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Gautam Gambhir से लड़ाई के बाद Amit Mishra को कोल्ड कॉफी का मिला ऑफर, जानें पूरा किस्सा!

Gautam Gambhir Amit Mishra fight: टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर अपने आक्रामक अंदाज के लिए जाने जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि घरेलू क्रिकेट के दौरान उनकी अपने पुराने दोस्त और पूर्व भारतीय लेग स्पिनर अमित मिश्रा से मैदान पर जबरदस्त बहस हो गई थी? अमित मिश्रा ने यह किस्सा आकाश चोपड़ा के यूट्यूब चैनल (बैट और बॉल) पर बातचीत के दौरान साझा किया.
दिल्ली और हरियाणा के मैच में क्यों भिड़े थे गंभीर और मिश्रा?
अमित मिश्रा के मुताबिक, यह घटना दिल्ली और हरियाणा के बीच रणजी ट्रॉफी मैच के दौरान फिरोजशाह कोटला मैदान पर हुई थी. उस समय गौतम गंभीर बल्लेबाजी कर रहे थे और 40 से 50 रन के बीच खेल रहे थे.
मिश्रा ने बताया कि उन्होंने मैच में मिथुन मन्हास, वरुण कुमार और गौरव छाबड़ा के विकेट लिए थे. इसी दौरान छाबड़ा के आउट होने से पहले उन्होंने एक आक्रामक शॉट खेला, जिसके बाद गंभीर उनसे बात करने पहुंच गए.
मिश्रा और गंभीर पहले से एक-दूसरे को जानते थे. इसलिए मिश्रा ने सहज अंदाज में गंभीर से कहा कि वह चुप रहें और उन्हें कुछ और विकेट लेने दें. लेकिन गंभीर को यह बात पसंद नहीं आई. उन्होंने मिश्रा को अपना काम करने और चुपचाप गेंदबाजी करने के लिए कहा.
इसके बाद दोनों खिलाड़ियों के बीच मैदान पर ही तीखी बहस शुरू हो गई. दोनों का गुस्सा इतना बढ़ गया कि मुकाबले के दौरान माहौल काफी गर्म हो गया.
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दो घंटे बाद गंभीर का आया फोन
मैदान पर हुई बहस के बाद किसी को भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही घंटे में दोनों के बीच सब सामान्य हो जाएगा.
मिश्रा ने बताया कि दिन का खेल खत्म होने के करीब दो घंटे बाद वह होटल के कमरे में खाना खाकर टीवी देख रहे थे. तभी उन्होंने गंभीर की दो मिस्ड कॉल देखीं. वापस फोन करने पर गंभीर ने उन्हें बाहर चलने के लिए कहा.
मिश्रा उस समय भी नाराज थे. उन्होंने गंभीर से कहा कि वह अभी भी गुस्से में हैं और खाना भी खा चुके हैं. इस पर गंभीर ने उन्हें समझाते हुए कहा कि इतनी नाराजगी क्यों पाल रहे हो, चलो कोल्ड कॉफी पीने चलते हैं.
इस घटना से पता चलता है कि गंभीर मैदान पर कितने प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी रहे हैं, लेकिन निजी रिश्तों में पुरानी बातों को ज्यादा देर तक नहीं रखते थे.
बचपन से दोस्त थे गौतम गंभीर और अमित मिश्रा
गौतम गंभीर और अमित मिश्रा की जान-पहचान केवल भारतीय क्रिकेट टीम तक सीमित नहीं थी. दोनों ने दिल्ली में कोच संजय भारद्वाज की अकादमी में साथ ट्रेनिंग की थी.
मिश्रा ने अभ्यास के दौरान गंभीर को लंबे समय तक लेग स्पिन गेंदबाजी की. आकाश चोपड़ा ने बातचीत में यह बात भी उठाई कि स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ गंभीर की अच्छी बल्लेबाजी के पीछे लगातार ऐसे गेंदबाजों का सामना करने का बड़ा योगदान रहा.
दोनों के बीच मुकाबले की भावना अंडर-19 क्रिकेट के दिनों से ही थी. मिश्रा ने बताया कि हरियाणा की अंडर-19 टीम में मौका मिलने से पहले गंभीर ने उन्हें फोन कर मजाकिया अंदाज में चुनौती दी थी कि वह अगले दिन उनकी गेंदों पर खूब छक्के लगाएंगे.
मिश्रा ने भी जवाब दिया कि गंभीर जितने चाहें छक्के मार लें, लेकिन उन्हें आउट भी होना पड़ेगा.
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जब मुश्किल समय में गंभीर ने सबसे पहले किया था फोन
अमित मिश्रा के करियर में एक ऐसा दौर भी आया, जब उन्हें भारतीय टीम और जोनल टीमों से बाहर कर दिया गया था. मिश्रा के मुताबिक, 2003 में बांग्लादेश में वनडे डेब्यू करने के बाद उन्हें घरेलू क्रिकेट में अच्छे प्रदर्शन के बावजूद चयन से जुड़ी निराशाओं का सामना करना पड़ा.
उन्होंने बताया कि लगातार नजरअंदाज किए जाने के कारण वह करीब 18 महीने तक मानसिक रूप से परेशान रहे. उस दौर में गंभीर उन लोगों में शामिल थे, जिन्होंने उनसे संपर्क किया और उनकी स्थिति के बारे में पूछा.
मिश्रा का परिवार बड़ा था और उनके पिता रेलवे में काम करते थे. ऐसे में क्रिकेट में जगह बनाए रखना उनके लिए केवल करियर नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिरता से भी जुड़ा हुआ था.
वीरेंद्र सहवाग ने घड़ी की जगह पैसे मांगने पर क्या कहा?
अमित मिश्रा ने आईपीएल 2008 से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया. दिल्ली डेयरडेविल्स ने उन्हें 32 लाख रुपये में टीम में शामिल किया था. डेक्कन चार्जर्स के खिलाफ पांच विकेट लेने और हैट्रिक दर्ज करने के बाद उन्हें फ्रेंचाइजी की ओर से एक महंगी घड़ी मिली.
लेकिन मिश्रा उस समय अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को लेकर चिंतित थे. उन्होंने कप्तान वीरेंद्र सहवाग से घड़ी की जगह पैसे देने की बात कही.
मिश्रा ने आगे कहा कि, सहवाग ने उन्हें उपहार अपने पास रखने के लिए कहा और अगले सीजन में उनका आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाने का भरोसा भी दिया.
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एमएस धोनी की सलाह से टेस्ट डेब्यू में चमके मिश्रा
आईपीएल 2008 में अच्छे प्रदर्शन का फायदा अमित मिश्रा को उसी साल टेस्ट क्रिकेट में मिला. अक्टूबर 2008 में मोहाली में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्हें चोटिल अनिल कुंबले की जगह टेस्ट डेब्यू करने का मौका मिला.
मिश्रा ने बताया कि उस समय उन्हें कुंबले जैसे दिग्गज गेंदबाज की जगह खेलने का दबाव महसूस हो रहा था. लेकिन कप्तान एमएस धोनी ने उन्हें बिना दबाव के गेंदबाजी करने की सलाह दी.
धोनी ने उन्हें समझाया कि यह उनका पहला टेस्ट मैच है और धोनी खुद भी पहली बार टेस्ट कप्तानी कर रहे हैं. इस बात से मिश्रा का दबाव कम हुआ और उन्होंने डेब्यू टेस्ट में पांच विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन किया.