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'मोदी-शाह के खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी क्यों नहीं', राहुल गांधी ने इंदिरा का उदाहरण देकर सरकार को घेरा

चुनाव आयोग के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एंटी-इनकम्बेंसी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर निशाना साधा. राहुल गांधी ने कहा, "मैं राजनीतिक परिवार से आता हूं और 50 साल से ज्यादा समय से राजनीतिक परिवार में रहा हूं." उन्होंने कहा कि भारत में एंटी-इनकम्बेंसी बहुत तेजी से बढ़ती है और किसी भी सरकार को नहीं छोड़ती.
इंदिरा गांधी का दिया उदाहरण
राहुल गांधी ने अपनी बात समझाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश युद्ध जीता था और उस समय उनकी लोकप्रियता काफी ऊंचाई पर थी, लेकिन इसके एक-दो साल के भीतर ही बड़े स्तर पर एंटी-इनकम्बेंसी और दबाव देखने को मिला.
उन्होंने कहा कि यही चीज "एक के बाद एक नेता" के साथ होती है. राहुल गांधी के मुताबिक यह कांग्रेस नेताओं और क्षेत्रीय दलों के नेताओं के साथ भी हुआ है, लेकिन "किसी कारण से" नरेंद्र मोदी के साथ ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि अमित शाह और बीजेपी के मामले में भी एंटी-इनकम्बेंसी देखने को नहीं मिली.
राहुल गांधी की यह टिप्पणी चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों पर राजनीतिक बहस तेज होने के बाद आई है. Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग की कुछ कार्रवाइयों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं.
वोट चोरी के आरोप लगाते हुए राहुल गांधी क्या बोले?
राहुल गांधी ने वोट चोरी का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, "वोट हमारे देश की नींव है. क्योंकि इसी वोट से (जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है) हमारे संविधान को ताकत मिलती है. संविधान से हमारे कानून बनते हैं और इन्हीं कानूनों से हमारी संस्थाएं अस्तित्व में आती हैं. यह एक पूरी कड़ी है. यही कड़ी आधुनिक भारत को परिभाषित करती है. इसलिए यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह सिर्फ वोट पर हमला नहीं है, बल्कि यह हर भारतीय के विचार, बुनियादी व्यवस्था और उसकी अभिव्यक्ति पर हमला है."
राहुल गांधी ने 2 चुनाव आयुक्तों की सराहना की
हम भारत में लोकतंत्र को नष्ट होते हुए देखकर चुप नहीं बैठने वाले हैं और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा दी जाएगी. दोनों चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू, विवेक जोशी) ने समझदारी भरा कदम उठाया है और मैं इसकी सराहना करता हूं. ज्ञानेश कुमार को अपनी स्थिति के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए और उन्हें सरकारी गवाह बन जाना चाहिए. मैं उन्हें यही सलाह दूंगा. ऐसा करना राष्ट्रहित में एक कदम होगा.
मोदी-शाह के दावे और बयान का किया जिक्र
राहुल गांधी ने अमित शाह के लंबे समय तक बीजेपी की सरकार रहने के दावे और नरेंद्र मोदी के लोकसभा चुनाव में 400 पार के नारे का जिक्र करते हुए कहा कि कोई भी नेता यह नहीं कह सकता कि आने वाले कई साल तक उसकी सरकार रहेगी. उन्होंने कहा कि वह करीब 50 साल से राजनीति देख रहे हैं और भारत में एंटी-इनकम्बेंसी एक बड़ी राजनीतिक ताकत रही है. इंदिरा गांधी समेत कई प्रधानमंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को इसका सामना करना पड़ा है. राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि एंटी-इनकम्बेंसी की यह ताकत नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर असर क्यों नहीं करती.
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देश एक नई जगह पहुंच गया है. हमारे इतिहास में लोकतंत्र पर इस तरह का हमला कभी नहीं हुआ है. आने वाले 3 से 4 महीनों में दिख जाएगा कि 2024 और उससे पहले के चुनाव फेक थे और विधानसभा के चुनाव भी फेक हैं. वोट, संविधान, लीगल स्ट्रक्चर और इंस्टीट्यूशंस की कड़ी कभी नहीं टूटी, लेकिन अब अगर यह चेन टूट गई है तो चुनाव का कोई मतलब नहीं है. जो कानून पास किए गए हैं, वे सभी इलिगल हैं और जो लोग हमारी संस्थाओं को चला रहे हैं, वे भी इलिगल हैं..