सोनीपत में “जाट और झोटा” वाली टिप्पणी वाली वीडियो मामले में बिजली विभाग के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (SE) गीतू राम तंवर को बड़ा झटका लगा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को गीतू राम तंवर को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति से संवैधानिक मर्यादा और सामाजिक संवेदनशीलता की अपेक्षा की जाती है। न्यायमूर्ति सुमीत गोयल ने सुनवाई के दौरान “स्पीच एक्ट थ्योरी” का जिक्र करते हुए कहा कि शब्द केवल संवाद नहीं होते, बल्कि उनके सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी होते हैं। दूसरी बार लगाई थी अग्रिम जमानत याचिका याचिकाकर्ता गीतू राम तंवर की ओर से यह दूसरी अग्रिम जमानत याचिका दायर की गई थी। इससे पहले 20 अप्रैल, 2026 को हाईकोर्ट में दाखिल पहली याचिका वापस ले ली गई थी। बाद में निचली अदालत से भी राहत नहीं मिलने पर दोबारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। जानिए…पूरा मामला सोनीपत शहर में बिजली विभाग के एसई गीतू राम तंवर की “जाट और झोटा” वाली टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद सोनीपत के एडवोकेट प्रणय दीप सिंह ने शिकायत दी, जिसके आधार पर कार्रवाई शुरू हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वीडियो में जाति विशेष के खिलाफ भड़काऊ और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था, जिससे समाज में वैमनस्य फैलने और कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा पैदा हुआ। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1) के तहत केस दर्ज किया। बचाव पक्ष ने बताई साजिश याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी कि उन्हें विभागीय रंजिश और निजी दुश्मनी के चलते फंसाया गया है। कहा गया कि वीडियो दिसंबर 2025 का है और उसे कई महीनों बाद जानबूझकर वायरल किया गया। बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल एडिटिंग के जरिए छेड़छाड़ कर तैयार किया गया हो सकता है। “बंद कमरे की बातचीत” वाली दलील भी दी पक्षकार की ओर से कहा गया कि कथित बातचीत निजी थी और सीमित लोगों के बीच हुई थी। ऐसे में इसे सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने का मामला नहीं माना जा सकता। यह भी कहा गया कि वीडियो सोशल मीडिया पर किसने वायरल किया, इसका कोई आरोप याचिकाकर्ता पर नहीं है।
राज्य सरकार ने किया कड़ा विरोध हरियाणा सरकार की ओर से पेश एएजी ने कहा कि आरोप बेहद गंभीर हैं और वीडियो सोशल मीडिया पर फैलने के बाद इलाके में तनाव और रोष पैदा हुआ। सरकार ने कोर्ट को बताया कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, रिकॉर्डिंग के स्रोत और अन्य लोगों की भूमिका की जांच के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से स्पष्ट होता है कि बातचीत में एक विशेष समुदाय के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी हैं, इसलिए उनसे संयम और संवैधानिक मूल्यों के पालन की अधिक अपेक्षा की जाती है। कोर्ट ने दी “स्पीच एक्ट थ्योरी” की मिसाल फैसले में कोर्ट ने दार्शनिक जॉन सीर्ल और जे.एल. ऑस्टिन की “स्पीच एक्ट थ्योरी” का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि शब्द केवल बोले नहीं जाते, बल्कि उनका सामाजिक प्रभाव भी होता है। किसी समुदाय के खिलाफ बोले गए शब्द समाज में वैमनस्य और तनाव पैदा कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले सुमीठा प्रदीप कल को वर्सेस अरुण कुमार सीके का हवाला देते हुए कहा कि केवल यह तर्क कि “कस्टोडियल इंटरोगेशन जरूरी नहीं है”, अग्रिम जमानत देने का आधार नहीं बन सकता। अदालत को आरोपों की गंभीरता और समाज पर उनके प्रभाव को भी देखना होता है। अग्रिम जमानत याचिका खारिज सभी पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि मामले में प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप बनते हैं और जांच प्रभावित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने गीतू राम तंवर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
SE गीतू राम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज:जाट-झोटा टिप्पणी विवाद पर हाईकोर्ट सख्त; वकील की दलील-निजी दुश्मनी के चलते फंसाया
