एमपी में 25 हजार रुपए में 10वीं की मार्कशीट:स्कूल जाने और पढ़ने की जरूरत नहीं; दलाल बोला- 10 साल से धंधा कर रहा हूं

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25 हजार रुपए दो, एक दिन में 10वीं-12वीं की मार्कशीट मोबाइल पर मिल जाएगी। आठ दिन में प्रिंट कॉपी भी मिल जाएगी, जो बोर्ड की वेबसाइट पर दिखेगी और सरकारी नौकरी में भी काम आएगी। यह दावा करते हुए अशोकनगर के आदर्श हायर सेकेंडरी स्कूल के संचालक आनंद मलिक ने मोबाइल पर किसी से बात की। इसके बाद उन्होंने कहा कि ओपन स्कूल की मार्कशीट के लिए 40 हजार रुपए लगेंगे। प्रदेश के कई जिलों में ऐसे दलाल सक्रिय हैं, जो 10वीं-12वीं की फर्जी मार्कशीट 10 हजार से 25 हजार रुपए में मनचाहे नंबरों के साथ उपलब्ध कराने का दावा करते हैं। आरोप है कि इन मार्कशीट के जरिए ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर सरकारी नौकरियां हासिल की जा रही हैं। दैनिक भास्कर ने डेढ़ महीने तक इस नेटवर्क की जांच की। इस दौरान मार्कशीट बनाने और बेचने का दावा करते एक स्कूल संचालक और सरकारी शिक्षक कैमरे में कैद हुए। पढ़िए, रिपोर्ट… फर्जी मार्कशीट के जरिए प्रमोशन लिया निवाड़ी जिले में आंगनवाड़ी सहायिकाएं अनीता देवी कुशवाहा और राजकुमारी यादव पर 10वीं की फर्जी मार्कशीट के जरिए प्रमोशन लेकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बनने का आरोप लगा। शिकायत के बाद जांच हुई। दोनों का प्रमोशन निरस्त कर दिया गया, लेकिन आगे कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। ग्वालियर-चंबल के कई जिलों से फर्जी मार्कशीट के जरिए नौकरी और प्रमोशन हासिल करने के मामले सामने आ रहे थे। सवाल था कि ये मार्कशीटें कहां बन रही हैं? इसी की पड़ताल के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने जांच शुरू की। बैकडेट में भी मार्कशीट बन जाएगी पहला सुराग अशोकनगर से मिला कि आदर्श बाल विकास हायर सेकेंडरी स्कूल संचालक आनंद मलिक लंबे समय से फर्जी मार्कशीट बना रहा है। भास्कर टीम ने 10वीं में फेल छात्र की असली मार्कशीट लेकर उसका रिश्तेदार बनकर आनंद से संपर्क किया। शुरुआत में आनंद टालमटोल करता रहा, लेकिन बीना रिफाइनरी में नौकरी का हवाला देने पर मार्कशीट बनाने को तैयार हो गया। कई फोन कॉल के बाद उसने रिपोर्टर को अशोकनगर बुलाया। स्कूल पहुंचने पर आनंद मलिक पुताई और नए ऑफिस का काम करवाता मिला। इसके बाद वह रिपोर्टर को कमरे में ले गया और बातचीत शुरू की। रिपोर्टर ने 10वीं की मार्कशीट मांगी। इस पर आनंद मलिक ने कहा कि पहले PDF कॉपी उपलब्ध करा दी जाएगी और करीब 7 दिन में प्रिंटेड मार्कशीट मिल जाएगी। जब रिपोर्टर ने ज्यादा मार्कशीट बनवाने पर रकम कम करने की बात की, तो मलिक ने कहा कि हर मार्कशीट के 25 हजार रुपए लगेंगे। उसने बैकडेट में 2018-19 की मार्कशीट बनाने का दावा किया। वहीं, चालू सत्र की मार्कशीट 10 हजार रुपए में देने की बात कही, लेकिन उसके लिए अगस्त-सितंबर तक इंतजार बताया। वेरीफिकेशन की जिम्मेदारी भी ले ली जब रिपोर्टर ने कम कीमत का जिक्र किया तो मलिक ने दावा किया कि उसकी बनाई मार्कशीट प्राइवेट कंपनियों के वेरीफिकेशन में पास हो जाती हैं। बातचीत में मलिक ने नेशनल ओपन बोर्ड की मार्कशीट का विकल्प बताया। उसने दावा किया कि बिना परीक्षा दिए मार्कशीट उपलब्ध कराई जा सकती है और जरूरत के अनुसार प्रतिशत बढ़वाए जा सकते हैं। मलिक ने दावा किया कि वह पिछले 10 साल से एमपी बोर्ड और ओपन बोर्ड से जुड़े इस काम में सक्रिय है। कहा कि उसकी मदद से कई लोगों को आंगनवाड़ी, शिक्षा विभाग और अनुकंपा नियुक्तियों में नौकरी मिली है। नर्सरी से PhD तक, घर बैठे डॉक्टर बन जाओ बातचीत के दौरान मलिक ने दावा किया कि वह B.Ed से लेकर PhD तक की डिग्री का इंतजाम कराता है। रिपोर्टर ने PhD डिग्री का जिक्र किया तो मलिक ने दावा किया कि नौकरी करते हुए डिग्री दिलाई जा सकती है। इसके लिए उसने 3.5 लाख से 4 लाख रुपए खर्च आने की बात कही। दो भाई मिलकर चला रहे गोरखधंधा जांच का दूसरा सिरा दतिया जिले से जुड़ा मिला। निवाड़ी में मिली कथित फर्जी मार्कशीटों पर उर्दू एजुकेशन बोर्ड की मुहर और ब्राइट फ्यूचर पब्लिक स्कूल, बसई, दतिया का नाम दर्ज था। भास्कर टीम बसई कस्बे पहुंची, जो मध्य प्रदेश-उत्तर प्रदेश सीमा के पास है। बस स्टैंड के पास ब्राइट फ्यूचर पब्लिक स्कूल का बोर्ड लगा मिला। स्थानीय लोगों ने बताया कि स्कूल पटेरिया भाइयों का है, जिन्हें इलाके में “मास्टर जी” कहा जाता है। रिपोर्टर ने शिवपुरी निवासी रामनिवास जाटव का चाचा बनकर दिनेश पटेरिया से संपर्क किया। शुरुआत में दिनेश ने कहा कि मार्कशीट केवल पढ़ाई और परीक्षा के बाद मिलती है। रिपोर्टर ने बताया कि रामनिवास राजस्थान की सीमेंट फैक्ट्री में हेल्पर है और नौकरी के लिए 10वीं की मार्कशीट चाहिए। कई दौर की बातचीत के बाद दिनेश ने उसे दतिया बुलाकर अपने भाई अवधेश से मिलवाने की बात कही। दो घंटे इंतजार के बाद पेट्रोल पंप पर मुलाकात रिपोर्टर रामनिवास के भाई बनकर दतिया पहुंचे। अवधेश ने पहले पुराने कलेक्ट्रेट बुलाया, फिर ऑनलाइन पेमेंट की बात कही। रिपोर्टर के नकद भुगतान की बात पर वह मिलने को तैयार हुआ, लेकिन देर तक नहीं पहुंचा। करीब आधे घंटे तक अवधेश फोन पर रिपोर्टर की लोकेशन और साथ आए लोगों के बारे में पूछता रहा। भरोसा होने के बाद अवधेश ने पास के पेट्रोल पंप पर बुलाया, जहां वह स्कूटर पर इंतजार करता मिला। मुलाकात के दौरान अवधेश पटेरिया ने पहले पैसे लिए, फिर अतिरिक्त रकम मांगी। इसके बाद उसने छात्र की फोटो और 8वीं की मार्कशीट की कॉपी लेकर जरूरी जानकारी जुटाई। 3-4 महीने का दावा, अगले दिन भेजी मार्कशीट 2100 रुपए लेने के बाद पटेरिया ने मार्कशीट बनने में 3-4 महीने लगने की बात कही। हालांकि, अगले ही दिन उसने मोबाइल पर मार्कशीट की फोटो भेज दी। फोटो “वन टाइम सीन” मोड में भेजी गई थी, जिसे टीम ने स्क्रीन रिकॉर्ड कर सुरक्षित कर लिया। मार्कशीट पर ब्राइट फ्यूचर पब्लिक स्कूल, बसई (दतिया) और उर्दू एजुकेशन बोर्ड का नाम दर्ज था। टीम के पास रामनिवास की असली 8वीं की मार्कशीट और कथित फर्जी 10वीं की मार्कशीट दोनों मौजूद थीं। बोर्ड की वेबसाइट पर भी दिखी मार्कशीट मार्कशीट की पुष्टि के लिए टीम ने उर्दू एजुकेशन बोर्ड की वेबसाइट पर 2024 का रिजल्ट चेक किया। दिए गए रोल नंबर पर रामनिवास जाटव की मार्कशीट दिखाई दी। इसमें वही फोटो थी, जो पेट्रोल पंप पर ली गई थी। यानी यह मार्कशीट बोर्ड के रिकॉर्ड में दर्ज दिखाई दे रही थी। अधिकारी बोले- शिकायत मिलेगी तो कार्रवाई करेंगे निवाड़ी के महिला एवं बाल विकास अधिकारी अरुण कुमार सिंह ने कहा- जिले में 10 सहायिकाओं ने उर्दू बोर्ड की मार्कशीट लगाई थी। आपत्ति के बाद इन्हें मान्यता नहीं दी गई। संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। वहीं, दतिया के जिला शिक्षा अधिकारी सुनील शुक्ला ने कहा- अवधेश पटेरिया शासकीय शिक्षक हैं। उनके निजी स्कूल संचालन और कथित फर्जी मार्कशीट मामले की जांच की जा रही है। ये खबर भी पढ़ें… ब्लाइंड-बाबू’ कार चलाते हैं…जो चल नहीं सकता,वो दौड़ रहा मध्य प्रदेश में ऐसे सरकारी कर्मचारी हैं, जिन्होंने कागजों पर खुद को ‘दिव्यांग’ बताकर आरक्षण और नौकरी हासिल की, लेकिन असल जिंदगी में वे पूरी तरह फिट हैं। दैनिक भास्कर की पड़ताल में तीन मामले सामने आए हैं। इनमें दृष्टिबाधित कोटे से भर्ती बाबू कार चलाता मिला, जबकि पैरों से लाचार बताए गए शिक्षक रैलियों में दौड़ लगाते नजर आए। पढ़ें पूरी खबर…