Thursday, 20 August 2026
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सुकमा में उफनता नाला पार कर अरलमपल्ली पहुंचे एसपी,VIDEO:पुलिस अधिकारी ने ग्रामीणों की सुनी समस्याएं; कोंटा में बाढ़ से निपटने की मॉक ड्रिल

INT News20 August 2026 at 09:55 pm

सुकमा के माओवाद खत्म होने के बाद अब पुलिस सुकमा के अंदरूनी गांवों तक पहुंच रही है। गुरुवार को एसपी मयंक गुर्जर और एएसपी रोहित शाह भारी बारिश के बीच नदी-नाले पार कर पोलमपल्ली क्षेत्र के अरलमपल्ली गांव पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से उनकी समस्याएं सुनीं और बच्चों को पढ़ाई का सामान बांटा। वहीं, कोंटा में प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए मॉक ड्रिल कर राहत और बचाव का अभ्यास किया। उफनता नाला पार कर अरलमपल्ली पहुंचे एसपी ‘निवा दुवड़ ते’ यानी पुलिस तुम्हारे द्वार पर अभियान के तहत एसपी मयंक गुर्जर और एएसपी रोहित शाह अरलमपल्ली पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों ने बताया कि माओवाद खत्म होने के बाद गांव में विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं। हालांकि, उन्होंने सड़क, पुल-पुलिया और आवागमन से जुड़ी समस्याएं भी अधिकारियों के सामने रखीं। पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पुलिस सिर्फ सुरक्षा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीणों की मदद और सेवा के लिए भी उनके साथ खड़ी है। बच्चों को बांटी शैक्षणिक सामग्री सिविक एक्शन कार्यक्रम के तहत गांव में बच्चों को स्कूल बैग, कॉपी, पेन और पेंसिल बांटे गए। बच्चों को नियमित स्कूल जाने और मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया गया। महिलाओं को साड़ी और चप्पल, ग्रामीणों को मिठाई और युवाओं को खेल सामग्री भी दी गई। कोंटा में बाढ़ से निपटने की मॉक ड्रिल इधर, कोंटा में बुधवार को राज्य स्तरीय बाढ़ आपदा मॉक ड्रिल आयोजित की गई। शबरी नदी और सामुदायिक भवन परिसर में हुए इस अभ्यास में प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य, राजस्व और फायर ब्रिगेड की टीमों ने हिस्सा लिया। मॉक ड्रिल में बाढ़ में फंसे लोगों को मोटरबोट से सुरक्षित निकालने का अभ्यास किया गया। गहरे पानी में फंसे लोगों को बचाने के लिए स्कूबा टीम ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन किया। मलबे में दबे व्यक्ति को एयर लिफ्टिंग जैकेट की मदद से निकालने का अभ्यास भी किया गया। स्थानीय सामान से बचाव का तरीका बताया अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया कि बाढ़ जैसी आपदा के समय घर में मौजूद सामान से भी अस्थायी लाइफ सेविंग उपकरण बनाए जा सकते हैं। बांस, प्लास्टिक की बोतल और घरेलू बर्तनों की मदद से पानी में बचाव का तरीका समझाया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी मौके पर प्राथमिक उपचार, सीपीआर और एंबुलेंस की व्यवस्था का अभ्यास किया। साथ ही बाढ़ प्रभावित लोगों तक भोजन, दवाइयां और जरूरी सामान पहुंचाने की तैयारियों को भी परखा गया। कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि ऐसे अभ्यास से आपदा के समय राहत और बचाव कार्य तेजी से करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक टीमों के बीच बेहतर तालमेल और लोगों में जागरूकता से बाढ़ जैसी स्थिति में जनहानि को काफी हद तक रोका जा सकता है।