Friday, 25 September 2026
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संस्थाओं ने सुझाया IGM में पर्यटन का रोडमैप:गीता क्रिएटर्स मीट से जुड़ेगा GEN-Z, हेरिटेज सर्किट बनाने की एडवाइज; कुरुक्षेत्र में बने गीता-गंगा घाट

INT News25 September 2026 at 06:15 am

इस बार अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव (IGM) में कुरुक्षेत्र फिर से यज्ञमान बनेगा। इस बार IGM को मेले और धार्मिक कार्यक्रमों तक सीमित रखने के बजाय इसे शहर के पर्यटन, तीर्थाटन, युवाओं और संस्कृति से जोड़ने की तैयारी है। गुरुवार को गीता ज्ञान संस्थानम् में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में हुई बैठक में 285 धार्मिक, सामाजिक और व्यापारिक संस्थाओं ने महोत्सव के स्वरूप को लेकर सुझाव दिए। अब कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड (केडीबी) इन सुझाव पर काम करेगा। ज्यादातर सुझावों में एक बात साफ थी कि महोत्सव 21 दिन का जरूर हो, लेकिन इसका फायदा कुरुक्षेत्र को पूरे साल मिलना चाहिए। इस IGM 5 से 25 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान आर्ट एंड क्राफ्ट मेला लगाया जाएगा। 14 से 20 दिसंबर तक मुख्य कार्यक्रम होंगे। इनमें गीता यज्ञ, गीता पाठ, प्रदर्शनी, संत सम्मेलन समेत कई कार्यक्रम होंगे। पहली बार दिखेंगी सैन्य और अंतरिक्ष की अचीवमेंट्स IGM में पहली बार देशभर के स्कूलों और यूनिवर्सिटी के करीब 10 लाख स्टूडेंट्स को महोत्सव से जोड़ने की तैयारी है। इसके साथ-साथ नेवी, एयरफोर्स और इसरो अपनी प्रदर्शनी लगाएंगे, यानी धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ देश की सैन्य और अंतरिक्ष अचीवमेंट्स को भी महोत्सव से जोड़ा जाएगा। महोत्सव में इस बार दिल्ली और पश्चिम बंगाल स्टेट पार्टनर रहेंगे। कुरुक्षेत्र का इतिहास और महत्सव समझकर लौटें बैठक में आए सुझावों में सबसे ज्यादा जोर इस बात पर रहा कि बाहर से आने वाला श्रद्धालु और पर्यटक सिर्फ कार्यक्रम देखकर वापस न जाए, बल्कि कुरुक्षेत्र के इतिहास, महत्सव और संस्कृति को समझकर जाएं। इससे पर्यटक और श्रद्धालु खुद कुरुक्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देंगे। टूर ऑपरेटर बुलाने के साथ चले स्पेशल बसें-ट्रेन श्री जयराम संस्थाओं की ओर से कहा गया कि कुरुक्षेत्र में टूर ऑपरेटरों का विशेष सेमिनार कराया जाए। इसमें उन्हें कुरुक्षेत्र के इतिहास, तीर्थ स्थलों और गीता महोत्सव की जानकारी दी जाए। टूर ऑपरेटर देश के दूसरे शहरों से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को कुरुक्षेत्र को टूर पैकेज में शामिल कर सकेंगे। इससे सिर्फ महोत्सव के दिनों में भीड़ बढ़ाने के बजाय कुरुक्षेत्र को धार्मिक पर्यटन के स्थायी नक्शे पर मजबूत करने में मदद मिल सकती है। इसी के साथ सरस्वती हेरिटेज बोर्ड की तर्ज पर गीता हेरिटेज बोर्ड या गीता सर्किट बनाने का सुझाव भी आया। इसका मकसद गीता से जुड़े तीर्थों को एक सर्किट में जोड़कर पर्यटकों के लिए घूमना आसान बनाना है। गीता क्रिएटर्स मीट: संतों से लेकर सीएम-पीएम तक गीता पर वीडियो इस्कॉन की ओर से गोविंद कृष्ण दास ने गीता जयंती क्रिएटर्स मीट का सुझाव दिया। इसका मकसद सोशल मीडिया के जरिए युवाओं तक गीता का संदेश पहुंचाना है। इसमें देश के बड़े कंटेंट क्रिएटर्स, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े लोगों को बुलाया जा सकता है। साथ ही मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, वीआईपी और संत-महात्मा भी गीता से जुड़े छोटे वीडियो या सेल्फी वीडियो रिकॉर्ड करें। इनमें वे गीता के किसी श्लोक, संदेश या अपने अनुभव की बात कहें। इस तरह के वीडियो सोशल मीडिया पर चलाए जाएं तो महोत्सव का कंटेंट सिर्फ ब्रह्मसरोवर तक सीमित नहीं रहेगा। खासकर युवाओं (GEN-G) तक गीता का संदेश डिजिटल माध्यम से पहुंचाने का रास्ता बनेगा। स्कूलों के लिए फ्री बसें, स्पेशल बस और ट्रेन की मांग कृष्ण कृपा सोसायटी की ओर से स्पेशल बस और ट्रेन चलाने की पेशकश की गई। साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर करने की मांग रखी गई। इसका सीधा असर बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही पर पड़ेगा। साथ ही देशभर से स्टूडेंट्स को जोड़ने की तैयारी को देखते हुए स्कूलों के लिए फ्री बसों की सुविधा देने का सुझाव आया। पुरानी पहचान को बचाने की बात बैठक में ब्रह्मसरोवर और आसपास के क्षेत्र की सुंदरता बढ़ाने पर भी सुझाव आए। चारों तरफ पेड़ और हरियाली रखने की बात कही गई। साथ ही सरोवर की सफाई पर विशेष ध्यान देने का सुझाव आया। गीता भवन से जुड़े केके गुप्ता की ओर से कुरुक्षेत्र की पुरानी पहचान और ऐतिहासिक स्वरूप को सामने रखने की बात रखी गई। सुझाव यह था कि महोत्सव में नई भव्यता के साथ शहर के पुराने इतिहास और धरोहर को भी सामने रखा जाए, ताकि बाहर से आने वाले लोगों को यह पता चले कि कुरुक्षेत्र सिर्फ एक आयोजन स्थल नहीं, बल्कि लंबे धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाला क्षेत्र है। सन्निहित सरोवर में सफाई की व्यवस्था हो श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के प्रधान महासचिव पंडित रामपाल शर्मा की ओर से सन्निहित सरोवर में पानी की सफाई कराने का सुझाव दिया गया। साथ ही पिंडदान करने आने वाले श्रद्धालुओं की जरूरत को ध्यान में रखते हुए वहां जरूरी पिंडदान सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था का सुझाव आया। इसका मकसद यह है कि तीर्थ पर आने वाले श्रद्धालुओं को जरूरी सामग्री के लिए इधर-उधर न भटकना पड़े और धार्मिक व्यवस्था भी व्यवस्थित रहे। इसके अलावा महोत्सव के दौरान लगाए जाने वाले फूड कोर्ट और खाने-पीने के स्टॉल ब्रह्मसरोवर की परिधि से बाहर रखे जाएं, क्योंकि ब्रह्मसरोवर धार्मिक तीर्थ है। खाने-पीने की व्यावसायिक गतिविधियों को बाहर रखने से तीर्थ की मर्यादा और पारंपरिक स्वरूप को बनाए रखने में मदद मिलेगी। संस्था अपने परिसर में एक दिन मनाए गीता महोत्सव अग्रवाल वैश्य समाज की ओर से सुझाव आया कि महोत्सव सिर्फ ब्रह्मसरोवर या मुख्य आयोजन स्थल तक सीमित न रहे। हर संस्था अपने कार्यालय या परिसर में एक दिन गीता महोत्सव का कार्यक्रम करे। वहां सांस्कृतिक कार्यक्रम, गीता से जुड़े कार्यक्रम और सामाजिक गतिविधियां हों। समाज की ओर से देशभर से अपने अग्र बंधुओं को कुरुक्षेत्र आने का निमंत्रण देने की बात भी कही गई। इसी तरह दूसरे समाजों की संस्थाएं भी अपने समाज के लोगों को महोत्सव में बुलाएं। इससे अलग-अलग शहरों से आने वाले लोगों की भागीदारी बढ़ाने का रास्ता बनेगा। ज्योतिसर नहर पर बने गीता-गंगा घाट पवन शर्मा पहलवान ने ज्योतिसर नहर पर गीता-गंगा घाट बनाने का सुझाव दिया। मांग रखी कि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बहते पानी में स्नान और पूजा की सुविधा मिले, जैसे हरिद्वार और बनारस में गंगा के कई घाट है, उसी मॉडल पर यहां घाट बनाया जाए। इसके साथ सतलुज-यमुना लिंक (SYL) में नौका विहार शुरू की जाए। अगर ऐसी सुविधाएं विकसित होती हैं तो धार्मिक पर्यटन के साथ घूमने-फिरने का आकर्षण भी बढ़ सकता है। इससे सरकार को फाइनेंशियल सुपोर्ट मिलेगा। साथ ही रोजगार की संभावना भी बढ़ेगी। पार्किंग की स्थायी व्यवस्था हो जीओ गीता समिति ने महोत्सव के दौरान आने वाली भीड़ को देखते हुए स्थायी पार्किंग व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया। अभी महोत्सव के समय अस्थायी इंतजाम करने के बजाय ऐसी पार्किंग विकसित करने की बात कही गई, जिसका इस्तेमाल पूरे साल किया जा सके। दो समय स्पेशल भंडारे की पेशकश अंतरराष्ट्रीय जाट धर्मशाला के प्रधान कृष्ण कुमार श्योकंद ने महोत्सव में दो समय स्पेशल भंडारा लगाने की बात कही। इससे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को भोजन की सुविधा देने में संस्थाओं की भागीदारी बढ़ेगी। षड्दर्शन साधु समाज ने सुझाव दिया गया कि महोत्सव के दौरान नगर परिषद सीमा या मुख्य आयोजन क्षेत्र में मीट और शराब की दुकानें बंद रखी जाएं। अयोध्या की तर्ज पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया सेंटर प्रेस क्लब कुरुक्षेत्र के उपप्रधान अशोक यादव ने अयोध्या मॉडल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का मीडिया सेंटर बनाने का सुझाव दिया। इसका मकसद देश-विदेश से आने वाले पत्रकारों को रिपोर्टिंग के लिए बेहतर सुविधाएं देना और कुरुक्षेत्र से महोत्सव की खबरों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए एक स्थायी व्यवस्था तैयार करना है। कृष्ण-राम की लीलाओं की जानकारी सनातन धर्म मंदिर की ओर से ललित चावला ने महोत्सव में लगाए जाने वाले फ्लैक्स, होर्डिंग और बोर्ड को ज्यादा रोचक और नया बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इन बोर्ड पर सिर्फ कार्यक्रम की जानकारी देने के बजाय बीच-बीच में श्रीराम और श्रीकृष्ण से जुड़ी लीलाओं और प्रसंगों की छोटी-छोटी जानकारी दी जाए। केडीबी की अनाउंसमेंट में भी ऐसे प्रसंग बताए जाएं। इससे महोत्सव में आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक सिर्फ घूमकर वापस न जाएं, बल्कि साथ में धार्मिक और संस्कार से जुड़ी जानकारी भी लेकर जाएं। लाडवा-पिहोवा-शाहाबाद से भी जोड़े जाने की जरूरत बैठक में यह सोच भी सामने आई कि गीता महोत्सव का असर सिर्फ थानेसर और ब्रह्मसरोवर क्षेत्र तक सीमित नहीं रहना चाहिए। लाडवा, पिहोवा और शाहाबाद जैसे कुरुक्षेत्र जिले के दूसरे हिस्सों को भी कार्यक्रमों और पर्यटन गतिविधियों से जोड़ा जाए। इससे आने वाले पर्यटक एक ही स्थान पर रुकने के बजाय जिले के दूसरे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचेंगे।