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पेपर लीक रोकने का 'Zero-Leak Formula': सचिवालय सेवा के अफसर डॉ. सुदीप कुमार ने लिखी किताब

हजारीबाग : देश और राज्यों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और भर्ती व्यवस्था में गड़बड़ियों की बढ़ती घटनाओं के बीच हजारीबाग स्थित विनोबा भावे विश्वविद्यालय (VBU) में एक बेहद प्रासंगिक पुस्तक का विमोचन किया गया. पीजी इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष (HOD) डॉ. हितेंद्र अनुपम ने लेखक डॉ. सुदीप कुमार की नई पुस्तक ‘द एग्जाम दैट कैन नॉट लीक’ (The Exam That Cannot Leak) का सांकेतिक विमोचन किया. यह पुस्तक अमेजन किंडल पर भारत सहित दुनिया के 13 देशों में डिजिटल रूप से उपलब्ध हो चुकी है.
झारखंड सचिवालय सेवा के अफसर हैं लेखक डॉ. सुदीप कुमार
पुस्तक के लेखक डॉ. सुदीप कुमार वर्तमान में जल संसाधन विभाग हजारीबाग में सेक्शन ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं. वे बीपीएससी (BPSC) 56वीं-59वीं संयुक्त परीक्षा के माध्यम से बिहार में नगर कार्यपालक पदाधिकारी भी रह चुके हैं. उन्होंने विनोबा भावे विश्वविद्यालय से ही इतिहास में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है और वे इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस के लाइफ मेंबर भी हैं.
'जीरो-लीक सिद्धांत': पेपर लीक रोकने के लिए दिए व्यावहारिक सुझाव
लेखक के अनुसार, पुस्तक का मुख्य विचार ‘जीरो-लीक सिद्धांत’ (Zero-Leak Principle) पर आधारित है, जिसका मूल मंत्र- 'मौका खत्म करो, लालच कम करो और संस्कृति बदलो' है. डॉ. सुदीप ने पेपर लीक को महज किसी एक परीक्षा केंद्र की लापरवाही न मानकर पूरी सिस्टम की खामी बताया है. पुस्तक में प्रश्नपत्रों के सुरक्षा एनक्रिप्शन, अंतिम समय में रैंडम प्रश्न चयन, कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT), गोपनीय मूल्यांकन और मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम करने जैसे आधुनिक और व्यावहारिक तकनीकी उपाय सुझाए गए हैं.
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'अचीवमेंट कार्ड' का अनोखा आइडिया और रोजगार का नया रास्ता
किताब का सबसे खास और क्रांतिकारी विचार ‘अचीवमेंट कार्ड’ का कांसेप्ट है. लेखक ने सवाल उठाया है कि जो योग्य छात्र कुछ नंबरों से अंतिम चयन से वंचित रह जाते हैं, उनकी क्षमता का उपयोग कैसे हो? इसके लिए उन्होंने ऐसे छात्रों को अचीवमेंट कार्ड देकर उनके स्किल को प्राइवेट सेक्टर, कॉर्पोरेट नौकरियों और स्टार्टअप्स से जोड़ने का रोडमैप प्रस्तुत किया है.
परिजनों और संपादकीय टीम के प्रति जताया आभार
यह पुस्तक किसी सरकार या व्यक्ति पर आरोप लगाने के बजाय पूरी तरह से प्रशासनिक और तकनीकी सुधार का सकारात्मक रास्ता दिखाती है. पुस्तक के मुख्य संपादक डॉ. जितेंद्र अनुपम हैं, जबकि डॉ. जूही शिवानी, डॉ. अवंतिका कुमारी और डॉ. संदीप कुमार मिश्रा ने सहयोग दिया है. विमोचन के अवसर पर लेखक डॉ. सुदीप ने अपनी माता रंभा नारायण, पिता स्व. सुबोध नारायण और पत्नी अपराजिता (शिक्षिका, डीएवी स्कूल) समेत अपने पूरे परिवार का आभार व्यक्त किया.
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