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आसमान में भारत की नई ढाल कुशा, दुश्मन की मिसाइलें और विमान हो जाएंगे हवा में ही तबाह

INT News23 July 2026 at 09:53 pm

Kusha Missile: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने गुरुवार को भारत की रक्षा क्षमता में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली कुशा मिसाइल का पहला सफल परीक्षण किया. यह परीक्षण ओडिशा तट के पास स्थित एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया.

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह परीक्षण एक इलेक्ट्रॉनिक लक्ष्य पर किया गया था, जो तेज गति और ऊंचाई पर उड़ने वाले हवाई खतरे का अनुकरण कर रहा था. मिसाइल प्रणाली ने इस लक्ष्य को सफलतापूर्वक पहचानकर उसे नष्ट कर दिया.

कुशा मिसाइल की क्या है खासियत?

कुशा एक लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है.

यह दुश्मन के लड़ाकू विमानों, मिसाइलों, ड्रोन और बड़े सैन्य विमानों जैसे हवाई खतरों को रोकने में सक्षम है.

यह अलग-अलग ऊंचाई और लंबी दूरी पर आने वाले खतरों को निशाना बना सकती है.

यह प्रणाली आधुनिक वायु रक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित की गई है.

कई तरह के हवाई खतरों से निपटने में सक्षम

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि कुशा मिसाइल प्रणाली कई प्रकार के हवाई खतरों को नष्ट करने की क्षमता रखती है. इनमें शामिल हैं...

लड़ाकू विमान

क्रूज और अन्य प्रकार की मिसाइलें

मानवरहित हवाई वाहन (UAV/ड्रोन)

दुश्मन के बड़े सैन्य विमान

यह प्रणाली देश की वायु सुरक्षा को और मजबूत करने में मदद करेगी.

स्वदेशी तकनीक से तैयार की गई प्रणाली

कुशा मिसाइल प्रणाली के प्रमुख हिस्सों को भारत में ही विकसित किया गया है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार कई अत्याधुनिक सिस्टम इसे काफी बेहतरीन बनाते हैं. इनमें

रडार सिस्टम कमांड और नियंत्रण केंद्र काफी अहम हैं.

इन सभी को DRDO की अलग-अलग प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योग पार्टनर के सहयोग से तैयार किया गया है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया बड़ी उपलब्धि

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कुशा मिसाइल के सफल परीक्षण को भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि बताया है. उन्होंने कहा-

कुशा का आज का सफल परीक्षण भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली विकसित करने की क्षमता केवल कुछ ही देशों के पास है. इससे ऐसी प्रणालियों के लिए आयात पर निर्भरता भी समाप्त हो जाएगी और देश की वायु रक्षा क्षमता में एक बड़ी छलांग लगेगी. मैं इस उपलब्धि के लिए डीआरडीओ और अन्य हितधारकों को बधाई देता हूं.” रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह ने DRDO को दी बधाई

राजनाथ सिंह ने कहा कि कुशा प्रणाली लड़ाकू विमानों, मिसाइलों, UAV और अन्य बड़े हवाई खतरों को प्रभावी तरीके से रोकने में सक्षम होगी. उन्होंने सफल परीक्षण में शामिल सभी टीम सदस्यों की सराहना की और DRDO और इस परियोजना से जुड़े सभी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और अन्य टीम सदस्यों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी.

भारतीय रक्षा विभाग (DRDO) ने ओडिशा तट से दूर एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से कुशा नामक लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल का पहला सफल परीक्षण किया. कुशा मिसाइल प्रणाली लड़ाकू विमानों, मिसाइलों, हवाई विमानन (यूएवी) और बड़े दुश्मन विमानों सहित विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों को एक विस्तृत रेंज और ऊंचाई के दायरे में निष्क्रिय करने में सक्षम है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

रक्षा सचिव ने की परीक्षण की निगरानी

रक्षा मंत्रालय के अनुसार रक्षा सचिव और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा DRDO अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने परीक्षण के दौरान पूरी प्रक्रिया की निगरानी की. उन्होंने सफल परीक्षण में शामिल सभी टीम सदस्यों की सराहना की और इस उपलब्धि को भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया.

भारत की वायु रक्षा क्षमता को मिलेगा बढ़ावा

कुशा मिसाइल प्रणाली के सफल परीक्षण को भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. यह प्रणाली भविष्य में देश की सीमाओं और महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है.