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बेऊर जेल से बाहर आते ही गरजे माले विधायक संदीप सौरव, बोले-ये तो सिर्फ शुरुआत है, आगे इससे भी बड़ा आंदोलन होगा

Bihar Students Protest : NEET पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलन के बाद गिरफ्तार किए गए माले विधायक संदीप सौरव बुधवार को बेऊर जेल से रिहा हो गए. जेल से बाहर निकलते ही उन्होंने सरकार पर तीखा हमला बोला. संदीप सौरव ने कहा कि "यह आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है. यह तो सिर्फ शुरुआत है, आगे इससे भी बड़ा आंदोलन होगा. उन्होंने दावा किया कि छात्रों के संघर्ष के आगे सरकार को झुकना पड़ा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उसी का परिणाम है.
यह छात्रों की जीत है, सरकार को झुकना पड़ा
जेल से बाहर आने के बाद से बातचीत में संदीप सौरव ने कहा कि यह छात्रों की जीत है. उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान छात्रों पर जिस तरह का दमन हुआ, उसका जवाब सरकार को देना पड़ा. उन्होंने कहा, .सरकार को आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना पड़ा. लेकिन सिर्फ एक मंत्री के इस्तीफे से सिस्टम नहीं बदलेगा. इसके लिए आगे भी लड़ाई लड़नी होगी.
बोले माले विधायक-जेल का अनुभव अच्छा रहा
संदीप सौरव ने कहा कि जेल में उनका अनुभव अच्छा रहा. उन्होंने बताया कि जेल के अंदर अखबार और टीवी की सुविधा थी. वहीं से उन्हें धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जानकारी मिली. उन्होंने कहा कि इस्तीफे की खबर जरूर आई, लेकिन इससे पूरी व्यवस्था में बदलाव नहीं होगा. छात्रों की लड़ाई अभी जारी रहेगी.
जेल से छूटे छात्रों ने भी सुनाई अपनी कहानी
संदीप सौरव के साथ रिहा हुए कई छात्रों ने भी जेल के अंदर के अनुभव साझा किए. छात्र अमन कुमार लाल ने कहा कि जेल एक तरह की "यूनिवर्सिटी" है, जहां बहुत कुछ सीखने को मिलता है. उन्होंने कहा कि अगर छात्रों पर फिर से बर्बरता हुई तो वे दोबारा आंदोलन करेंगे. छात्र सकीब ने बताया कि जेल प्रशासन को पता था कि वे छात्र हैं, इसलिए उनके साथ अच्छा व्यवहार किया गया. वहीं नैतिक और सोनू कुमार ने बताया कि जेल में अखबार मिलता था. अखबार से ही उन्हें धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जानकारी मिली, जिससे उन्हें लगा कि उनका आंदोलन बेकार नहीं गया.
जेल के बाहर हुआ जोरदार स्वागत
दिशा संगठन के छात्र नेता आशीष भी जेल से रिहा हुए. जेल के बाहर समर्थक ढोल, माला और फूल लेकर पहुंचे थे. रिहा हुए छात्रों का जोरदार स्वागत किया गया. कई परिजनों ने की रिपोर्टिंग की भी सराहना की.
FIR को लेकर भी उठा नया विवाद
इस बीच छात्र आंदोलन से जुड़ी FIR पर भी सवाल उठने लगे हैं। किशनगंज के रहने वाले मोहम्मद सदाकत कोनन राही ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर दावा किया कि वह पिछले चार महीने से रूस में हैं. प्रदर्शन के दिन भी वह रूस में ही थे, लेकिन इसके बावजूद उनका नाम FIR में जोड़ दिया गया. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और FIR की समीक्षा की मांग की है.
आंदोलन पर अभी विराम नहीं
संदीप सौरव और रिहा हुए छात्रों के बयानों से साफ है कि वे इस आंदोलन को खत्म नहीं मान रहे हैं. उनका कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी उनकी लड़ाई जारी रहेगी और जरूरत पड़ी तो छात्र फिर सड़कों पर उतरेंगे.
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