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लाइट हॉउस प्रोजेक्ट की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त:सीपेज, लीकेज और करंट फैलने की शिकायतों पर नाराजगी; विस्तृत रिपोर्ट न देने पर कोर्ट ने मांगा जवाब
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए बनाए गए लाइट हॉउस प्रोजेक्ट की बदहाल स्थिति को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। प्रोजेक्ट में सीपेज, पानी की लीकेज और दीवारों व स्विच बोर्डों में करंट फैलने जैसी गंभीर शिकायतों पर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। जस्टिस सुभोद अभ्यंकर और आलोक अवस्थी की बेंच ने नगर निगम द्वारा निर्धारित समय पर स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं किए जाने को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम कमिश्नर को 14 जुलाई की सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। 1024 फ्लैटों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा पर सवाल मामला गुलमर्ग परिसर स्थित लाइट हॉउस प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जहां रहवासियों ने आरोप लगाया है कि आवंटन के बाद से ही फ्लैटों में पानी रिसाव, बाथरूम लीकेज और बारिश के दौरान दीवारों में नमी की समस्या बनी हुई है। कई जगह पानी विद्युती स्विचों तक पहुंचने से करंट फैलने की शिकायतें भी सामने आई हैं, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका जताई जा रही है। दो वर्षों से उठा रहे हैं मुद्दा जनहित याचिका दायर करने वाले समाजसेवी और आरटीआई कार्यकर्ता नरेंद्र गोस्वामी का कहना है कि वे पिछले दो वर्षों से इस समस्या को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय, राज्य सरकार, नगर निगम और संबंधित विभागों के समक्ष लगातार शिकायतें और आवेदन प्रस्तुत कर रहे हैं। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत भी विभिन्न विभागों से जानकारी मांगी गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। हाईकोर्ट ने पहले भी जारी किए थे नोटिस याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर अनुराग जैन ने कोर्ट को बताया कि हाई कोर्ट पहले ही केंद्र सरकार, राज्य सरकार, इंदौर नगर निगम और निर्माण एजेंसी केपीआर प्रोजेक्ट्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस जारी कर जवाब मांग चुका है। इसके बावजूद अब तक समस्या के समाधान को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है। रहवासियों ने की वैकल्पिक आवास की मांग याचिका में यह भी मांग की गई है कि यदि भवनों की संरचनात्मक खामियां दूर नहीं हो सकती तो प्रभावित परिवारों को सुरक्षित वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि 1024 फ्लैटों में रहने वाले परिवार लगातार भय के माहौल में जीवन यापन कर रहे हैं। हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर नजर मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नगर निगम को विस्तृत जवाब और आवश्यक निर्देशों के साथ उपस्थित होने को कहा है। अब सभी की नजर अगली सुनवाई और कोर्ट के रुख पर टिकी हुई है, क्योंकि मामला हजारों लोगों की सुरक्षा और प्रधानमंत्री आवास योजना की गुणवत्ता से जुड़ा हुआ है।