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यमुनानगर हरभजन हत्याकांड में दो मुख्य शूटरों की पहचान:गैंगस्टर काला राणा गिरोह से जुड़े तार, रोहतक और सोनीपत के रहने वाले
यमुनानगर के मॉडल टाउन स्थित जैक फिटनेस जिम के बाहर ट्रांसपोर्टर एवं फाइनेंसर 65 वर्षीय हरभजन सिंह की गोलियां मारकर हत्या के मामले में पुलिस की जांच अब मुख्य शूटरों तक पहुंच गई है। हत्याकांड को अंजाम देने वाले दोनों मुख्य शूटरों की पहचान होने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार दोनों शूटर रोहतक और सोनीपत के रहने वाले हैं और उनके गैंगस्टर काला राणा गिरोह से जुड़े होने की बात सामने आई है। दोनों अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ अंबाला यूनिट ने दबिश तेज कर दी है, जबकि सीआईए की टीमें भी संभावित ठिकानों पर कार्रवाई कर रही हैं। पुलिस हत्याकांड में अब तक तीन बदमाशों को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं दो बदमाश राकेश कुमार और आर्यन को पाबनी रोड पर गांव महलावाली के पास पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया था। मुठभेड़ के दौरान दोनों के पैरों में गोली लगी थी और दोनों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। मुख्य शूटरों के काला राणा गिरोह से जुड़े होने की जानकारी जांच में अब हत्याकांड के तार गैंगस्टर काला राणा गिरोह से जुड़ने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस की जांच और गंभीर हो गई है। सूत्रों के अनुसार वारदात को अंजाम देने वाले दोनों मुख्य शूटर गिरोह से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। पुलिस अब दोनों के आपराधिक रिकॉर्ड, पुराने संपर्कों और गिरोह के अन्य सदस्यों से उनके संबंधों की जानकारी जुटा रही है। बताया जा रहा है कि मुख्य शूटरों पर पहले पांच-पांच हजार रुपए का इनाम घोषित है। अब उनकी गिरफ्तारी के लिए इनाम की राशि बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। पुलिस का मानना है कि इनाम बढ़ने से फरार शूटरों के बारे में सूचना जुटाने में मदद मिल सकती है। कई पहलुओं को ध्यान में रख आगे बढ़ रही जांच जांच अब केवल शूटरों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हरभजन सिंह की रेकी किसने की, जीपीएस लगाने की योजना किसकी थी, शूटरों को होटल में किसने ठहराया, हथियार कहां से उपलब्ध करवाए गए और वारदात के बाद उन्हें किसने सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराया। हरभजन सिंह की हत्या के पीछे की पूरी साजिश और इसमें शामिल नेटवर्क का पता लगाने के लिए पुलिस गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर रही है। एक नाबालिग को भी इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपितों से मिले इनपुट के आधार पर साजिश में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। 20 राउंड फायरिंग के बाद दबोचे गए थे दो बदमाश हरभजन सिंह हत्याकांड में संदिग्ध राकेश कुमार और आर्यन को पकड़ने के लिए पुलिस ने वीरवार शाम पाबनी रोड पर गांव महलावाली के पास नाकाबंदी की थी। कुछ समय बाद दोनों बाइक पर आते दिखाई दिए। पुलिस के अनुसार रुकने का इशारा करने पर आरोपितों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। दोनों तरफ से करीब 20 राउंड फायरिंग हुई। इस दौरान राकेश और आर्यन के पैरों में गोली लगी। घायल होने के बाद दोनों को पुलिस ने काबू कर अस्पताल में भर्ती कराया। दोनों पर पहले पांच-पांच हजार रुपये का इनाम घोषित था। अब मुख्य शूटरों पर भी इनाम बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। शूटरों को ठहराने से लेकर हथियार पहुंचाने तक मदद का आरोप पुलिस की शुरुआती जांच में गिरफ्तार आरोपितों की भूमिका हत्या की साजिश में सहयोग करने वालों के तौर पर सामने आई है। पुलिस के अनुसार राकेश और आर्यन ने हरभजन सिंह की हत्या करने वाले शूटरों को कुरुक्षेत्र के एक होटल में ठहराने के लिए कमरा दिलाने में मदद की थी। इसके अलावा शूटरों तक हथियार पहुंचाने और वारदात से पहले तथा बाद में उन्हें सहायता उपलब्ध कराने की जानकारी भी पुलिस को मिली है। जीपीएस लोकेशन के आधार पर की गई थी रेकी जांच में यह भी सामने आया है कि हत्या को अंजाम देने के लिए हरभजन सिंह की गतिविधियों पर पहले से नजर रखी जा रही थी। उनकी कार में हत्या से पहले जीपीएस चिप लगाई गई थी। इसके जरिए उनकी कार की लोकेशन पर नजर रखी जा रही थी। जीपीएस लगाने में डेरा अमीन निवासी विशाल और उसके साथ मौजूद एक अन्य युवक की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया था। उनकी नियमित गतिविधियों की जानकारी जुटाने के बाद शूटरों को उनकी लोकेशन उपलब्ध कराई जाती थी। इसी नेटवर्क के जरिए शूटरों ने हरभजन सिंह की गतिविधियों पर नजर रखी और मौका मिलने पर 3 सितंबर को मॉडल टाउन स्थित जैक फिटनेस जिम के बाहर उनकी हत्या कर दी। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि जीपीएस डिवाइस कहां से खरीदी गई, इसे कार में कब और किसने लगाया तथा इसकी लोकेशन किस व्यक्ति या गिरोह तक पहुंच रही थी।