सहारनपुर में इंडियन आर्मी के मेजर ने एक रुपए शगुन लेकर कैप्टन लड़की से शादी की। रिवाज के नाम पर एक नारियल मात्र लिया। दूल्हे ने कहा कि मैंने छात्र जीवन में ही दहेज न लेने की सोच ली थी। हालांकि सुरक्षा कारणों से दोनों की तैनाती कहां है, इसकी जानकारी नहीं है। वहीं, दूल्हे के पिता ने कहा- मेरा बेटा बहू नहीं बेटी लाया है। हमारे घर की रौनक बेटी के आने से बढ़ गई है। हम लोगों को दहेज वैसे भी नहीं चाहिए था। बहू के रूप में बेटी मिली, इससे बड़ा दहेज क्या ही हो सकता है। ये पूरा मामला सरसावा क्षेत्र के मीरपुर गांव का है। शादी की 2 तस्वीरें देखिए…
लड़के वालों ने एक रुपए का शगुन लिया
मीरपुर गांव के रहने वाले चौधरी ओमपाल सिंह भारतीय सेना से रिटायर्ड हैं। सरसावा आर्य जाट समाज विकास समिति के संयुक्त सचिव भी हैं। उन्होंने बेटे मधुर चौधरी की शादी बिना दहेज के 16 मार्च, 2026 को संपन्न कराई। मधुर की शादी ब्रजमंडल की रहने वाली ज्योति सौरोत के साथ हुई, जिसमें केवल एक रुपए का शगुन लिया गया। मधुर के परिजनों ने बताया कि उनकी तैनाती से जुड़ी जानकारी गोपनीय रहती है, क्योंकि इसके लिए सेना से अनुमति लेनी होती है। मधुर साल 2018 में इंडियन मिलिट्री एकेडमी, देहरादून से पास आउट होकर भारतीय सेना में कमीशन हुए थे। वहीं, उनकी पत्नी ज्योति सौरोत 2019 की पास आउट हैं। धार्मिक यात्रा में हुई मिले परिवार
दूल्हे के रिश्तेदारों ने बताया- मधुर के माता-पिता धार्मिक यात्रा पर मथुरा गए हुए थे। उसी यात्रा में उनकी ज्योति के परिवार वाले भी शामिल थे। बातचीत के दौरान ज्योति के परिवार ने बताया कि वे अपनी बेटी के लिए अच्छा रिश्ता तलाश रहे हैं। तभी मधुर की मां ने बताया कि उनका बेटा सरकारी सेवा में है। वह सेना में मेजर के पद पर कार्यरत है। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे यह रिश्ता शादी तक पहुंच गया। सास बोलीं- बहू नहीं, बेटी मानते हैं
मेजर मधुर चौधरी की मां रेखा चौधरी ने कहा- बहू मेरे घर लक्ष्मी बनकर आई है। पहले दिन से ही हम लोगों ने बहू को बहू नहीं, बल्कि बेटी की तरह माना है। हम लोग बेहद खुश हैं और जिस तरह की जीवनसंगिनी मधुर बेटे के लिए चाहते थे, वैसी ही बेटी उन्हें मिली है। हमारी भगवान से यही प्रार्थना है कि दोनों का वैवाहिक जीवन हमेशा खुशियों से भरा रहे। ससुर ने कहा- बहू दहेज से बढ़कर है
चौधरी ओमपाल सिंह ने कहा- हमारे लिए बहू ही सबसे बड़ा दहेज है। कई प्रतिष्ठित परिवारों से रिश्ते आए, लेकिन उन्होंने पहले से ही बिना दहेज शादी करने का संकल्प ले रखा था। धन-दौलत तो आती-जाती रहती है, लेकिन एक संस्कारी बेटी दो परिवारों को जोड़ती है। मेजर मधुर चौधरी ने बताया- मैंने छात्र जीवन में ही तय कर लिया था कि दहेज नहीं लेना है। दहेज के कारण टूटते रिश्तों और बिखरते परिवारों की खबरें पढ़कर यह निर्णय लिया था। युवाओं से भी मेरी अपील है कि वे अपने माता-पिता के संस्कारों का सम्मान करें। समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए आगे आएं। —————————— यह खबर भी पढ़ें…. बदला लेने के लिए भाजपा नेता की हत्या हुई थी, गोरखपुर में CCTV से पकड़े गए हत्यारोपी गोरखपुर में मॉर्निंग वॉक पर निकले भाजपा नेता राजकुमार चौहान की हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। एसएसपी डॉ. कौस्तुभ के अनुसार, दो डंपर चालकों ने वारदात को अंजाम दिया। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि दो महीने पहले भाजपा नेता के भतीजे ने उनके साथ मारपीट की थी। उस वक्त भाजपा नेता ने भतीजे का पक्ष लिया था। भतीजा उनके दम पर रौब गांठता था, इसलिए बदला लेने के लिए वारदात को अंजाम दिया। पढ़ें पूरी खबर…
मेजर ने कैप्टन दुल्हन से एक रुपए में शादी की:सहारनपुर में कहा- दहेज के लिए कभी नहीं सोचा, ससुर बोले- बहू नहीं बेटी आई
