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IIM रांची में हिंदी पखवाड़ा कार्यक्रम, प्रो. केजी सुरेश ने कहा- भाषा के साथ संस्कृति और विचार भी बदलते हैं

INT News21 September 2026 at 10:38 pm

रांची. IIM रांची में हिंदी पखवाड़ा कार्यक्रम, प्रो. केजी सुरेश ने कहा- भाषा के साथ संस्कृति और विचार भी बदलते हैंआईआईएम रांची के राजभाषा प्रकोष्ठ की ओर से संस्थान में चल रहे हिंदी पखवाड़ा के तहत 21 सितंबर को परिचर्चा सत्र का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. केजी सुरेश बतौर अतिथि वक्ता शामिल हुए. उन्होंने राजभाषा हिंदी, प्रबंधन कौशल और प्रभावी अभिव्यक्ति में भाषा की भूमिका पर विचार रखे.

हिंदी को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सरलीकरण जरूरी

प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा के रूप में मान्यता मिली थी. भारत एक बहुभाषी देश है और हिंदी की कई बोलियां भी विकसित हुई हैं. उन्होंने कहा कि हिंदी को सर्वस्पर्शी यानी सभी को जोड़ने वाली भाषा बनाने की आवश्यकता है.

उन्होंने भाषा के सरलीकरण पर जोर देते हुए कहा कि भाषा जितनी सरल होगी, उतनी ही आसानी से जन-जन तक पहुंच सकेगी. उनके अनुसार, भाषा के साथ संस्कृति और विचारों में भी सकारात्मक बदलाव की संभावना रहती है. उन्होंने हिंदी सिनेमा की ओर से हिंदी को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया.

हिंदी को बताया सभी भाषाओं की 'बड़ी बहन'

परिचर्चा के दौरान प्रो. सुरेश ने कहा कि अंग्रेजी समेत कई भाषाओं के शब्दों का विकास संस्कृत और देश की विभिन्न स्थानीय बोलियों से हुआ है. उन्होंने हिंदी को सभी भाषाओं की 'बड़ी बहन' बताते हुए कहा कि इसका दायित्व अन्य भाषाओं को प्रोत्साहित करना भी है.

उन्होंने युवाओं को साहित्य और किताबों से जुड़ने की सलाह दी. कहा कि भाषा के माध्यम से बौद्धिक विकास के लिए साहित्य का अध्ययन जरूरी है.

सफल प्रबंधक के लिए अच्छी भाषा और सुनने की क्षमता जरूरी

प्रबंधन के विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए प्रो. सुरेश ने कहा कि एक सफल प्रबंधक के लिए भाषा पर अच्छी पकड़ होना जरूरी है. उन्होंने कहा कि प्रबंधक को भी सर्वस्पर्शी होना चाहिए. बेहतर इंसान और लीडर बनने के लिए प्रभावी अभिव्यक्ति के साथ अच्छा श्रोता होना भी जरूरी है.

उन्होंने विद्यार्थियों को 'माइक्रो' की बजाय 'मैक्रो' प्रबंधन पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी. उनके अनुसार, व्यापक दृष्टिकोण से कार्यक्षेत्र में बेहतर टीम का निर्माण किया जा सकता है और कर्मचारियों के बीच दोषारोपण की जगह सहयोग की भावना को बढ़ावा दिया जा सकता है. कार्यक्रम के समापन पर प्रो. सत्यम ने अतिथि वक्ता प्रो. केजी सुरेश को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया. मौके पर संस्थान के विद्यार्थी, संकाय सदस्य और शिक्षकेतर कर्मी उपस्थित थे.