एडीजी सिंह ने आमजन को संभावित साइबर अपराध से सचेत रहने के लिए सुझाव देते हुए बताया कि किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले डोमेन नेम की स्पेलिंग को बहुत ध्यान से देखें। साइबर अपराधी अक्सर एक या दो अक्षरों का हेरफेर कर असली जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट बनाते हैं । वहीं सुरक्षित वेबसाइटों की पहचान उनके यूआरएल की शुरुआत में दिखने वाले एचटीटीपीएस और एड्रेस बार में मौजूद ताले (लॉक) के आइकन से होती है। यदि ये सुरक्षा संकेत मौजूद नहीं हैं, तो उस पर अपना कोई भी वित्तीय या निजी विवरण दर्ज न करें। इसके अलावा किसी भी संदिग्ध लिंक की सुरक्षा जांचने के लिए https://transparencyreport.google.com/safe-browsing/search पर जा सकते हैं। इस पोर्टल पर लिंक पेस्ट करें और सुनिश्चित करें कि यह असुरक्षित मालवेयर या फिशिंग तो नहीं दिखा रहा है।
वहीं अपनी निजी जानकारी जैसे ओटीपी, आधार, पैन या बैंक विवरण किसी भी व्यक्ति या अज्ञात वेबसाइट से साझा न करें। एडीजी सिंह ने बताया कि यदि फिर भी कोई घटना होती है तो संचार साथी के चक्षु पोर्टल https://sancharsaathi.gov.in/sfc/ पर तुरंत रिपोर्ट करें। यदि कोई व्यक्ति साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है तो इसकी सूचना निकटतम पुलिस स्टेशन/साइबर पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दे।
