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शरद पूर्णिमा पर 1500 लीटर दूध से खीर बनी:जोबट में चांदनी रात में निभाई अनूठी परंपरा; मंदिरों में आरती के बाद बांटी
आलीराजपुर जिले के जोबट में रविवार रात शरद पूर्णिमा पर मंदिरों में खीर का प्रसाद बांटा गया। अलग-अलग आयोजनों के लिए करीब 1500 लीटर दूध से खीर तैयार की गई। गायत्री शक्तिपीठ में दमा और सांस संबंधी बीमारियों के लिए पारंपरिक औषधि का वितरण भी हुआ। मंदिरों में आरती के बाद बांटी खीर जोबट के सत्यनारायण मंदिर और शिवाले परिसर में महाकाल सेवा समिति ने खीर वितरण का आयोजन किया। नीलकंठ समिति की ओर से भी प्रसाद बांटा गया। वहीं, कृष्ण सेवा समिति ने कृष्ण मंदिर में आरती के बाद श्रद्धालुओं को खीर वितरित की। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखा जाता है। बाद में इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। इसी परंपरा के तहत मंदिरों में आयोजन हुए। गायत्री शक्तिपीठ में रात 12 बजे से औषधि वितरण गायत्री शक्तिपीठ में करीब 100 साल पुरानी परंपरा के तहत दमा और सांस संबंधी बीमारियों के लिए पारंपरिक औषधि बांटी गई। शक्तिपीठ के व्यवस्थापक डॉ. शिवनारायण सक्सेना के अनुसार, मान्यता है कि करीब 100 साल पहले चित्रकूट में एक सिद्ध महात्मा ने शरद पूर्णिमा पर खीर के साथ औषधि देने की परंपरा शुरू की थी। रविवार रात 12 बजे से खीर के साथ औषधि वितरण शुरू हुआ। इसके लिए 250 से अधिक लोगों ने पंजीयन कराया था। गुजरात और महाराष्ट्र सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग पहुंचे। आयोजन के दौरान भजन-कीर्तन हुए। मुख्य प्रबंध ट्रस्टी शिवराम वर्मा सहित आयोजन से जुड़े लोगों ने व्यवस्थाएं संभालीं।