समाचार · पश्चिम बंगाल
15 साल बाद फिर बंगाल में बनेगी सांप के जहर की जीवनरक्षक दवा, जानें 150 करोड़ के प्रोजेक्ट की क्या होंगी शर्तें

भारत के पहले फार्मास्यूटिकल उद्योग ‘बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड’ (BCPL) ने पश्चिम बंगाल में करीब डेढ़ दशक (15 साल) बाद एक बार फिर एंटी-स्नेक वेनम (Anti-Snake Venom) यानी सांप के जहर की जीवनरक्षक दवा का उत्पादन शुरू करने की योजना बनायी है. राज्य में सर्पदंश (Snakebite) के बढ़ते मामलों और दवा के लिए दक्षिण व पश्चिमी भारत के राज्यों पर निर्भरता खत्म करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया जा रहा है.
बंगाल सरकार के साथ उच्चस्तरीय बातचीत
कोलकाता स्थित केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (CPSU) बंगाल केमिकल्स ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकार के साथ उच्चस्तरीय बातचीत शुरू कर दी है. यदि यह डील पक्की होती है, तो बंगाल केमिकल्स का यह प्लांट पश्चिम बंगाल ही नहीं, पूरे पूर्वी भारत के लिए सर्पदंश के इलाज में गेमचेंजर साबित होगा.
नयी यूनिट के निर्माण पर खर्च होंगे 150 करोड़ रुपए
राइज कॉन्क्लेव 2026 (RISE Conclave 2026) के दौरान बंगाल केमिकल्स (BCPL) के प्रबंध निदेशक (MD) एस घोष चौधरी ने परियोजना से जुड़ी अहम जानकारियां साझा कीं. उन्होंने बताया कि एंटी-स्नेक वेनम बनाने की इस नयी यूनिट के निर्माण में लगभग 150 करोड़ रुपए का निवेश होगा.
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कंपनी ने रखी खरीद की गारंटी की शर्त
कंपनी ने पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार के सामने शर्त रखी है कि उत्पादन शुरू होने पर राज्य सरकार को एंटी-वेनम शीशियों की खरीद (Procurement Guarantee) की लिखित गारंटी देनी होगी. साथ ही मूल्य संशोधन (Price Hike Proposal) का भी प्रस्ताव कंपनी ने दिया है. कंपनी ने कहा है कि प्रति शीशी (Vial) खरीद कीमत अभी 450 रुपए है. इसे बढ़ाकर 700 से 800 रुपए करना होगा, ताकि उत्पादन की लागत और गुणवत्ता को संतुलित किया जा सके.
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स्वास्थ्य विभाग के साथ शुरुआती बातचीत जारी
पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी ने पुष्टि की है कि बंगाल केमिकल्स के साथ इस संबंध में शुरुआती दौर की चर्चा हुई है. कंपनी ने राज्य सरकार से सहयोग के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने का अनुरोध किया है. स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, यह बातचीत अभी प्राथमिक चरण में है और सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद अंतिम फैसला लिया जायेगा.