Kumaoni Musical Instrument Hudka: देवभूमि उत्तराखंड की लोक संस्कृति की धड़कन ‘हुड़का’ आज भी अपनी खास पहचान बनाए हुए है. बागेश्वर में पारंपरिक तरीके से तैयार होने वाले हुड़के की मांग सिर्फ प्रदेश ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार विदेशों तक है. कुमाऊं के जागर, लोकगीत और नृत्यों में जान फूंकने वाला यह वाद्य यंत्र आज भी पुराने कारीगरों की मेहनत से जीवित है. जानिए क्यों बागेश्वर का हुड़का इतना खास है और कैसे आधुनिक दौर में भी इसकी गूंज कम नहीं हुई है.
कुमाऊंनी संस्कृति की पहचान! विदेशों तक गूंज रही बागेश्वर के हुड़के की थाप, कलाकार बोले- इसकी धुन में है जादू
