समाचार · मध्य प्रदेश
ममता से दूर हुआ मासूम, कई सवाल अनसुलझे:अब पुलिस रिकॉर्ड, मेडिकल जांच और काउंसलिंग के बाद ही होगा फैसला
‘प्रेमाश्रय’ वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ मारपीट का मामला सामने आने के बाद हुई प्रशासनिक कार्रवाई ने एक ऐसी कहानी भी सामने ला दी है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। एक साल का मासूम, जो जन्म के बाद से हर पल अपनी मां की गोद में रहा, अब कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बीच उससे अलग हो गया है। मां एक वृद्धाश्रम में है और बेटा स्पेशल एडॉप्शन एजेंसी (SAA) में। दोनों के बीच फिलहाल सिर्फ इंतजार बचा है। बाल कल्याण समिति (CWC) ने बच्चे को विधिवत प्रक्रिया के तहत स्पेशल एडॉप्शन एजेंसी को सौंप दिया है। इसके बाद एजेंसी ने उसे एक शिशु गृह में भेज दिया। अब जब तक कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होती, मासूम वहीं रहेगा। रेलवे ट्रैक पर मिली थी गर्भवती महिला इस पूरे मामले की शुरुआत 21 जून 2025 को हुई थी। बाणगंगा क्षेत्र में रेलवे ट्रैक के पास एक गर्भवती महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ हालत में भटकती मिली थी। उसकी पहचान नहीं हो सकी और न ही कोई परिजन सामने आया। पुलिस ने उसे सुरक्षित आश्रय के लिए ‘प्रेमाश्रय’ वृद्धाश्रम भेज दिया। करीब एक महीने बाद महिला ने वहीं एक बेटे को जन्म दिया। तब से मां और बेटा दोनों साथ रह रहे थे। बच्चे के लिए मां ही उसकी पूरी दुनिया थी। कार्रवाई में बिछड़ गए मां-बेटे ‘प्रेमाश्रय’ में बुजुर्गों के साथ मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने वृद्धाश्रम खाली कराया और अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिया। इस दौरान महिला को दूसरे आश्रय गृह में भेज दिया गया, जबकि उसका एक साल का बेटा वहीं रह गया। बाद में उसे बाल कल्याण समिति के माध्यम से स्पेशल एडॉप्शन एजेंसी भेज दिया गया। अब दोनों अलग-अलग संस्थाओं में हैं। बताया जाता है कि मां की गोद से दूर होने के बाद बच्चा कई बार रो पड़ता है। उसे दूध और अन्य तरल लिक्विड तो मिल रहा है, लेकिन मां का स्पर्श और ममता उसे नहीं मिल पा रही। वह एक हफ्ते से मां से दूर है। कई सवाल अब भी अनसुलझे इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि महिला आखिर कौन है? वह किस राज्य या शहर की रहने वाली है? बच्चे का पिता कौन है? क्या महिला किसी अपराध की शिकार हुई थी या उसके साथ कोई अन्य घटना हुई? इन सभी सवालों के जवाब अब तक नहीं मिले हैं। इसी वजह से बाल कल्याण समिति ने बाणगंगा पुलिस से महिला के रेस्क्यू के समय की पूरी जानकारी और रिकॉर्ड मांगे हैं। समिति यह भी पता लगाएगी कि उस समय क्या जांच हुई थी और किन परिस्थितियों में महिला को आश्रय गृह भेजा गया था। डॉक्टरों की मदद से होगी काउंसलिंग फिलहाल महिला इंदौर के एक अन्य आश्रय गृह में रह रही है। बाल कल्याण समिति उसकी मानसिक स्थिति का डॉक्टरों से परीक्षण कराएगी। यदि चिकित्सकीय जांच में उसकी स्थिति सामान्य या संवाद करने योग्य पाई जाती है तो विशेषज्ञों की मौजूदगी में उसकी काउंसलिंग की जाएगी। उम्मीद है कि इससे उसकी पहचान, परिवार और बच्चे से जुड़े कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं। यदि सभी तथ्य स्पष्ट होते हैं और कानूनी प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो वैधानिक प्रावधानों के तहत मां और बेटे को फिर से मिलाने पर निर्णय लिया जा सकता है। मासूम के लिए सबसे बड़ा इंतजार 'मां' डॉ. सुनील आर्य (सीनियर पीडियाट्रिशयन, सरकारी चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय) का कहना है कि छह माह तक की उम्र में बच्चा पूरी तरह मां पर निर्भर रहता है। इस उम्र में मां का दूध, उसका स्पर्श और भावनात्मक जुड़ाव बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसके बाद मां के दूध के साथ उसे अन्य फीडिंग (तरल लिक्विड) भी दिया जाता है। दो साल तक की उम्र में भी वह स्वयं मां का दूध पीता है तो दिया जा सकता है। अगर मां मानसिक रूप से अस्वस्थ है तो फिर बच्चे को मां की फिलिंग नहीं हो सकती। फिलहाल कानूनी प्रक्रिया अपनी गति से चल रही है, लेकिन इस बीच सबसे ज्यादा कीमत वह मासूम चुका रहा है, जो मां की गोद और उसके दूध दोनों से वंचित है।