जेल मैनुअल के अनुसार जेल में बंद अंडर ट्रायल कैदी से 7 दिन में एक बार ही मुलाकात की जा सकती है, जबकि सजायाफ्ता से 15 दिन में एक बार। लेकिन रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में यह नियम लागू नहीं होता। जहां सबसे ज्यादा सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए, वहां भ्रष्टाचार हावी है। सुरक्षाकर्मी ही पैसे लेकर अवैध रूप से लोगों को जेल में बंद कैदियों से मिलवाते हैं। न कोई रजिस्टर मेंटेन होता है और ना पर्याप्त जांच-पड़ताल। यही नहीं, सुरक्षाकर्मी खुद कैदियों तक नशीला पदार्थ पहुंचाते हैं। सबका रेट तय है। दैनिक भास्कर ने एक माह तक जेल और सुरक्षाकर्मियों की पड़ताल की। इसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। भास्कर रिपोर्टर ने गांजा तस्कर तक सिगरेट पहुंचाने पर बात की। इस पर सुरक्षाकर्मी खुल कर बोले… दो-तीन पैकेट पहुंचाना है तो 1500 रु. लगेंगे, वहीं 20 हजार रुपए प्रतिमाह खर्च करें तो महीने में जितनी बार चाहे सामान भेज सकते हैं। दैनिक भास्कर के पास लेनदेन के वीडियों उपलब्ध हैं। मैनुअल के उल्लंघन से क्या हो सकता है नुकसान जेल में कैदियों से मिलने वालों का सत्यापन जरूरी है, कैसे पता चलेगा कि मिलने वाला अपराधी है या उसका परिजन। ऐसे में कैदी जेल में रह कर भी आपराधिक षड्यंत्र कर सकता है। जेल सुरक्षा प्रभावित हो सकती है, पिछले दिनों एक कैदी भाग चुका है। जेल में बंद पेशेवर अपराधी की संगत में नए कैदी भी बिगड़ सकते हैं और अपराधी बन सकते हैं। पैसे दिए और सीधे पहुंच गया मुलाकाती कक्ष तीसरा स्टिंग : 14 जुलाई सिगरेट पैकेट भेजना है तो 1500 रुपए लगेंगे… रिपोर्टर : एक कैदी को सिगरेट की लत है, उसे भेजना है, कैसे होगा? कर्मी- कितना भेजना है? रिपोर्टर : फिलहाल दो-तीन पैकेट, वैसे एक माह का भेजना है। कर्मी- साहब से पूछ के बताते हैं, कितना लगेगा। (कुछ देर बाद किसी अधिकारी से बात कर कर्मी लौटता है और कहता है… हां हो जाएगा, कितना भेजना है।) रिपोर्टर : अभी तीन पैकेट भेजना है, वैसे माह भर का क्या लगेगा, बीच-बीच में मिलना भी है। कर्मी – तीन पैकेट सिगरेट का 1500 रुपए लगेगा। माह भर का 20 हजार। इसी में मिलना- जुलना भी हो जाएगा। रिपोर्टर : अभी सिगरेट ले के आएं? कर्मी : ऐसे थोड़े होता है, कोई सामान भेजिएगा तो उसी के साथ सिगरेट का पैकेट भी रख दीजिएगा, चला जाएगा। जेल में कैदियों तक कोई भी सामान मुफ्त नहीं पहुंचता। मुख्य गेट पार कर कुछ आगे बढ़ने पर मुलाकातियों के लिए सामान एकत्र किए जाते हैं। नाम, पता और वार्ड लिखने के बाद सुरक्षाकर्मी परिजनों से वस्तुओं के हिसाब से पैसे की डिमांड करते हैं। दैनिक भास्कर का रिपोर्टर एक कैदी से मिलने की बात कहकर जेल के अंदर पहुंचता है। गेट पर 300 रुपए देकर अंदर दाखिल हो जाता है। वहां सुरक्षा कर्मी से एक कैदी के नाम पर चिकन भेजता है। इसके लिए वह 500 रुपए लेता है। इसी दौरान एक अन्य कर्मी आता है, जिससे रिपोर्टर बताता है कि एक कैदी तक सिगरेट भेजनी है, कैसे काम होगा। फिर शुरू होती है बातचीत… सामान भेजने का रेट (रुपए में) मुख्य गेट : 7 अगस्त, सुबह 9 बजे नियम विरुद्ध ऐसे मिल सकते हैं कैदियों से… मुख्य गेट के अंदर जाते ही उगाही का खेल शुरू हो जाता है। नियम के अनुसार मिलना है तो गेट के अंदर दाहिने तरफ कमरा है, जहां कम्प्यूटर पर मुलाकातियों का डेटा रखा जाता है। मुलाकातियों से पहचान के रूप में आधार कार्ड की कॉपी ली जाती है। नियम से इतर मिलने वाले 300 रुपए सुरक्षा कर्मी को पकड़ाते हैं और आगे बढ़ जाते हैं। फिर मुलाकाती वार्ड में कैदियों को बुलाने के लिए 200 रुपए लिए जाते हैं। वीडियो देखने के लिए क्यूआर कोड स्कैन करें… सामान के आधार पर डिमांड कच्चा मटन 1000 कच्चा मुर्गा 500 कच्चा पनीर 200 जूता 300 साग-सब्जी 100 पैक बिस्किट, मिक्सचर 50 टमाटर, खीरा, मिर्च फ्री रिपोर्टर जेल में बंद एक कैदी के परिजन के साथ बिना कागजी कार्रवाई पूरी किए पैसे देकर सीधे अंदर जाता है। मुख्य गेट पर पैसे दिए, इसके बाद बिना रोक-टोक सीधे मुलाकाती कक्ष तक पहुंच गया। उसने परिजन के साथ कैदी से मुलाकात की और बिना किसी परेशानी के उससे बातचीत भी की। रिपोर्टर : सर, अंदर मेरा आदमी है, उससे बराबर मिलना है। कर्मी : रोज मिल सकते हो, उतना पैसा है? फिर रिपोर्टर पैसे देकर एक कैदी के नाम पर जूते, कुछ बिस्किट व केला भेजता है। (वीडियो में पैसे लेते स्पष्ट देखा जा सकता है।) 13 अगस्त, सुबह 10.15 बजे रोज मिल सकते हो, उतना पैसा है… दैनिक भास्कर रिपोर्टर व सुरक्षाकर्मियों के बीच बातचीत से समझें स्थिति… अशोक चौधरी, पूर्व जेल अधीक्षक, बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार
500 रुपए देकर कैदी से रोज मुलाकात, 20 हजार दीजिए…महीने भर कुछ भी भेजिए
