साइबर सेल की कार्रवाई से पानीपत के व्यापारी बेहाल:बैंक खाते फ्रीज करने के खिलाफ गृह मंत्रालय पहुंचे CA, तुरंत एक्शन की मांग

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साइबर धोखाधड़ी की जांच के नाम पर साइबर सेल द्वारा पानीपत के व्यापारियों और आम नागरिकों के बैंक खाते फ्रीज किए जाने का मामला अब दिल्ली दरबार तक पहुंच गया है। इस प्रक्रिया से हो रहे भारी व्यापारिक नुकसान को देखते हुए पानीपत CA ब्रांच के पूर्व चेयरमैन और अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के कार्यकारी सदस्य, चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) जगदीश धमीजा ने कड़ा रुख अपनाया है। धमीजा ने 6 मई को केंद्रीय गृह मंत्रालय में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। जगदीश धमीजा ने स्पष्ट किया कि यह शिकायत किसी विशेष क्षेत्र या पानीपत साइबर सेल के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह साइबर सेल की उस जांच प्रक्रिया पर है, जो पूरे भारत में अपनाई जा रही है। उन्होंने बताया कि व्यापारियों को सबसे अधिक परेशानी केरल, महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे राज्यों के साइबर सेल से आ रही शिकायतों के कारण हो रही है, जहां से मिले निर्देशों पर देशभर के व्यापारियों के खाते फ्रीज किए जा रहे हैं। ये है लेयरिंग का गणित धमीजा ने अपनी शिकायत में तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं को स्पष्ट करते हुए बताया कि जब भी कोई साइबर फ्रॉड होता है, तो पैसा सबसे पहले जालसाज के खाते में जाता है, जिसे प्रथम स्तर कहा जाता है। इसके बाद यह पैसा विभिन्न अन्य खातों (द्वितीय स्तर और उससे आगे) में ट्रांसफर होता है। मीजा का तर्क है कि पहले स्तर का व्यक्ति निश्चित रूप से अपराधी हो सकता है, लेकिन उसके बाद के स्तरों पर पैसा प्राप्त करने वाले लोग आवश्यक रूप से घोटाले का हिस्सा नहीं होते। व्यापारिक दुनिया में यह पैसा भोजन, ईंधन बिल, माल की खरीद-फरोख्त या सामान्य लेन-देन के रूप में अर्थव्यवस्था में घूमने लगता है। ऐसे में अंतिम स्तर पर पैसा प्राप्त करने वाले व्यक्ति को यह पता ही नहीं होता कि उसके पास आने वाली छोटी सी राशि किसी साइबर अपराध से जुड़ी हो सकती है। 2 हजार रुपए के लिए खाता ठप व्यापारियों की परेशानी का सबसे बड़ा कारण साइबर सेल की कार्यप्रणाली है। धमीजा ने बताया कि जांच एजेंसियां धन के हस्तांतरण की पूरी चेन को ट्रैक करती हैं और सभी संबंधित बैंक खातों को फ्रीज या होल्ड करने के निर्देश दे देती हैं। धमीजा ने शिकायत में उल्लेख किया कि कई व्यापारियों को मात्र एक हजार या 5 हजार रुपए का भुगतान प्राप्त हुआ था, लेकिन इसके चलते उनके पूरे के पूरे बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए, जिनमें करोड़ों रुपए का बैलेंस मौजूद है। खाता पूरी तरह बंद होने से व्यापारी न तो किसी को भुगतान कर पा रहे हैं और न ही व्यापारिक लेन-देन, जिससे उनका काम पूरी तरह ठप हो गया है और बाजार में साख खराब हो रही है। गृह मंत्रालय तुरंत जारी करे निर्देश जांच पूरी होने तक पूरे खाते को फ्रीज करने के बजाय, केवल उतनी ही राशि को होल्ड किया जाना चाहिए जितनी संदिग्ध है। यदि मुख्य घोटालेबाज (प्रथम स्तर) के खाते में ही पर्याप्त राशि मिल जाती है, तो आगे के स्तरों पर निर्दोष लोगों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। गृह मंत्रालय तुरंत निर्देश जारी करे कि पूरे खाते के बजाय केवल विवादित राशि पर ही लियन लगाया जाए।