अफसर बोले- लेन-देन कर मामला खत्म करो, मैंने मना किया:हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने कैसे पकड़ा 26 टन गोमांस, उस रात की पूरी कहानी

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 26 टन गौ-मांस की तस्करी के मामले ने पूरे प्रशासनिक अमले को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। इस मामले के मुख्य आरोपी असलम चमड़ा को आखिरकार पुलिस ने रिमांड पर ले लिया है और उससे यह जानने की कोशिश कर रही है कि 260 गायों के बराबर यह मांस आखिर आया कहां से? इस गिरफ्तारी से ज्यादा चौंकाने वाली कहानी उस रात की है, जब इस पूरे खेल का पर्दाफाश हुआ। जब जय भवानी हिन्दू संगठन के अध्यक्ष भानू हिन्दू और उनकी टीम ने अपनी जान पर खेलकर गौ-मांस से भरे कंटेनर को रोका, और फिर सिस्टम के झूठ से पूरी रात और अगले 20 दिन तक लड़ाई लड़ी। पहली बार, इस पूरे घटनाक्रम के मुख्य सूत्रधार भानू हिन्दू के शब्दों में उस रात की सिलसिलेवार कहानी पढ़िए… कई दिनों से थी सूचना, 17 दिसंबर की रात बजा फोन
इस पूरे खेल को उजागर करने वाले भानू हिन्दू ने भास्कर रिपोर्टर को बताया, हमें काफी दिनों से भोपाल के जहांगीराबाद स्थित स्लॉटर हाउस से बड़े पैमाने पर गो-मांस की सप्लाई होने की खुफिया सूचनाएं मिल रही थीं। हमें यह भी बताया गया था कि असलम चमड़ा नाम का शख्स शहर में मृत गायों को उठाने की आड़ में एक बड़ा सिंडिकेट चला रहा है और उनका मांस अवैध रूप से सप्लाई कर रहा है। हम लगातार इस पर नजर बनाए हुए थे। वह बताते हैं, 17 दिसंबर 2025 की रात करीब 10 बजे थे। मेरे फोन की घंटी बजी। मेरे एक मुखबिर ने सूचना दी कि ट्रक नंबर (UP78-CT-7221) स्लॉटर हाउस के अंदर खड़ा है और उसमें गौ-मांस के पैकेट लोड किए जा रहे हैं। सूचना पक्की थी। नो-एंट्री खुलने का इंतजार और ट्रक का पीछा
भानू हिन्दू के अनुसार, उनका अंदाजा बिल्कुल सटीक था। ट्रक के संचालक शहर में भारी वाहनों के लिए नो-एंट्री खुलने का इंतजार कर रहे थे, जो रात 11 बजे खुलती है। ठीक 11 बजे के आसपास ट्रक स्लॉटर हाउस से रवाना हुआ। मेरे साथियों ने तुरंत मुझे इसकी जानकारी दी। ट्रक आयकर भवन से होते हुए जिला कोर्ट वाली रोड पर आया और वहां से पुलिस कंट्रोल रूम तिराहे की ओर बढ़ने लगा। तब तक मैंने अपने सभी साथियों को इकट्ठा कर लिया था। मैं अपनी बाइक से तेजी से महिला थाने के सामने पहुंचा और बीच सड़क पर बाइक लगाकर ट्रक को रोकने का इशारा किया। मैंने यह भी देखा कि दो लोग बाइक पर ट्रक को पायलट कर रहे थे, यानी उसे रास्ता दिखा रहे थे। लेकिन जैसे ही उन्होंने मुझे देखा, वे बाइक घुमाकर भाग निकले। मेरा शक और गहरा हो गया। CM के काफिले का बहाना और पुलिस का ड्रामा
जैसे ही ट्रक रुका, भानू ने ड्राइवर से पूछा,इसमें क्या है? ड्राइवर ने आत्मविश्वास से जवाब दिया, बफेलो मीट है। भानू ने कहा, “मुझे पक्की खबर है कि इसमें गाय का मांस है।” यह सुनते ही ड्राइवर ने कुछ कागजों से भरा एक लिफाफा उनकी ओर बढ़ा दिया। इसी बीच एक अप्रत्याशित मोड़ आया। उस समय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला वहां से गुजरने वाला था, जिसके कारण सड़क पर भारी पुलिस बल और चेक पॉइंट्स लगे हुए थे। ट्रक रुकते ही पुलिसकर्मी दौड़कर वहां आए। भानू बताते हैं, “पुलिसवालों ने मुझसे कहा कि सीएम साहब का काफिला गुजरने वाला है, जल्दी से यहां से ट्रक हटवाएं, रास्ता जाम मत करो। वे ट्रक को वहां से जल्द से जल्द रवाना करना चाहते थे। लेकिन मैं ट्रक के सामने अड़ा रहा और उसके बम्पर पर लटक गया। मैंने कहा कि जब तक इसकी जांच नहीं होगी, मैं इसे जाने नहीं दूंगा। अफसर बोले- यह तो बफेलो मीट है, शक कैसे कर सकते हैं?
मामला बढ़ता देख और भीड़ को इकट्ठा होता देख, प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। रात के लगभग 3 बजे, प्रशासन के कहने पर पशु चिकित्सकों की एक टीम को मौके पर बुलाया गया। लेकिन यहां से शुरू हुआ झूठ और मामले को दबाने का असली खेल। भानू के अनुसार, टीम ने आते ही कह दिया कि उनके पास सैंपल लेने के लिए आवश्यक उपकरण और टीम नहीं है। उन्होंने बस दूर से देखकर ही फौरी तौर पर इसे ‘बफेलो मीट’ बता दिया, लेकिन भवानी संगठन के कार्यकर्ता अपनी मांग पर अड़े रहे। उनका स्पष्ट कहना था कि जब तक मांस का सैंपल लेकर लैब में जांच नहीं हो जाती, वे एक इंच भी नहीं हटेंगे। पूरी रात कड़ाके की ठंड में कार्यकर्ता ट्रक की घेराबंदी करके जागते रहे। अगले दिन सुबह करीब 10:30 बजे नगर निगम की एक टीम मौके पर पहुंची। निगम की एक वरिष्ठ अधिकारी ने कार्यकर्ताओं पर ही सवाल उठा दिए। भानू ने बताया, निगम की अफसर ने हमसे कहा कि आप इस ट्रक को कैसे रोक सकते हैं? यह तो नगर निगम के आधिकारिक स्लॉटर हाउस से निकला है। इस पर संदेह का कोई आधार ही नहीं है। 20 दिन बाद रिपोर्ट और गुपचुप FIR
भारी दबाव के बाद आखिरकार मांस के सैंपल लिए गए। भानू को बताया गया कि रिपोर्ट 3 दिन में आ जाएगी। लेकिन यह इंतजार 3 दिन की जगह 20 दिन लंबा हो गया। भानू बताते हैं, मैं लगभग हर दिन अरेरा हिल्स थाने जाकर पूछता था कि रिपोर्ट कब आएगी, लेकिन मुझे कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता था। हर बार मुझे टाल दिया जाता था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि 20 दिन बाद जब रिपोर्ट आई और उसमें गौ-मांस होने की पुष्टि हुई, तब भी पुलिस ने शिकायतकर्ता भानू हिन्दू को इसकी जानकारी नहीं दी। पुलिस ने गुपचुप तरीके से FIR दर्ज की और आरोपियों की गिरफ्तारी भी कर ली। भानू कहते हैं, हमें हमारे सूत्रों से पता चला कि रिपोर्ट पॉजिटिव आई है और FIR भी हो गई है। “बीच का रास्ता निकाल लो, लेन-देन कर लो”
भानू हिन्दू ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जिस रात उन्होंने ट्रक को रोक रखा था, उस दौरान कुछ अधिकारियों ने उन पर मामला रफा-दफा करने का दबाव बनाया। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा, मुझसे कहा गया कि बीच का रास्ता निकालकर ट्रक को जाने दें। कुछ लेन-देन करके मामला खत्म करने की भी पेशकश की गई। लेकिन, मैंने साफ इनकार कर दिया। यह हमारी आस्था का सवाल था, हम सौदा नहीं कर सकते थे। स्लॉटर हाउस बंद होने के बाद अब आदमपुर पर नजर
इस बड़ी कार्रवाई के बाद जहांगीराबाद स्थित नगर निगम का स्लॉटर हाउस बंद कर दिया गया है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह नेटवर्क इतना बड़ा है कि यह अब अपना नया ठिकाना तलाश रहा है। ऐसी आशंका है कि अब यह अवैध कारोबार आदमपुर या शहर के बाहरी इलाकों में शिफ्ट हो सकता है, जहां निगरानी कम हो। फिलहाल, असलम चमड़ा पुलिस की गिरफ्त में है और कई और बड़े नामों के उजागर होने की उम्मीद है। लेकिन यह मामला सिर्फ गौ-तस्करी का नहीं है, बल्कि यह उस सिस्टम पर भी एक बड़ा सवाल है, जो व्हिसलब्लोअर को सहयोग देने के बजाय, झूठ बोलकर और जानकारी छिपाकर अपराधियों को बचाने की कोशिश करता नजर आया। ये खबर भी पढ़ें….. 260 गायों का मांस बफेलो-मीट मानकर छोड़ा, असलम चमड़ा से पूछताछ से डर गए अफसर राजधानी भोपाल के सरकारी स्लॉटर हाऊस के ट्रक से गोमांस पकड़े जाने के बाद नगर निगम और पुलिस ने भले ही मामले की जांच शुरू कर दी है। लापरवाही बरतने वाले अफसरों को सस्पेंड कर दिया हो, लेकिन इस पूरे मामले में नगर निगम, पुलिस और डॉक्टरों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…