समाचार · झारखंड
जिस परीक्षा से मिली नौकरी, वही रद्द; JSSC CGL के 1975 चयनित कर्मचारियों का भविष्य संकट में

JSSC CGL परीक्षा रद्द होने के सरकार के फैसले ने उन करीब 1975 चयनित अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है, जो इसी नियुक्ति के आधार पर पिछले सात महीने से अलग-अलग सरकारी विभागों में नौकरी कर रहे हैं. चयनित कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने नियुक्ति मिलने के बाद अपनी जिम्मेदारी संभाली और कई अभ्यर्थियों ने इस नौकरी के लिए पुरानी नौकरी तक छोड़ दी. अब परीक्षा रद्द होने के फैसले के बाद उन्हें नौकरी और भविष्य दोनों पर संकट मंडराता दिख रहा है. सरकार के फैसले के खिलाफ चयनित कर्मचारी अब कोर्ट जाने की तैयारी में हैं.
चयनित कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने चयन प्रक्रिया पूरी होने और नियुक्ति मिलने के बाद सरकार के विभिन्न विभागों में योगदान दिया. वे पिछले करीब सात महीने से अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं. ऐसे में नियुक्ति के बाद परीक्षा रद्द करने के फैसले का सीधा असर उनकी नौकरी पर पड़ सकता है.
कई अभ्यर्थियों ने छोड़ी थी पुरानी नौकरी
चयनित अभ्यर्थियों के मुताबिक JSSC CGL के माध्यम से नियुक्ति मिलने के बाद कई लोगों ने अपनी पुरानी नौकरी तक छोड़ दी थी. कुछ अभ्यर्थियों का दावा है कि उन्होंने इंजीनियरिंग से जुड़ी नौकरी छोड़कर सरकारी सेवा ज्वाइन की, जबकि कुछ ने रेलवे समेत दूसरी नौकरियां छोड़कर JSSC CGL के पद को स्वीकार किया था.
अब परीक्षा रद्द होने के फैसले के बाद ऐसे अभ्यर्थियों के सामने दोहरी परेशानी खड़ी हो गयी है. एक तरफ मौजूदा नौकरी पर अनिश्चितता है, वहीं दूसरी ओर जिन पुरानी नौकरियों को छोड़कर उन्होंने सरकारी पद ज्वाइन किया था, वहां वापस लौटना भी आसान नहीं है.
सात महीने से दे रहे हैं सरकारी सेवा
चयनित कर्मचारियों का कहना है कि वे महज परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थी नहीं हैं, बल्कि पिछले करीब सात महीने से सरकार के अलग-अलग विभागों में नियुक्त होकर काम कर रहे हैं. उन्होंने अपने पद की जिम्मेदारियां संभाली हैं और सरकारी व्यवस्था का हिस्सा बनकर सेवाएं दी हैं.
ऐसे में उनका सवाल है कि अगर परीक्षा रद्द की जाती है, तो उनकी नियुक्ति और अब तक की सेवा का क्या होगा. कर्मचारियों का कहना है कि इस फैसले से उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है.
सरकार के फैसले को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी
सरकार के फैसले से नाराज चयनित कर्मचारियों ने अब कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया है. उनका कहना है कि वे अपनी नियुक्ति और नौकरी के भविष्य को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे.
चयनित कर्मचारियों की ओर से सरकार के फैसले के खिलाफ कानूनी चुनौती की तैयारी की जा रही है. उनका कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने, योगदान करने और करीब सात महीने तक सेवा देने के बाद अचानक परीक्षा रद्द करने का फैसला उनके लिए गंभीर संकट पैदा कर रहा है.
JSSC CGL विवाद में अब दो पक्ष
JSSC CGL का विवाद अब केवल परीक्षा में कथित गड़बड़ी और आंदोलनकारी छात्रों की मांगों तक सीमित नहीं रह गया है. एक तरफ परीक्षा प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं और सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है, वहीं दूसरी तरफ इसी परीक्षा के जरिए चयनित होकर सरकारी विभागों में काम कर रहे करीब 1975 कर्मचारियों के भविष्य का सवाल सामने आ गया है.
अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इन कर्मचारियों की नियुक्ति और अब तक की सेवा को लेकर क्या फैसला करती है. वहीं चयनित कर्मचारियों की प्रस्तावित कानूनी चुनौती के बाद मामला अदालत तक पहुंचने पर नियुक्ति की वैधता और परीक्षा रद्द करने के फैसले पर भी न्यायिक स्तर पर बहस हो सकती है.