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दार्जिलिंग-कर्सियोंग-कलिम्पोंग में वर्षा का कहर, भू-स्खलन से थमी पहाड़ की रफ्तार, 4 की मौत

Torrential Rain in North Bengal: उत्तर बंगाल में लगातार 72 घंटे से हो रही मूसलाधार बारिश ने पहाड़ों पर तबाही मचा दी है. दार्जिलिंग, कर्सियोंग और कलिम्पोंग जिले में जगह-जगह भू-स्खलन हो रहे हैं. पहाड़ी रास्ते बंद हैं. बिजली गुल है और मोबाइल नेटवर्क भी ठप हो गया है. इसके चलते पूरा पहाड़ी इलाका का संपर्क बाकी दुनिया से कट-सा गया है. प्रशासन ने अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि की है. 12 से ज्यादा लोग लापता हैं. इनमें ज्यादातर लोग चाय बागानों में काम करने वाले मजदूर हैं. मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को लोगों और पर्यटकों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के निर्देश दिये हैं. केंद्रीय गृह मंत्री ने लोगों को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है.
मौसम विभाग ने जारी किया था रेड अलर्ट
मौसम विभाग ने 20 जुलाई से ही इस क्षेत्र के लिए रेड अलर्ट जारी कर दिया था. पिछले तीन दिनों में दार्जिलिंग में 340 मिमी, कर्सियोंग में 410 मिमी और कलिम्पोंग में 380 मिमी वर्षा हुई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का कहना है कि अगले 48 घंटे तक ऑरेंज अलर्ट रहेगा. इस दौरान पहाड़ों पर 150 से 200 मिलीमीटर तक वर्षा हो सकती है. ऐसे में भू-स्खलन का खतरा अभी टला नहीं है.
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सड़कें बदहाल, NH-110 बंद
बारिश की वजह से सड़कों की हालत खराब है. दार्जिलिंग की हिलकार्ट रोड पर 6 अलग-अलग जगहों पर मलबा गिरा है.
टाइगर हिल के पास करीब 200 मीटर सड़क पूरी तरह बह गयी है.
घूम स्टेशन के पास रेल की पटरी पर भी मलबा जमा हो गया है, जिसकी वजह से दार्जिलिंग टॉय ट्रेन सेवा को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है.
कर्सियोंग में स्थिति और गंभीर है. NH-110 रोहिणी के पास धंस गयी है, जिससे सिलीगुड़ी से कर्सियोंग का सीधा संपर्क टूट गया है.
पंकाबाड़ी रोड पर 3 बड़े भू-स्खलन हुए हैं. वहां 500 से ज्यादा गाड़ियां फंसी हैं.
जिला अस्पताल तक एंबुलेंस का पहुंचना भी मुश्किल.
कलिम्पोंग में 4 जगह पर बंद एनएच-10
कलिम्पोंग में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 10 (NH-10) तीस्ता बाजार के पास 4 जगहों पर बंद है. इससे सिक्किम का संपर्क भी कट गया है. कलिम्पोंग शहर में पिछले 30 घंटे से बिजली नहीं है. लावा और लोलेगांव जाने वाली सड़कों पर मलबा भरा पड़ा है.
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जान-माल को नुकसान
जान-माल के नुकसान की बात करें, तो दार्जिलिंग में 2, कर्सियोंग में 1 और कलिम्पोंग में 1 व्यक्ति की मौत हुई है. 25 से ज्यादा लोग घायल हैं. 300 से अधिक कच्चे मकानों में दरारें आ गयीं हैं. 80 घर पूरी तरह ढह गये हैं. कलिम्पोंग के गीटे खुर्द में बुधवार रात 2 बजे पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा सीधे घरों पर आ गिरा. राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद मलबे से 3 लोगों को निकाला.
राहत और बचाव में उतरी NDRF और सेना
राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है.
NDRF की 4 टीमें दार्जिलिंग, कर्सियोंग, कलिम्पोंग और मिरिक में तैनात की गयी हैं.
सेना की 2 टुकड़ियां कर्सियोंग और कलिम्पोंग में रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं.
बागडोगरा से 2 हेलीकॉप्टर फंसे हुए पर्यटकों और गंभीर मरीजों को निकालने के लिए स्टैंडबाय पर रखे गये हैं.
18 राहत शिविर बनाये गये हैं, जहां 4000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित पहुंचाया गया है.
लोगों की जान बचाना सबसे पहली प्राथमिकता है. फंसे हुए पर्यटकों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाये. जिलाधिकारी प्रभावित क्षेत्र के लोगों और वहां के प्रशासनिक अधिकारियों के लगातार संपर्क में रहें. -शुभेंदु अधिकारी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल
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खाने पीने के सामान की किल्लत
मानसून टूरिज्म के कारण पहाड़ों पर हजारों पर्यटक फंसे हुए हैं. दार्जिलिंग में करीब 8,000 और कलिम्पोंग में 3,000 पर्यटक होटलों में रुके हैं. होटल फुल हैं. खाने-पीने की चीजों की किल्लत हो गयी है. स्थानीय लोगों की भी परेशानी बढ़ने लगी है. चाय बागानों में काम बंद होने से दिहाड़ी मजदूरों के लिए रोजी-रोटी का संकट हो गया है.
मोबाइल टावर क्षतिग्रस्त, इंटरनेट ठप
इंटरनेट और मोबाइल टावर क्षतिग्रस्त होने से करीब 40 प्रतिशत इलाकों का संपर्क पूरी तरह कट गया है. BSNL 24 घंटे में नेटवर्क बहाल करने की कोशिश में जुटा है.
BRO और PWD की 20 मशीनें NH-10 और NH-110 को खोलने में जुटी हैं.
अधिकारियों का कहना है कि सड़कें पूरी तरह खुलने में कम से कम 3 से 4 दिन लग सकते हैं.
25 जुलाई के बाद मिलेगी राहत
मौसम विभाग ने कहा है कि 25 जुलाई की रात से वर्षा की तीव्रता कम हो सकती है. वर्ष 2023 के भू-स्खलन के बाद इसे मानसून की सबसे बड़ी आपदा मानी जा रही है. सड़क, बिजली, पानी और नेटवर्क तीनों ठप होने से पहाड़ों पर रहने वाले लोगों का जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है.