सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के हाईकोर्ट्स को निर्देश दिया है कि किसी भी मामले का फैसला रिजर्व रखने के बाद उसे 3 महीने में सुना दिया जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो रजिस्ट्रार जनरल मामले को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के सामने रखेंगे। CJI सूर्यकांत, जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि जमानत के मामलों पर आदेश भी उसी दिन सुनाए जाएं। अगर फैसला रिजर्व रखा जाता है, तो उसे अगले दिन जरूर सुना दिया जाए। बेंच ने कहा कि मामलों पर बहस और दलीलें खत्म होने के बाद फैसला रिजर्व रखने की तारीख सभी हाईकोर्ट अपनी वेबसाइट पर भी फ्लैश करेंगे। दरअसल, शुक्रवार को पिला पहन और झारखंड सरकार से जुड़ा एक मामला CJI की बेंच में सुनवाई के लिए पहुंचा था। इसमें कहा गया कि हाईकोर्ट ने फैसला अपलोड नहीं किया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को 13 आदेश दिए धारा 142, जिसने सुप्रीम कोर्ट को स्पेशल पावर दिए भारत के संविधान ने धारा 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को स्पेशल पावर दिए हैं। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट कम्पलीट जस्टिस के लिए स्पेशल ऑर्डर जारी कर सकता है। यानी किसी मामले में सामान्य कानून तुरंत या पूरा न्याय नहीं कर पा रहा हो, तो सुप्रीम कोर्ट अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल कर सकता है। CJI ने कहा- 15 साल हाईकोर्ट जज रहा, कभी फैसला रिजर्व नहीं रखा CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि हाईकोर्ट जज के रूप में 15 साल के कार्यकाल में कभी भी किसी मामले में फैसला सुरक्षित नहीं रखा, न ही तीन महीने के भीतर फैसला नहीं सुनाया। उन्होंने कहा- न्याय की कीमत पर ऐसी देरी को जारी रहने नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से ज्यादा केस पेंडिंग सुप्रीम कोर्ट में इस समय 92,385 पेंडिंग मामले हैं। कोविड के बाद ई-फाइलिंग बढ़ने से मामलों की संख्या लगातार बढ़ी है। केंद्र सरकार ने 11 दिसंबर 2025 को राज्यसभा में बताया था कि देशभर के कोर्ट में कुल 5.49 करोड़ से ज्यादा केस पेंडिंग हैं। इसमें 90,897 मामले सुप्रीम कोर्ट और देश के 25 हाईकोर्ट में 63,63,406 मामले पेंडिंग थे। ————————— सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने केंद्र को 5 नाम भेजे: सुप्रीम कोर्ट जज नियुक्त करने की सिफारिश; चार हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस; एक वरिष्ठ महिला वकील सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त करने के लिए पांच नामों की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी है। इनमें चार हाईकोर्ट के CJI और एक वरिष्ठ महिला वकील शामिल हैं। कॉलेजियम ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू, बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस चंद्रशेखर, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण पल्ली और सीनियर एडवोकेट वी मोहना के नाम भेज हैं। यह सिफारिश 22 और 27 मई को हुई कॉलेजियम बैठकों के दौरान की गई हैं। पढ़ें पूरी खबर…
हाईकोर्ट 3 महीने से ज्यादा फैसला सुरक्षित न रखें:सुप्रीम कोर्ट का निर्देश- जमानत पर आदेश उसी दिन या अगले दिन दें, अपलोड तुरंत करें
