Wednesday, 5 August 2026
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7 साल में 274 भगोड़े लाए गए भारत, अब विदेश भागने से भी नहीं बचेंगे अपराधी

INT News4 August 2026 at 06:51 pm

केंद्र सरकार ने मंगलवार ( 4 अगस्त ) को कहा कि पिछले 7 वर्षों में 36 देशों से 274 भगोड़ों को वापस लाया गया है. यह संख्या प्रतिवर्ष औसतन करीब 40 है जो 2004-13 की अवधि की तुलना में 10 गुना अधिक है, जब हर साल करीब चार भगोड़ों को वापस लाया गया था. पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने इसे भारत की प्रत्यर्पण व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव बताते हुए कहा कि अब भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई पहले से कहीं अधिक तेज और प्रभावी हुई है.

17,874 करोड़ की संपत्ति भी कुर्क

गृह मंत्रालय के बयान के मुताबिक, सिर्फ भगोड़ों को वापस लाने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रही, बल्कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति भी कुर्क की गई है. सरकार का कहना है कि आर्थिक अपराधियों पर कानूनी शिकंजा कसने के लिए अब विशेष कानून और तकनीकी व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे अपराध कर विदेश भागने वालों के लिए बच निकलना मुश्किल हो गया है.

गृह मंत्रालय ने बताया कि इंटरपोल के जरिए जारी होने वाले रेड कॉर्नर नोटिस की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है. साल 2022 में 40, 2023 में 100, 2024 में 107, 2025 में 112 और 2026 में अब तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए हैं। पिछले तीन सालों में कुल 401 भगोड़ों के खिलाफ ऐसे नोटिस जारी हुए हैं. रेड कॉर्नर नोटिस का उद्देश्य किसी आरोपी का पता लगाकर उसे अस्थायी रूप से गिरफ्तार कर प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू करना होता है.

किन मामलों के आरोपी लौटाए गए

केंद्र सरकार के मुताबिक 2019 से जुलाई 2026 तक भारत लाए गए 274 भगोड़ों में आर्थिक अपराध, आतंकवाद, संगठित अपराध, हत्या, डकैती, यौन अपराध, बच्चों के खिलाफ अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और जाली नोट जैसे गंभीर मामलों के आरोपी शामिल हैं. इनमें 62 हत्या और हिंसक अपराध, 53 यौन अपराध, 42 संगठित अपराध, 17 आतंकी मामलों और 9 आर्थिक अपराधों के आरोपी बताए गए हैं.

तकनीक और कूटनीति से बदली तस्वीर

गृह मंत्रालय ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में प्रत्यर्पण अनुरोध अब अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किए जा रहे हैं. सभी संबंधित देशों की कानूनी जरूरतों के हिसाब से दस्तावेज और लिखित आश्वासन दिए जा रहे हैं. साथ ही, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, प्रोफाइल-मैपिंग और आधुनिक तकनीक की मदद से उन भगोड़ों का भी पता लगाया गया जिन्होंने विदेश में अपनी पहचान तक बदल ली थी.

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