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पटना में सफाई कर्मियों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी, सड़कों से घरों तक कचरे का अंबार, वार्ता पर भी नहीं बनी सहमति

Patna News : पटना राजधानी समेत पूरे बिहार के नगर निकाय कर्मियों की हड़ताल शनिवार को तीसरे दिन भी जारी रही. सफाई कर्मियों के काम पर नहीं लौटने से पटना में डोर-टू-डोर कचरा संग्रह पूरी तरह प्रभावित रहा. शहर के विभिन्न इलाकों में कचरे का अंबार लग गया है. इस बीच यूनियन और पटना नगर निगम के बीच वार्ता को लेकर भी गतिरोध बना हुआ है. दोनों पक्ष एक-दूसरे पर बैठक में शामिल नहीं होने का आरोप लगा रहे हैं.
रोज 1200 टन कचरा उठता है, लेकिन सेवा ठप
पटना नगर निगम के छह अंचलों से सामान्य दिनों में प्रतिदिन करीब 1100 से 1200 टन कचरा उठाया जाता है. हड़ताल के कारण डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन वाहन घरों तक नहीं पहुंचे. मजबूरन लोगों ने सड़क किनारे, खाली जगहों और सार्वजनिक स्थलों पर कचरा फेंकना शुरू कर दिया. अपार्टमेंट, अस्पताल और बाजार क्षेत्रों के आसपास भी गंदगी बढ़ गई है.
इन इलाकों में सबसे ज्यादा असर
मौर्यालोक परिसर, गांधी मैदान, कांटी फैक्ट्री रोड, बहादुरपुर कॉलोनी, कदमकुआं, एजी कॉलोनी, पोस्टल पार्क, अटल पथ सर्विस लेन, राजीव नगर, शिवपुरी, बाबा चौक, बाजार समिति, लोदीपुर, छज्जूबाग, राजेंद्र पथ, किदवईपुरी और आर ब्लॉक समेत कई इलाकों में सड़क किनारे कचरे का ढेर लग गया है. कई स्थानों पर मृत पशुओं को भी सड़क किनारे छोड़ दिया गया है.
पुलिस सुरक्षा में चलाया गया सफाई अभियान
निगम प्रशासन ने शुक्रवार देर रात पुलिस बल की मौजूदगी में सैदपुर, कदमकुआं, पटना जंक्शन समेत कई इलाकों में विशेष सफाई अभियान चलाया. वहीं, मौर्यालोक परिसर में धारा 144 लागू कर दी गई है. सभी अंचलों में सुबह और शाम की पाली में 100-100 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है. प्रशासन के अनुसार हड़ताल के दौरान सफाई कर्मियों पर हमले, वाहनों के टायर पंचर करने और काम में बाधा डालने की शिकायतें भी मिली हैं.
यूनियन बोली- नगर आयुक्त से वार्ता को तैयार, लेकिन पारदर्शिता जरूरी
पटना नगर निगम संयुक्त कर्मचारी समन्वय समिति के अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश सिंह ने कहा कि कर्मचारी नगर आयुक्त के साथ वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन बातचीत पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि व्हाट्सएप संदेश के जरिए बैठक का बुलावा देना उचित प्रक्रिया नहीं है और आधिकारिक पत्र के माध्यम से वार्ता का निमंत्रण दिया जाना चाहिए. समिति के संयोजक मंगल पासवान ने दावा किया कि तमाम दबाव के बावजूद हड़ताल पूरी तरह सफल है.
निगम का दावा- दो बार बुलाया, फिर भी नहीं पहुंचे प्रतिनिधि
पटना नगर निगम प्रशासन का कहना है कि हड़ताल खत्म कराने के लिए लगातार दूसरे दिन संयुक्त कर्मचारी समन्वय समिति को पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन कोई प्रतिनिधि बैठक में शामिल नहीं हुआ. निगम ने यह भी कहा कि 21 जुलाई को हड़ताल से पहले हुई बैठक में उसके अधिकार क्षेत्र की सभी मांगों का समाधान कर दिया गया था.
क्या हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
संयुक्त कर्मचारी समन्वय समिति के अनुसार उनकी प्रमुख मांगों में दैनिक कर्मियों को नियमित करना, आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त कर कर्मचारियों का समायोजन करना तथा एसीपी और एमएसीपी पर नगर विकास विभाग द्वारा लगाई गई रोक हटाना शामिल है. समिति का कहना है कि जब तक इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होगा, तब तक हड़ताल जारी रहेगी.
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