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जैश के निशाने पर थे शुभेंदु अधिकारी और जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल, एसटीएफ का खुलासा

पश्चिम बंगाल पुलिस के विशेष कार्यबल (एसटीएफ) द्वारा गिरफ्तार आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के कथित सदस्य ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को निशाना बनाने और दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की वर्दी में तोड़फोड़ करने की साजिश रची थी. एसटीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी.
पाकिस्तान के आका के इशारे पर काम कर रहा था हमीम
एसटीएफ के महानिरीक्षक (आईजी) गौरव शर्मा ने बताया कि आरोपी की पहचान हमीम मंडल के रूप में हुई है. उसे शुक्रवार को पूर्वी बर्धमान जिले से गिरफ्तार किया गया और उसी रात पूछताछ के लिए कोलकाता लाया गया. शर्मा ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जांच में मंडल के पाकिस्तान के आकाओं से संबंध स्थापित हुए हैं और वह उनके इशारे पर काम कर रहा था.
हमीम को मिली थी शुभेंदु अधिकारी पर नजर रखने की जिम्मेदारी
उन्होंने कहा कि हमीम को पाकिस्तान के आकाओं ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की गतिविधियों पर नजर रखने का काम सौंपा था. उसे उन स्थानों की जानकारी जुटाने के लिए कहा गया था, जहां मुख्यमंत्री बिना सुरक्षा के मौजूद हो सकते थे. एसटीएफ ने दावा किया कि मंडल ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल में हुए छात्रों के प्रदर्शन में पुलिस की वर्दी हासिल कर घुसपैठ करने, वहां तोड़फोड़ करने की साजिश रची थी.
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पुलिस ऑफिसर और राजनेता भी थे निशाने पर
आईपीएस अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि शुभेंदु के अलावा कई पुलिस अधिकारी और राजनीतिक नेता भी इस आतंकी मॉड्यूल के निशाने पर थे. एसटीएफ ने दावा किया कि आरोपी इंस्टाग्राम पर संपर्क बनाने के बाद व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे ‘एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग’ ऐप्स के जरिये पाकिस्तान में कई आकाओं के संपर्क में था. जांचकर्ताओं ने पाकिस्तान के इनके आकाओं की पहचान ‘राणा’, ‘उजैर’, ‘आबिद जट्ट 333’ और ‘हमाद’ के नाम से की है. एसटीएफ को संदेह है कि ये सभी पाकिस्तान के शहजाद भट्टी गिरोह से जुड़े हैं.
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हनी ट्रैप के जरिये अपहरण की योजना की सूचना पर हुई कार्रवाई
शर्मा ने बताया कि इस मॉड्यूल की जांच तब शुरू हुई, जब अधिकारियों को हावड़ा के एक वरिष्ठ नेता से फिरौती वसूलने और उनके बेटे का ‘हनी ट्रैप’ के जरिये अपहरण करने की साजिश की सूचना मिली. उन्होंने कहा- कुछ दिन पहले हमें जानकारी मिली कि हावड़ा के एक वरिष्ठ नेता से फिरौती मांगने और उनके बेटे का ‘हनी ट्रैप’ के जरिये अपहरण करने की योजना है. हमें बताया गया कि इसके पीछे एक संगठन है. इसी सुराग से हम साहिबगंज के एक सोशल मीडिया अकाउंट तक पहुंचे, जिसका संचालन अर्पिता सरकार नाम की महिला कर रही थी.
4 वर्ष से संपर्क में थे अर्पिता सरकार और हमीम मंडल
उन्होंने कहा कि अर्पिता सरकार के सोशल मीडिया अकाउंट की जांच से अधिकारियों का ध्यान हमीम मंडल तक पहुंचा. शर्मा के अनुसार, दोनों पिछले 4 वर्षों से संपर्क में थे. पहले इंस्टाग्राम पर उनकी पहचान हुई और बाद में वे व्यक्तिगत रूप से भी मिले. उन्होंने कहा कि इस कथित आतंकी नेटवर्क के पूरे दायरे, मॉड्यूल के अन्य सदस्यों और इसके सीमा पार संबंधों का पता लगाने के लिए जांच जारी है.
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