Thursday, 6 August 2026
INTइंडियन न्यूज़ ट्रस्टजहाँ सत्य मिले विश्वास से
ताज़ा खबरें

national

2 साल बाद बंद कैमरे के साथ जनता के सामने आईं शेख हसीना, जानिए क्यों नहीं दिखाया चेहरा

INT News5 August 2026 at 08:32 pm

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार को करीब दो साल बाद पहली बार वर्चुअल माध्यम से लोगों को संबोधित किया. लगभग 25 मिनट के इस संबोधन में उन्होंने सिर्फ ऑडियो के जरिए अपनी बात रखी और कैमरा बंद रखा.

लेकिन सवाल है कि शेख हसीना का कैमरा बंद क्यों था. इसके पीछे कोई खास वजह है या कुछ और? इसके साथ साथ यह भी जानेंगे कि क्या इतिहास में कभी ऐसा हुआ है.

कैमरा बंद रखने के पीछे क्या थीं वजहें?

सुरक्षा और लोकेशन उजागर होने का खतरा

शेख हसीना आखिरी बार 5 अगस्त 2024 को सार्वजनिक रूप से दिखाई दी थीं, जब वे ढाका से भारत पहुंची थीं. इसके बाद से उनके किसी सुरक्षित और गोपनीय स्थान पर रहने की खबरें सामने आती रही हैं. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वीडियो के जरिए सामने आने पर उनके बैकग्राउंड, लोकेशन या सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होने का जोखिम था. इसलिए उन्होंने केवल ऑडियो के माध्यम से संबोधन किया.

भारत-बांग्लादेश संबंधों की संवेदनशीलता

शेख हसीना के इस संबोधन से पहले ही बांग्लादेश कह चुका है कि भारत की धरती से शेख हसीना की राजनीतिक गतिविधियां दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकती हैं. इसी संदर्भ में भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी इस कार्यक्रम से खुद को अलग बताया है.ऐसे में जानकारों का मानना है कि यदि हसीना वीडियो के जरिए कोई बड़ा राजनीतिक संदेश देतीं तो कूटनीतिक विवाद बढ़ने की आशंका रहती.

कानूनी और कूटनीतिक दबाव

बांग्लादेश में शेख हसीना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है. उन्हें एक मामले में सजा सुनाए जाने की खबरें हैं और बांग्लादेश सरकार द्वारा उनका प्रत्यर्पण भी मांगा गया है. ऐसे में कैमरे पर सार्वजनिक रूप से आने से कानूनी और कूटनीतिक विवाद और गहरा सकता था. इसी कारण उन्होंने वीडियो के बजाय केवल ऑडियो के माध्यम से अपनी बात रखी.

क्या पहले भी किसी नेता ने कैमरा बंद रखकर जनता को संबोधित किया है?

इतिहास में ऐसा कब-कब हुआ

आम तौर पर राष्ट्राध्यक्ष या पूर्व प्रधानमंत्री वीडियो के जरिए ही जनता को संबोधित करते हैं ताकि उनकी पहचान और संदेश की विश्वसनीयता बनी रहे. हालांकि, सुरक्षा, राजनीतिक या असाधारण परिस्थितियों में कुछ नेताओं ने बिना कैमरे के भी संदेश जारी किए हैं.

इमरान खान: जेल से AI की मदद से पहुंचा संदेश

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं. इस दौरान वे कई बार अपने वकीलों के जरिए लिखित संदेश जारी करते रहे. फरवरी 2024 के आम चुनाव के दौरान उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने उनके लिखित संदेशों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से उनकी आवाज में बदलकर ऑडियो संदेश के रूप में जारी किया. उस समय यह दुनिया के पहले बड़े राजनीतिक अभियानों में से एक माना गया, जिसमें जेल में बंद नेता का AI-जनरेटेड ऑडियो चुनाव प्रचार में इस्तेमाल हुआ.

फिदेल कास्त्रो: बीमारी के बाद लिखित संदेशों का सहारा

क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो ने 2006 में गंभीर रूप से बीमार होने के बाद सत्ता अपने भाई राउल कास्त्रो को सौंप दी थी.इसके बाद वे लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से कैमरों के सामने नहीं आए. इस दौरान उन्होंने 'Reflections' नाम से लेख लिखकर अपने विचार साझा किए, जिन्हें क्यूबा के सरकारी अखबार Granma में प्रकाशित किया जाता था. यही उनके आधिकारिक सार्वजनिक संदेश माने जाते थे.

सद्दाम हुसैन: फरारी के दौरान ऑडियो टेप

2003 में इराक पर अमेरिकी हमले के बाद सद्दाम हुसैन कई महीनों तक अंडरग्राउंड रहे. इस दौरान उन्होंने वीडियो के बजाय रिकॉर्डेड ऑडियो संदेश जारी किए, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने प्रसारित किया. इन संदेशों में वे अपने समर्थकों से अमेरिकी सेना का विरोध जारी रखने की अपील करते थे.

मुअम्मर गद्दाफी: फोन कॉल के जरिए संबोधन

2011 में लीबिया के गृहयुद्ध के दौरान जब मुअम्मर गद्दाफी की सत्ता संकट में थी और उन्हें छिपकर रहना पड़ रहा था, तब उन्होंने कई बार टेलीविजन चैनलों को फोन कॉल के जरिए ऑडियो संदेश दिए. सुरक्षा कारणों से उन्होंने अपनी लोकेशन या वीडियो सार्वजनिक नहीं किया.

मोज्तबा खमेनेई: सत्ता संभालने के बाद भी कैमरे से दूरी

पारंपरिक रूप से ईरान के सर्वोच्च नेता नवरोज (फारसी नववर्ष) के अवसर पर राष्ट्र के नाम टेलीविजन पर संबोधन देते रहे हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ. नवरोज के मौके पर मोज्तबा खमेनेई की ओर से एक लिखित संदेश जारी किया गया, जिसे सरकारी मीडिया ने प्रसारित किया. इस दौरान न तो उनका कोई वीडियो जारी किया गया और न ही कोई ऑडियो संदेश सामने आया. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनके कैमरे पर न आने को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई गईं. रिपोर्टों में कहा गया कि क्षेत्रीय युद्ध, सुरक्षा कारणों और उनकी सार्वजनिक अनुपस्थिति ने इस मुद्दे को और चर्चा में ला दिया.

ये भी पढ़ें : सड़क पर Gen Z का जलवा, लेकिन संसद में कितनी बुलंद है नई पीढ़ी की आवाज?