चुनावी साल में सभी दलों को याद आए अंबेडकर:मायावती लखनऊ में ताकत दिखाएंगी, भाजपा मूर्ति योजना लाई; सपा चलेगी PDA कार्ड

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जातीय समीकरण पर टिकी यूपी की सियासत में सत्ता की राह अनुसूचित जाति के बिना संभव नहीं है। 14 अप्रैल (आज) को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती है। ऐसे में भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस समेत अन्य तमाम पार्टियां अपने-अपने तरीके से कार्यक्रम कर रही हैं। इससे पहले कांग्रेस ने देश के इकलौते दलित उप-प्रधानमंत्री रहे बाबू जगजीवन राम की जयंती पर कार्यक्रम किया था। समाज सुधारक और चिंतक ज्योतिबा फुले की जयंती पर भी प्रोग्राम हुए थे। यूपी सरकार डॉ. अंबेडकर मूर्ति विकास योजना की घोषणा कर चुकी है। वहीं, सपा ने गांव-गांव जाकर ‘संविधान पर चर्चा’ करने की बात कही है। ये सारी कवायद दलित वोट बैंक को साधने के लिए है। सवाल है कि क्या ऐसे कार्यक्रमों से दलित वोटबैंक पर असर पड़ता है? क्या वजह है कि राजनीतिक दल पिछले बार के मुकाबले इस साल ज्यादा अंबेडकर जयंती पर ज्यादा कार्यक्रम कर रहे? पढ़िए रिपोर्ट… पहले यूपी में दलित वोटबैंक का असर समझते हैं… विधानसभा में 86 सीटें रिजर्व, असर 124 से ज्यादा पर
यूपी में दलितों की आबादी 20 से 21% के करीब है। विधानसभा में दलितों के लिए 84 सीटें रिजर्व हैं। हालांकि, 124 से ज्यादा सीटों पर दलित वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभाता है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजनीतिक पार्टियों के लिए दलित समाज क्यों जरूरी है? सीनियर जर्नलिस्ट रतन मणि लाल बताते हैं- 2012 के बाद जबसे मायावती कमजोर पड़ीं, दलितों के लिए कोई इतना बड़ा चेहरा नहीं रहा, जिसके साथ वो एकजुट रहें। यही वजह है कि सभी पार्टियां दलितों को अपने पाले में करने की कोशिश में जुटी हैं। सीनियर जर्नलिस्ट अखिलेश बाजपेयी कहते हैं- दलित समाज बाबा साहब को भगवान का दर्जा देता है। ऐसे में जो राजनीतिक दल बाबा साहब का सम्मान करते हैं, समय-समय पर उन्हें याद करते हैं, उस दल के लिए दलित वोट बैंक में सॉफ्ट कॉर्नर रहता है। अब देखते हैं कौन-सी पार्टी क्या कर रही… भाजपा सरकार करेगी मूर्ति योजना की लॉन्चिंग पिछले साल क्या किया था- 2025 में भाजपा ने अंबेडकर स्मारकों की साफ-सफाई और मार्ल्यापण का कार्यक्रम रखा था। 13 से 25 अप्रैल तक यूपी भर में ‘डॉ. भीमराव अंबेडकर सम्मान अभियान’ चलाया था। बसपा दिखाएगी कोर वोटर्स की ताकत पिछले साल क्या किया था- बसपा ने 2 जगह कार्यक्रम किया था। नोएडा में 6 मंडलों और लखनऊ में 12 मंडलों के कार्यकर्ता इकट्ठा हुए थे। इस बार सभी कार्यकर्ता लखनऊ पहुंच रहे हैं। सपा करेगी संविधान पर चर्चा पिछले साल क्या किया था- सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लखनऊ में अंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण किया था। कहा था कि पीडीए की एकता ही संविधान और आरक्षण बचाएगी। पीडीए की एकजुटता ही सुनहरा भविष्य बनाएगी। दलित वोट छिटकने से बढ़ी भाजपा की चिंता 2017 विधानसभा चुनाव- भाजपा ने 86 SC सीटों में से 85 पर प्रत्याशी उतारे थे। उनमें से 75 जीते थे। संदेश साफ था कि दलित वर्ग बसपा से छिटककर भाजपा के खेमे में आया है। 2022 विधानसभा चुनाव- भाजपा ने सभी 86 सीटों पर प्रत्याशी उतारे। इस बार जीत का आंकड़ा 63 रह गया। इससे संदेश गया कि कुछ सीटों पर दलित वोट सपा की तरफ शिफ्ट हुआ है। 2024 लोकसभा चुनाव- यूपी में SC के लिए रिजर्व 17 सीटों में से 7 सीटें सपा ने जीत लीं। नगीना सीट से आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद जीत गए। बाराबंकी से कांग्रेस के तनुज पूनिया ने जीत दर्ज की। सीतापुर की अनरिजर्व सीट पर कांग्रेस के राकेश राठौर ने भाजपा के दिग्गज नेता राजेश वर्मा को हरा दिया। इस तरह लोकसभा चुनाव में दलित सीटों पर भी भाजपा का ग्राफ गिरता दिखाई दिया। सपा का PDA फॉर्मूला- पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक को साथ लाने की सपा की रणनीति सफल होने के बाद उसी तर्ज पर विधानसभा चुनाव लड़ने जा रही है। सपा दलित वोट खींचने के लिए संविधान बचाओ, आरक्षण बचाओ जैसे मुद्दों को हवा दे रही है। सरकार, संगठन, विधान परिषद और राज्यसभा में दलितों को ठीक से प्रतिनिधित्व नहीं मिलने से भी दलित भाजपा से नाराज हैं। अब जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट… सीनियर जर्नलिस्ट अखिलेश बाजपेयी कहते हैं- राजनीति में प्रतीकों का महत्व है। डॉ. अंबेडकर केवल दलितों के ही नहीं, शोषित, वंचित समाज के लिए उम्मीद की किरण हैं। राजनीतिक दल जानते हैं कि डॉ. अंबेडकर के नाम पर जो भी काम किया जाता है, उससे दलित-शोषित समाज आकर्षित होता है। अंबेडकर जयंती पर बड़े आयोजन करके पार्टियां संदेश देना चाह रही हैं कि वो डॉ. अंबेडकर और दलितों का ज्यादा हितैषी हैं। सीनियर जर्नलिस्ट रतन मणि लाल का मानना है कि लंबे समय बाद बसपा सुप्रीमो मायावती सक्रिय हुई हैं। दलितों का रुझान मायावती के ओर दिख रहा है। भाजपा और सपा में संदेश गया है कि अगर दलित वोट फिर से मायावती के साथ गया या दलित वोट का बंटवारा त्रिकोणीय हुआ, तो नुकसान होगा। ————————- ये खबर भी पढ़ें… सबसे ज्यादा वोटर भाजपा की सीटों पर घटे:योगी की सीट पर 33 हजार, नेता विपक्ष की सीट पर 41 हजार नाम कटे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद जारी फाइनल वोटर लिस्ट ने ने सीएम योगी की आशंका को सच साबित कर दिया। यूपी में सपा की तुलना में भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सीटों पर वोटर ज्यादा कम हुए हैं। यह ट्रेंड शहरी और ग्रामीण दोनों विधानसभा सीटों पर एक जैसा है। पूरी खबर पढे़ं…