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2 हजार से अधिक के UPI पेमेंट पर लग सकता है एक्स्ट्रा चार्ज, सरकार से इसकी अनुमति देने की संभावना

UPI Payments : भारत के मुफ्त UPI पेमेंट सिस्टम में बदलाव हो सकता है. सरकार ने संसद में 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट' में बदलाव का प्रस्ताव रखा है. जिससे भविष्य में सरकार द्वारा व्यवसायों को किए गए 2000 रुपए से अधिक के यूपीआई पेमेंट पर व्यापारी छूट दर या शुल्क के रूप में 0.25% से 0.4% तक लगाने की अनुमति दिए जाने की संभावना है. वहीं, एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को किए गए पेमेंट को इसके दायरे से बाहर रखा जाएगा.
एमडीआर पर हट सकता है प्रतिबंध
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा मंगलवार को पेश किए गए टैक्सेशन और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक में अधिसूचित इलेक्ट्रॉनकि भुगतान माध्यमों पर बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं द्वारा लगाए जाने वाला मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) पर प्रतिबंध को हटाने का प्रस्ताव है. लेकिन सरकारी अधिकारियों ने बताया कि इस पर प्रस्ताव को कब लागू किया जाएगा, इस पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है.
दैनिक खरीद पर खास असर पड़ने की संभावना नहीं
एक अधिकारी ने कहा कि यदि इसे लागू भी किया जाता है, तो 95 % लेनदेन पर व्यापारी छूट दर लागू नहीं होगी. इसके अलावा सभी व्यवसाय मामूली राशि के शुल्क को ग्राहकों पर नहीं डालेंगे. उम्मीद है कि यह चार्ज सिर्फ उन व्यापारियों पर लागू होगा जिनका सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा है. इसका मतलब है कि ग्राहकों को शायद ही कुछ अतिरिक्त भुगतान करना पड़े, जबकि छोटे कारोबारियों को मुफ्त यूपीआई ट्रांज़ैक्शन की सुविधा मिलती रह सकती है. वहीं, दूध, सब्जियां और किराने का सामान खरीदने पर या दैनिक खरीद सहित ऑटो और टैक्सी के भुगतान पर इसका कोई खास असर पड़ने की संभावना नहीं है.
फिलहाल व्यापारी उपभोक्ता से नहीं वसूलते एमडीआर
वर्तमान में क्रेडिट कार्ड पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू होता है. लेकिन अधिकांश व्यापारी इसे उपभोक्ताओं से नहीं वसूलते. क्रेडिट कार्ड के एमडीआर के मामले में जहां शुल्क नियंत्रित नहीं है, वहां यह लेनदेन मूल्य का 3% तक हो सकता है. डेबिट कार्ड से 20 लाख रुपए तक के लेनदेन पर यह सीमा 0.4% है और इससे अधिक मूल्य के लेनदेन पर 0.9% है.
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