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झारखंड हाईकोर्ट का फैसला: JPSC पीटी परीक्षा परिणाम में दखल से इनकार, जानें पूरा मामला

रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट
JPSC PT Result 2026, रांची : झारखंड हाईकोर्ट से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा आयोजित सिविल सेवा की परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा-2025 की प्रारंभिक परीक्षा (PT) के परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने प्रार्थी को किसी भी तरह की राहत देने से साफ इनकार कर दिया है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद प्रार्थी की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया और आयोग की मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरी तरह सही ठहराया.
रिजल्ट में फेल होने पर अभ्यर्थी ने खटखटाया था कोर्ट का दरवाजा
उल्लेखनीय है कि प्रार्थी राजन कुमार सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर जेपीएससी द्वारा 2 जुलाई 2026 को घोषित किए गए सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) के रिजल्ट को चुनौती दी थी. प्रार्थी का तर्क था कि पीटी परीक्षा के परिणाम में उन्हें सफल घोषित नहीं किया गया है, जो कि गलत है. उन्होंने अदालत से इस मामले में हस्तक्षेप करने और परिणाम की समीक्षा करने की गुहार लगाई थी.
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ओएमआर शीट में बबलिंग (मार्किंग) की गलती पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता जय प्रकाश और जेपीएससी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने खंडपीठ के समक्ष आयोग का पक्ष मजबूती से रखा. उन्होंने अदालत को बताया कि ओएमआर शीट (OMR Sheet) में मार्किंग या बबलिंग संबंधी गलतियों के मामलों में झारखंड हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले ही कई स्पष्ट और उदाहरण बनने वाले निर्णय दिए जा चुके हैं. आयोग के वकीलों ने स्पष्ट किया कि स्थापित नियमों और अदालती फैसलों के अनुसार यदि कोई अभ्यर्थी ओएमआर शीट में निर्धारित और सही तरीके से उत्तर (बबल) अंकित नहीं करता है, तो उसका मूल्यांकन नहीं होगा. यदि एक ही प्रश्न के लिए दो अलग-अलग स्थानों पर मार्किंग कर दी जाती है, तो उस ओएमआर शीट को सीधे निरस्त (Reject) किया जा सकता है.
प्रार्थी की स्वयं की त्रुटि के कारण रद्द हुई ओएमआर शीट
अदालत को बताया गया कि प्रार्थी राजन कुमार सिंह की ओएमआर शीट जेपीएससी की किसी तकनीकी खराबी या लापरवाही से नहीं, बल्कि अभ्यर्थी की स्वयं की त्रुटि और गलत बबलिंग के कारण रद्द हुई है. ऐसे मामलों में रिजल्ट जारी न करना पूरी तरह से नियम और कोर्ट के पूर्व आदेशों के अनुरूप है. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने जेपीएससी के इस तर्क को पूरी तरह सही माना कि ओएमआर शीट भरने में हुई गलती की जिम्मेदारी सिर्फ अभ्यर्थी की होती है. इसके बाद याचिका को खारिज कर दिया.
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