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Video: अभिजीत दीपके का दिल्ली पुलिस पर आरोप- 'दादी के निधन के बाद भी परिवार से बात नहीं करने दी'

CJP Protest : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने दावा किया कि हिरासत के दौरान उन्हें अपने परिवार और वकील से बात करने की अनुमति नहीं दी गई. अभिजीत के मुताबिक, उनकी दादी के निधन के बाद परिवार पहले से ही दुख में था, लेकिन पुलिस ने तड़के 3:30 बजे उनके पिता को फोन कर यह बताने को कहा कि उन्हें लंबे समय के लिए जेल जाना पड़ सकता है.
'कुछ मिनट के लिए फोन मांगा, लेकिन नहीं मिला'
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वह अपनी दादी के साथ रहने वाले अपने कजिन से बात करना चाहते थे. उन्हें अपने कजिन का नंबर याद नहीं था, इसलिए उन्होंने कुछ मिनट के लिए अपना फोन मांगा, ताकि नंबर निकाल सकें. उनका आरोप है कि पुलिस ने फोन नहीं दिया. उन्होंने वकील से बात करने की मांग भी की, लेकिन इसकी अनुमति नहीं मिली.
अभिजीत ने सवाल उठाया कि उनके पिता को तड़के 3:30 बजे फोन करने की जरूरत क्या थी, जबकि वे अपनी मां को खोने के दुख से गुजर रहे थे. उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई से उनके परिवार को और मानसिक परेशानी हुई.
दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?
दिल्ली पुलिस की डीसीपी नेहा यादव ने बताया कि अभिजीत की दादी के निधन की सूचना मिलते ही अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया और संवेदना व्यक्त की. पुलिस के मुताबिक, उन्हें परिवार से बात करने, फोन कॉल करने और फ्लाइट की व्यवस्था सहित जरूरी मदद की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने माता-पिता से बात करने से इनकार कर दिया. पुलिस ने यह भी कहा कि 10 अक्टूबर को अभिजीत और उनके दो सहयोगियों को जंतर-मंतर के बजाय जनपथ पर प्रस्तावित प्रदर्शन के मामले में हिरासत में लिया गया था, क्योंकि प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली थी.
पुलिस ने वीडियो भी किया जारी
दिल्ली पुलिस ने एक वीडियो भी जारी किया है. पुलिस का दावा है कि इसमें अधिकारियों को अभिजीत को उनकी दादी के निधन की जानकारी देते और परिवार से बात करने का विकल्प देते देखा जा सकता है. वहीं, अभिजीत का कहना है कि उन्हें अपने कजिन का नंबर निकालने के लिए फोन चाहिए था, लेकिन फोन नहीं दिया गया.
'रात 3:30 बजे इंसानियत कहां गई थी?'
दादी के निधन पर दिल्ली पुलिस के दावों पर पलटवार करते हुए CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने 'एक्स' पर पुलिस के दोहरे रवैये पर कड़े सवाल उठाए हैं. दीपके ने आरोप लगाया कि पुलिस ने वह हिस्सा जानबूझकर हटा दिया जहां वह अपने कजिन का नंबर निकालने के लिए फोन और वकीलों से बात कराने की मांग कर रहे थे. उन्होंने कहा कि जो पुलिस अब इंसानियत की दुहाई दे रही है, वही रात 3:30 बजे दादी के निधन की खबर जानने के बावजूद जबरन गिरफ्तारी के कागजात पर दस्तखत कराने अड़ी थी; जिसे उन्होंने तब तक साइन करने से साफ मना कर दिया जब तक उन्हें कानूनी मदद नहीं दी गई.
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इस मामले में अभिजीत के आरोपों और दिल्ली पुलिस के बयान में विरोधाभास है. दोनों पक्षों के दावों के बीच हिरासत के दौरान फोन और वकील से संपर्क की अनुमति को लेकर सवाल उठ रहे हैं.