गेहूं की कटाई के बाद मध्य प्रदेश के खेतों में आग लग रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल 20 हजार से ज्यादा नरवाई के मामले सामने आते हैं। सरकार ने नरवाई पर रोक लगा रखी है, लेकिन यह सिर्फ कागजों में ही नजर आती है। भोपाल, विदिशा, उज्जैन, रायसेन और नर्मदापुरम में नरवाई के मामले हर साल बढ़ रहे हैं। पराली से तापमान बढ़ रहा है और वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है। CREAMS और ICAR के डेटा के मुताबिक, पराली जलाने के मामलों में मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। यह उत्तरप्रदेश और हरियाणा से भी आगे है। पराली जलाने की स्थिति देखने के लिए दैनिक भास्कर ने हेलिकॉप्टर से 10 हजार फीट की ऊंचाई पर भोपाल, रायसेन, विदिशा, अशोकनगर, सागर और निवाड़ी का सर्वे किया। इसमें कई जगह खेत जलते और काले नजर आए। सबसे पहले देखिए आग में धधकते खेतों की तस्वीरें… अब जानिए…कहां, कैसे नजर आए हालात पराली से तापमान में 2 डिग्री तक की बढ़ोतरी पराली जलाने से दिन का तापमान औसतन 1 से 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है। तापमान मापने के लिए मौसम केंद्र, एयरपोर्ट और नवी बाग में सिस्टम लगे हैं, जिससे रोज औसत तापमान दर्ज होता है। भोपाल के कटारा, बाग मुगालिया, फंदा, विदिशा रोड और रायसेन रोड पर सबसे ज्यादा पराली जलाई जा रही है, लेकिन यहां मापने के सिस्टम नहीं हैं। एक्सपर्ट के अनुसार, इन इलाकों में तापमान आसपास 5 से 6 डिग्री तक बढ़ जाता है। पर्यावरणविद् सुभाष सी. पांडे ने कहा कि आग के बाद क्षेत्र का तापमान बढ़ जाता है और गर्म हवा से आसपास का पारा भी बढ़ता है। उन्होंने कहा कि पराली जलाना पर्यावरण के लिए ठीक नहीं है और इस पर सख्ती से रोक होनी चाहिए। पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ जाता है गंजबासौदा स्थित कृषि महाविद्यालय के प्रो. आशीष श्रीवास्तव ने कहते हैं कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, खासकर उन इलाकों में जहां इसे जलाया जाता है। इससे AQI भी बढ़ता है। उन्होंने बताया कि इससे किसानों को कई नुकसान होते हैं। जैसे- 1. मिट्टी की उर्वरता में कमी: पराली जलाने से मिट्टी के सूक्ष्मजीव और केंचुए मर जाते हैं, जिससे उर्वरता घटती है।
2. पोषक तत्व नष्ट: पराली में मौजूद नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जलकर खत्म हो जाते हैं, जिससे फसल को पोषण नहीं मिलता।
3. उत्पादन में कमी: मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्व कम होने से अगली फसल की पैदावार कम हो जाती है।
4. पर्यावरण प्रदूषण: पराली जलाने से धुआं निकलता है, जो हवा को प्रदूषित करता है और इंसानों व पशुओं के लिए हानिकारक है।
5. आग फैलने का खतरा: पराली की आग कभी-कभी पास के खेतों में फैलकर नुकसान करती है। सुझाव- पराली न जलाकर ये करें… पूरे देश में पराली जलाना प्रतिबंधित एमपी ही नहीं, पूरे देश में पराली जलाना प्रतिबंधित है। ऐसा करने पर स्थानीय प्रशासन कार्रवाई कर सकता है। किसानों पर ₹2,500 से ₹15,000 तक जुर्माना लगाया जा सकता है। बार-बार उल्लंघन पर सजा का भी प्रावधान है।
पहली बार हेलिकॉप्टर से देखिए MP में जलते खेत:भास्कर ने 10000 फीट की ऊंचाई से 6 जिलों में नरवाई जलते देखी; रोक सिर्फ कागजों में
