोड़ सिग्नल एवं टेलीकम्युनिकेशन और ₹94.94 करोड़ विद्युत कार्यों के लिए आवंटित किए गए हैं. वित्तीय स्वीकृति मिलने के साथ ही योजना निर्माण के वास्तविक चरण में प्रवेश कर गई है.

परियोजना को मिला 'विशेष रेल परियोजना' का दर्जा

रेल मंत्रालय के पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे निर्माण संगठन ने 29 जून 2026 को अधिसूचना जारी कर इस 56.41 किलोमीटर लंबे रेलखंड को 'विशेष रेल परियोजना' (Special Railway Project) घोषित किया.

10 जुलाई 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित इस अधिसूचना के तहत बिहार और पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों को कवर किया गया है, ताकि काम में तेजी लाई जा सके.

भूमि अधिग्रहण के लिए अधिकारियों को मिले अधिकार

परियोजना के लिए भूमि की व्यवस्था करने के उद्देश्य से 14 जुलाई 2026 को नई अधिसूचना जारी कर सक्षम प्राधिकारियों को अधिकृत कर दिया गया.

बिहार के हिस्से के लिए जिला भू-अर्जन पदाधिकारी (किशनगंज) और पश्चिम बंगाल के क्षेत्र के लिए विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी (तीसरा परियोजना, सिलीगुड़ी) को कमान सौंपी गई है. अब रैयतों को नोटिस भेजने और मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.

Thakurganj Siliguri Rail Doublement Project: रेल रूट पर ट्रैफिक का दबाव होगा कम

इस रेलखंड का दोहरीकरण होने से उत्तर बंगाल और सीमांचल के बीच ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम हो जाएगी. दूसरी लाइन बिछने से रूट की क्षमता बढ़ेगी और मालगाड़ियों व यात्री ट्रेनों के परिचालन में होने वाले विलंब में बड़ी कमी आएगी.

प्रशासनिक स्तर पर तेजी से लिए गए फैसलों के बाद अब सभी की निगाहें ज़मीनी स्तर पर शुरू होने वाले सर्वेक्षण और भूमि अधिग्रहण के काम पर टिकी हैं.