Monday, 10 August 2026
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पठानकोट में कॉर्पोरेट भारत छोड़ो आंदोलन शुरू:ट्रेड यूनियनों और किसानों का विशाल प्रदर्शन; गिरफ्तारी देने पहुंचे मजदूर-किसान

INT News10 August 2026 at 07:33 pm

अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर आज देशव्यापी 'कॉर्पोरेट भारत छोड़ो' आंदोलन का बिगुल बजाया गया। इसी कड़ी में पठानकोट में ट्रेड यूनियनों, संयुक्त किसान मोर्चा और खेत मजदूर संगठनों ने एकजुट होकर केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रचंड विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान केंद्र सरकार की कथित मजदूर-किसान विरोधी नीतियों के विरोध में बड़ी संख्या में मजदूर और किसान अपनी गिरफ्तारियां देने (जेल भरो आंदोलन) के लिए मौके पर पहुंचे। मलकपुर नहर पुल से DC कार्यालय तक निकाला विरोध मार्च प्रदर्शन की शुरुआत मलकपुर नहर पुल से हुई, जहां जिले भर से आए सैकड़ों मजदूर और किसान एकत्रित हुए। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जिला उपायुक्त (DC) कार्यालय तक एक विशाल विरोध मार्च निकाला। DC कार्यालय के बाहर पहुंचकर इस मार्च ने एक जन रैली का रूप ले लिया। संसद में चर्चा के बिना भारत-अमेरिका फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को तुरंत रद्द करने की मांग रैली को संबोधित करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की ओर से बलवंत घोह, केवल कालिया, केवल सिंह कंग, मिहर सिंह और कैप्टन खुशवंत सिंह ने कड़ा रुख अपनाया। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement) पर संसद में बिना किसी चर्चा के बातचीत चलाई जा रही है, जिसे तुरंत रोका और पूरी तरह रद्द किया जाना चाहिए। नेताओं ने कहा कि इस समझौते के तहत विदेशों से आने वाले भारी सब्सिडी वाले अनाज, पोल्ट्री उत्पाद, दूध-डेयरी उत्पाद और मछली भारतीय कृषि क्षेत्र, डेयरी किसानों, स्थानीय दुकानदारों और छोटे व्यापारियों को पूरी तरह बर्बाद कर देंगे। 12 घंटे की ड्यूटी का विरोध: 8 घंटे काम और बिजली बिल 2025 रद्द करने की अपील ट्रेड यूनियनों की ओर से शिव कुमार, अविनाश सैनी, हरिंदर रंधावा, तिलक राज जियां, सुधा रानी और सुरिंदर सहगल ने अपनी मांगें रखते हुए कहा कि मौजूदा श्रम कानूनों को रद्द कर मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करने वाली मजबूत श्रम संहिता लाई जाए। उन्होंने दैनिक काम के घंटों को 12 घंटे से घटाकर 8 घंटे लागू करने की मांग की। इसके अलावा नेताओं ने बिजली बिल 2025, बीज बिल 2026 और अन्य जनविरोधी 'काले कानूनों' को तुरंत वापस लेने की अपील की। मनरेगा का नया कानून रद्द कर पुराना स्वरूप बहाल करने की मांग मजदूर नेताओं ने मनरेगा में किए गए नए बदलावों का विरोध करते हुए कहा कि नया कानून खेत मजदूरों और ग्रामीण गरीबों से रोजगार की गारंटी छीनता है। उन्होंने मांग की कि नए कानून को रद्द कर पुराने मनरेगा कानून को यथावत लागू किया जाए। नेताओं ने आज के 'जेल भरो आंदोलन' को पूरी तरह सफल करार दिया और आने वाले दिनों में और बड़े व कड़े जन-संघर्ष के लिए मजदूर-किसान वर्ग से तैयार रहने का आह्वान किया। प्रमुख कार्यकर्ताओं की रही उपस्थिति इस विशाल विरोध प्रदर्शन और रैली के दौरान परषोत्तम कुमार, विजय कुमार, जगदीश राज, परषोत्तम दड़वा, देवी सैनी, गुड्डो देवी, चमन लाल, सोहन लाल, देव राज (पठानकोट), यशपाल, कुलदीप बेरियान, नरोत्तम सिंह और देव राज (सुजानपुर) सहित विभिन्न संगठनों के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता भारी संख्या में मौजूद रहे।