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पासपोर्ट विवाद पर थरूर का तंज, बोले- कानून में बड़ा विरोधाभास

Congress MP Shashi Tharoor: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पासपोर्ट विवाद को लेकर केंद्र सरकार के उस बयान पर निशाना साधा है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल x पोस्ट किया है, जिसमें थरूर ने कहा कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम और कानूनी दस्तावेज नहीं है. विदेश मंत्रालय के इस बयान “अजीब कानूनी विरोधाभास” को बताते हुए कानून में बदलाव करने की मांग की है.
पासपोर्ट पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि भारतीय पासपोर्ट जारी करने से पहले सरकार पूरी जांच और दस्तावेजों का सत्यापन करती है. ऐसे में अगर वही पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाता, तो यह आम लोगों के लिए भ्रम पैदा करने वाला है. सरकार को इस कानून में जल्द से जल्द परिवर्तन करना चाहिए.
आधार को लेकर भी जताई चिंता
कांग्रेस सांसद थरूर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि आधार केवल पहचान और पते का प्रमाण है, नागरिकता का नहीं. ऐसे में करोड़ों भारतीयों के पास सरकारी दस्तावेज तो हैं, लेकिन कानूनी रूप से कोई भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा रहा है. ऐसे मामले में सरकार को खुद स्पष्ट करना चाहिए कि नागरिकता का दस्तावेज फिर क्या है.
कानून बदलने की मांग
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार कानून में संशोधन कर पासपोर्ट और सामान्य आधार कार्ड को नागरिकता का वैध और अंतिम प्रमाण घोषित करने की मांग की है. उनका कहना है कि इससे लोगों को बार-बार अपनी नागरिकता साबित करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
गैर-नागरिकों के लिए अलग आधार कार्ड का सुझाव
कांग्रेस नेता थरूर ने यह भी कहा कि भारत में रहने वाले गैर-नागरिकों को अलग रंग या अलग पहचान वाला आधार कार्ड जारी किया जाए. इससे नागरिक और गैर-नागरिक की पहचान आसान होगी और सरकारी प्रक्रिया भी सरल बनेगी.
सरकार ने क्या कहा?
केंद्र सरकार की ओर से स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है, न कि नागरिकता का अंतिम प्रमाण. सरकार का कहना है कि यह कोई नया नियम नहीं है और यही कानूनी व्यवस्था पहले से लागू है. सरकार ने 2013 के बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले और पासपोर्ट अधिनियम, 1967 का भी हवाला दिया है.