मध्य प्रदेश में सत्ता और संगठन के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अब जिला स्तर पर ‘कार्यकर्ता एडजस्टमेंट’ का महाभियान शुरू कर दिया है। एमपी के 55 जिलों में सरकारी समितियों और बोर्डों के जरिए स्थानीय स्तर के प्रमुख कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। सरकार और संगठन का मुख्य फोकस इस बात पर है कि पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक सक्रिय कार्यकर्ताओं को सरकारी कामकाज में भागीदार बनाया जाए। एक जिले में 70 से ज्यादा समितियां बनेंगी प्रभारी मंत्रियों को उनके प्रभार वाले जिलों में नियुक्तियों की कमान सौंपी गई है। जिलों में कोर ग्रुप की बैठकें लगातार जारी हैं, जहां नामों को छांटने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इस कवायद के तहत 31 विभागों की लगभग 70 से अधिक तरह की समितियों में हजारों कार्यकर्ताओं की नियुक्तियां होनी हैं। सीएम के ऑफिस से हो रही निगरानी एक तरफ जहां बीजेपी के जिला स्तरीय कोर ग्रुप के जरिए कार्यकर्ताओं के नाम निकाले जा रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ मुख्यमंत्री कार्यालय से इसकी निगरानी हो रही है। तीन महीने पहले 27 जनवरी को मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से प्रभारी मंत्रियों और जिला कलेक्टरों को इस संबंध में आदेश जारी किया गया था। एक जिले में करीब 200 नेता होंगे पावरफुल अगर हर जिले में विभागों द्वारा तय समितियों और सदस्यों की संख्या का आकलन करें, तो एक जिले में लगभग 190 से 200 के बीच सदस्यों की नियुक्तियां अलग-अलग समितियों में की जानी हैं। इस आधार पर मध्य प्रदेश के 55 जिलों में कुल 10,500 से अधिक कार्यकर्ताओं को सरकारी समितियों में जगह मिलने जा रही है। यह संख्या जिला स्तरीय, ब्लॉक स्तरीय और ग्राम पंचायत स्तरीय समितियों के सदस्यों को मिलाकर और भी बड़ी हो सकती है, जो बीजेपी के जमीनी तंत्र को सक्रिय करने का बड़ा जरिया बनेगी। खंडेलवाल बोले- जो जहां के काबिल, उसे वहां जगह बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि हमारा प्रयास है कि जो भी नियुक्ति हो, उसमें पार्टी नेतृत्व की सर्वानुमति हो और सभी की सहमति शामिल हो। इसी कारण कई बार समय लगता है, लेकिन हम धीरे-धीरे सभी नियुक्तियां कर रहे हैं। विभागवार समितियों में ऐसे होगा भाजपाइयों का एडजस्टमेंट पंचायत और शिक्षा विभाग में बड़ी हिस्सेदारी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत कुल 8 समितियों का गठन होना है, जिसमें ‘दिशा’, जल स्वच्छता और युवा ग्राम शक्ति समिति प्रमुख हैं। अकेले स्कूल शिक्षा विभाग में जिला स्तरीय नियुक्ति, अनुदान और निर्माण समितियों में करीब 9 सदस्यों की नियुक्ति हर जिले में होनी है। वहीं उच्च शिक्षा की जनभागीदारी समितियों में प्रति कॉलेज एक अध्यक्ष और 13 सदस्य मनोनीत किए जाएंगे, जो कार्यकर्ताओं के लिए बड़ा मंच है। सामाजिक न्याय और विकास की समितियों में भारी पद योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के तहत सात अलग-अलग स्तर की समितियां बनाई गई हैं। इसमें जिला अंत्योदय समिति सबसे महत्वपूर्ण है, जहां कम से कम 10 और अधिकतम 30 सदस्य नियुक्त किए जा सकते हैं। इसी तरह नगर निगम और नगर परिषद स्तर की समितियों में भी 5 से 21 सदस्यों तक का कोटा रखा गया है। सामाजिक न्याय विभाग की 6 समितियों में दिव्यांगजन सलाहकार और मुख्यमंत्री कन्यादान योजना जैसी कमेटियों में कार्यकर्ताओं को मौका मिलेगा। प्रशासनिक और तकनीकी विभागों में नियुक्तियां जेल विभाग के विजिटर बोर्ड और अशासकीय संदर्शक समिति में प्रति जिला 10 सदस्य बनाए जाएंगे। पुलिस विभाग के जिला पुलिस शिकायत बोर्ड में महिला पार्षदों या जिला पंचायत सदस्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा, तकनीकी शिक्षा विभाग की आईटीआई समितियों, खेल विभाग की प्रशिक्षक कल्याण समिति और पीएचई की जल एवं स्वच्छता समितियों में भी मनोनीत सदस्यों की संख्या तय कर दी गई है। आर्थिक और विकास से जुड़ी समितियां खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में जिला, विकासखंड और उचित मूल्य की दुकान स्तर तक 6 समितियां कार्यरत होंगी। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र की टास्क फोर्स और लघु उद्योग संवर्धन बोर्ड में भी प्रभारी मंत्री की अनुशंसा पर नियुक्तियां की जा रही हैं। कृषि विभाग की ‘आत्मा’ परियोजना और उद्यानिकी विभाग के मिशनों में भी स्थानीय चेहरों को शामिल किया जाएगा। प्रभारी मंत्रियों की सक्रियता और कोर ग्रुप का मंथन इन नियुक्तियों के लिए प्रभारी मंत्रियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे संगठन के साथ बैठकर ऐसे नामों का चयन करें, जो आगामी चुनावी समीकरणों और क्षेत्र में बीजेपी की पकड़ को और मजबूत कर सकें। स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग की मूल्यांकन समिति हो या राजस्व विभाग की नामांतरण समिति, हर जगह सत्ता का विकेंद्रीकरण कर कार्यकर्ताओं को प्रशासनिक प्रक्रियाओं का हिस्सा बनाया जा रहा है। आने वाले कुछ ही हफ्तों में सभी 55 जिलों की इन समितियों के नाम फाइनल कर दिए जाएंगे, जिससे प्रदेश भर में हजारों नेताओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं को सरकारी पदों के साथ काम करने का मौका मिलेगा।
31 विभागों की समितियों में एडजस्ट होंगे 10,500 बीजेपी नेता:MP में प्रभारी मंत्रियों को सौंपी जिम्मेदारी; कोर ग्रुप छांट रहा कार्यकर्ताओं के नाम
