Sunday, 25 October 2026
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रूंगटा यूनिवर्सिटी के टेकफेस्ट का समापन:आशिक़ी फेम अभिनेत्री अनु अग्रवाल से लेकर गूगल फॉर एजुकेशन के इंडिया हेड ने स्टूडेंट्स को दिए सक्सेस टिप्स

INT News25 October 2026 at 12:58 am

सपने पूरे करने की कोई उम्र नहीं होती, अपनी अलग पहचान बनाने के लिए जरूरी है कि युवा दूसरों को समझाने में समय गंवाने के बजाय अपनी खूबियों को पहचानें। मेहनत, आत्मविश्वास और लगातार सीखने की आदत ही सफलता का रास्ता बनाती है। कुछ ऐसे ही संदेश शनिवार को रूंगटा इंटरनेशनल स्किल्स यूनिवर्सिटी में आयोजित टेडएक्स कार्यक्रम में सुनने को मिले। यूनिवर्सिटी में टेकफेस्ट के समापन अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्रों से आए वक्ताओं ने अपने जीवन के अनुभव साझा किए और विद्यार्थियों को भविष्य के लिए प्रेरित किया। शाम को आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में विधायक रिकेश सेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया। गूंजी संघर्ष से सफलता तक की कहानियां

कार्यक्रम में फिल्म अभिनेत्री डॉ. अनु अग्रवाल ने अपने जीवन के उतार-चढ़ाव साझा किए। वर्ष 1990 में फिल्म आशिकी से रातोंरात पहचान बनाने के बाद एक सड़क हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी। हादसे के बाद वह करीब 29 दिन तक कोमा में रहीं। उन्हें याददाश्त खोने और लंबे समय तक ठीक होने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। इसके बाद उन्होंने फिल्मों से दूरी बनाकर आध्यात्मिकता और योग का रास्ता अपनाया। उनके अनुभव ने बताया कि कठिन परिस्थितियों के बाद भी जीवन को नए सिरे से शुरू किया जा सकता है। रोप ऑफ होप की संस्थापक मुस्कान पटवारी ने दिव्यांगता से मुकाबला करते हुए आगे बढ़ने की अपनी कहानी बताई। उन्होंने अपने प्रयासों और सामाजिक चुनौतियों से निपटने के अनुभव साझा किए। वहीं, ‘सी पॉजिटिव’ की संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. कीर्ति सिसोदिया ने कहा कि सपनों की कोई समाप्ति तिथि नहीं होती। महिलाओं को अपने सपने जिंदा रखने और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करते रहना चाहिए। अपनी अलग पहचान बनाने पर जोर

गूगल फॉर एजुकेशन के भारत प्रमुख संजय जैन ने कहा कि शिक्षा बढ़ने के साथ व्यक्ति में विनम्रता भी बढ़नी चाहिए। किसी का पारिवारिक या सामाजिक परिवेश उसकी सफलता की सीमा तय नहीं करता। मेहनत करने और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता से बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। वहीं, प्रसिद्ध वक्ता डॉ. संजय अरोड़ा ने युवाओं को हर किसी को अपनी बात समझाने की कोशिश छोड़कर अपनी ऐसी खासियत पहचानने की सलाह दी, जो उन्हें दूसरों से अलग बनाती है। उन्होंने युवाओं को अपने से करीब 15 साल छोटे लोगों के साथ भी समय बिताने की बात कही, क्योंकि वे गलतियां पहचानने और नई जानकारियों से जुड़े रहने में मदद कर सकते हैं। कैसे बनेगा मजबूत रेज्यूमे

सात बार टेडएक्स मंच पर अपनी बात रख चुके स्पीकर दक्ष सेठी ने अच्छी नौकरी पाने के लिए मजबूत बायोडाटा तैयार करने पर जोर दिया। शिक्षाविद् और वक्ता श्रीधर मंकर ने सफलता के लिए पांच अहम बातों पर चर्चा करते हुए कहा कि किसी विचार को चुनना, उसकी योजना बनाना और उसे जमीन पर उतारना जरूरी है। वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर अपूर्वा जादौन ने विद्यार्थियों से प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रकृति हमारे जीवन का हिस्सा है। अपनी गलतियों से सीखना और उन सीखों को जीवन में अपनाना भी जरूरी है। इसी तरह अभिनेत्री छवि मित्तल ने यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. जवाहर सूरीशेट्टी के साथ बातचीत में पारंपरिक पारिवारिक परिवेश से मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंचने का अनुभव साझा किया। उनका संदेश था कि मनचाहा परिणाम पाने के लिए अपना शत-प्रतिशत देना चाहिए।