पिता की जॉब टीनएजर्स को बना रही एंग्जायटी का शिकार:भोपाल में 1500 स्टूडेंट्स पर हुई स्टडी; हर दूसरा बच्चा झेल रहा मानसिक दबाव

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भोपाल के स्कूल जाने वाले किशोरों पर हुई एक रिसर्च ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। करीब 53% बच्चे किसी न किसी स्तर की चिंता (एंग्जायटी) से जूझ रहे हैं। यह बर्डन ऑफ एंग्जायटी अमंग स्कूल-गोइंग अडोलेसेंट्स इन अर्बन भोपाल: ए क्रॉस-सेक्शनल स्टडी क्यूरियस जर्नल ऑफ मेडिकल साइंस में प्रकाशित हुआ है। खास बात यह है कि इस शोध में पाया गया कि बच्चों में एंग्जायटी का सीधा संबंध पिता के पेशे से भी जुड़ा है। पढ़ाई का दबाव, सामाजिक अपेक्षाएं और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी इस समस्या को और बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते पहचान और सही सहयोग बेहद जरूरी है। 1500 छात्रों पर हुई स्टडी यह अध्ययन मई 2019 से मई 2021 के बीच भोपाल के शहरी क्षेत्रों में किया गया। इसमें 14 से 19 साल के करीब 1500 स्कूल छात्रों को शामिल किया गया। रिसर्च में मल्टीस्टेज क्लस्टर सैंपलिंग तकनीक अपनाई गई। जिससे अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के छात्रों को शामिल किया जा सके। छात्रों से सवाल पूछने के लिए DASS-42 (डिप्रेशन, एंग्जायटी और स्ट्रेस स्केल) का इस्तेमाल किया गया, जो मानसिक स्थिति को मापने का एक मान्य तरीका है। हर दूसरा बच्चा एंग्जायटी का शिकार रिसर्च के नतीजे काफी गंभीर हैं। कुल 53% किशोरों में एंग्जायटी के लक्षण पाए गए। इनमें से 10.6% को हल्की, 21.5% को मध्यम, 13.8% को गंभीर और 7.1% को बेहद गंभीर एंग्जायटी पाई गई। यानी हर दूसरा बच्चा मानसिक दबाव से जूझ रहा है, जो उसके पढ़ाई, रिश्तों और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है। पिता की नौकरी से जुड़ा तनाव का स्तर इस स्टडी की सबसे दिलचस्प और अहम बात यह रही कि एंग्जायटी का स्तर पिता के पेशे से जुड़ा पाया गया। जिन छात्रों के पिता सरकारी या निजी नौकरी में थे, उनमें एंग्जायटी का स्तर ज्यादा देखा गया। हालांकि उम्र, जेंडर या स्क्रीन टाइम जैसे फैक्टर का कोई खास प्रभाव नहीं पाया गया। लंबे समय तक रह सकती है समस्या मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी ने कहा कि भारत में किशोरों में एंग्जायटी तेजी से बढ़ रही है। इसके पीछे कई कारण हैं। इसमें पढ़ाई का बढ़ता दबाव, प्रतियोगिता, परिवार की उम्मीदें और सोशल तुलना सबसे प्रमुख हैं। इसके अलावा मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी भी एक बड़ी वजह है, जिससे समय पर मदद नहीं मिल पाती। डॉ. त्रिवेदी के अनुसार, यदि एंग्जायटी का समय पर इलाज नहीं किया गया, तो यह समस्या आगे चलकर गंभीर मानसिक बीमारियों में बदल सकती है। इससे बच्चों की पढ़ाई, करियर और सामाजिक जीवन पर भी असर पड़ सकता है। टीनएजर्स से जुड़ी ये बातें भी जानिए