जींद जिले के नरवाना उपमंडल के गांव सुलहेड़ा के जवान मनीष कुमार देश सेवा के दौरान शहीद हो गए। पश्चिम बंगाल में प्रशिक्षण के दौरान हुए एक हादसे में 31 वर्षीय मनीष कुमार की मृत्यु हो गई। जवान का पार्थिव शरीर शुक्रवार को को सैन्य सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव सुलेहड़ा लाया गया। यहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। सैनिक के छोटे भाई सोनू ने चिता को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार से पहले, प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार रणवीर सिंह ने पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके अतिरिक्त, सर्वजातीय बिनैण खाप के प्रधान रघुवीर नैन, कालवन तपा प्रधान फकीरचंद नैन, भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष जोगिंदर नैन, कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी के सुपुत्र करण प्रताप सिंह, जिला पार्षद वीरेंद्र सिंगवाल, जिला पार्षद पवन सुलेहड़ा, सतबीर दबलैन, बिट्टू नैन, गांव के सरपंच महावीर जांगड़ा, सुरेंद्र प्रजापति और रंगी राम नैन सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने भी पुष्पचक्र अर्पित कर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। सेना के जवानों ने की 21 राउंड फायरिंग दी सलामी सेना के जवानों द्वारा 21 राउंड फायर कर दिवंगत सैनिक को सलामी दी गई। गांव में पहुंचने पर हजारों की तादाद में उमड़े क्षेत्र वासियों, विशेष कर युवाओं ने इंकलाब जिंदाबाद, भारत माता की जय, मनीष कुमार अमर रहे के गगनभेदी नारों के साथ शव यात्रा में हिस्सा लिया। पूरे गांव में पूरा दिन मातम का माहौल रहा और संस्कार के वक्त सन्नाटा छाया रहा। सभी की आंखें नम थी और परिजनों विशेष कर सैनिक के पिता, माता, पत्नी और छोटे भाई का विलाप और रूधन देखा नहीं जा रहा था। गांव में छाया मातम, हर आंख नम
शहादत की खबर मिलते ही गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। पूरे इलाके में मातम का माहौल है। ग्रामीणों ने कहा कि मनीष कुमार की शहादत ने पूरे क्षेत्र को गर्व और गम दोनों से भर दिया है। किसान परिवार से थे मनीष, छोटे भाई की भी फौज में जाने की तैयारी
शहीद मनीष कुमार के पिता जगदीश सिंह किसान हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। मनीष परिवार के बड़े बेटे थे और उनके छोटे भाई सोनू फौज में भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। बेटे की शहादत की खबर सुनकर परिवार गहरे सदमे में है। टीए बटालियन से डीएसई तक का सफर
मनीष कुमार पहले आर्मी की टीए बटालियन में सेवाएं दे चुके थे। इसके बाद उन्होंने डीएसई बटालियन ज्वाइन की थी। जानकारी के अनुसार, प्रशिक्षण के दौरान हुए हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इलाज के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और उन्होंने देश सेवा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। कर्तव्यनिष्ठ और अनुशासित थे मनीष कुमार
शहीद मनीष कुमार विवाहित थे, हालांकि उनकी कोई संतान नहीं है। परिवार और ग्रामीणों का कहना है कि मनीष शुरू से ही अनुशासित, मेहनती और देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत थे। वे हमेशा देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा रखते थे। उनके परिवार में पिता जगदीश सिंह, माता सुदेश, पत्नी सुशीला और भाई सोनू शामिल हैं। उन्होंने वर्ष 2016 में सिख रेजीमेंट (टीए ब्रांच) के माध्यम से भारतीय सेना जॉइन की थी। जालंधर (पंजाब) में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद, वह सिपाही के पद पर कार्यरत थे। गांव में उमड़ा जनसैलाब, शोक सभा का आयोजन
पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने पर अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक संगठन और क्षेत्र के गणमान्य लोग मौजूद रहेंगे। शहीद के सम्मान में गांव में शोक सभा का आयोजन किया जाएगा। सभी ने शहीद मनीष कुमार को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।
जींद का जवान पश्चिम बंगाल में शहीद:सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, अधिकारियों, नेताओं ने गांव पहुंच दी श्रद्धांजलि
