बंजर जमीन को हरा-भरा दिखाकर करोड़ों का घोटाला:करनाल में पंच की शिकायत पर खुलासा; 3 नामों पर चलता था फसल पोर्टल सिस्टम

Spread the love

करनाल की ग्राम पंचायत अमुपूर और सांभली में सरपंच और आढ़ती मिलकर सरकार को चूना लगाया। पोर्टल सिर्फ तीन ही लोगों के नाम पर होते थे, कभी भी चौथे व्यक्ति की एंट्री नहीं होती थी, इस घोटाले को इतनी शातिर तरीके से अंजाम दिया जाता था कि किसी को कानों-कान भनक तक नहीं लगी। पहले यह घोटाला 2023 में अमुपूर गांव से शुरू हुआ था, लेकिन इसके बाद वर्ष 2024 में यह सांभली गांव में भी पहुंच गया और सांभली गांव के सरपंच ने भी गैर कृषि योग्य भूमि से पर्सनल आमदनी जनरेट करने का खेल शुरू कर दिया। लालच में अंधे सरपंचों ने गऊचरान ही नहीं, बल्कि गांव की श्मशान भूमि, जोहड़ और सरकारी स्कूल तक का पोर्टल करवा रखा था। अमुपूर में 6 एकड़ 5 कनाल 18 मरले ऐसी जमीन का पोर्टल हुआ, जो कृषि योग्य नहीं थी और इसी तरह से सांभली में 30 एकड़ 3 कनाल जमीन कृषि योग्य नहीं थी। फिर भी पोर्टल हुआ और फसल पैदा हुई और मंडियों में जाकर पेमेंट भी हुई। पंच को घोटाले का पता चला पढ़े लिखे पंच बलराज शर्मा ने यह घाेटाला देखा, तो उसने तुरंत प्रशासन के संज्ञान में मामला लाया और प्रशासन ने जांच भी शुरू कर दी और जांच में दोषी पाए जाने पर तुरंत प्रभाव से सांभली गांव की सरपंच किरणपाल कौर और अमुपूर के सरपंच युद्धवीर सिंह को निलंबित कर दिया। शुरुआत अमुपूर से, फिर सांभली तक फैला खेल यह घोटाला सबसे पहले वर्ष 2023 में अमुपूर गांव से शुरू हुआ। यहां सरपंच और आढ़ती ने मिलकर गैर कृषि योग्य जमीन को भी “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” पोर्टल पर दर्ज कराना शुरू किया। इसके बाद वर्ष 2024 में यही तरीका सांभली गांव में भी अपनाया गया। यहां भी गैर काश्त और बंजर जमीन को खेती योग्य दिखाकर फसल दर्ज की गई और मंडियों में बेचकर भुगतान लिया गया। तीन नामों तक सीमित रहता था पूरा पोर्टल सिस्टम इस घोटाले को बेहद शातिर तरीके से अंजाम दिया गया। पोर्टल हमेशा केवल तीन लोगों के नाम पर ही होता था और कभी चौथे व्यक्ति की एंट्री नहीं होती थी। कागजों में किसान वही दिखते थे, लेकिन जमीन का असली पट्टेदार कोई और होता था। खेती कोई और करता था और लाभ कोई और उठाता था। पंच की शिकायत से खुला पूरा मामला अमुपूर निवासी पंच बलराज शर्मा ने इस गड़बड़ी को पकड़ लिया। उन्होंने प्रशासन को शिकायत दी, जिसके बाद जांच शुरू हुई। जांच में सामने आया कि दोनों गांवों में बड़े स्तर पर सरकारी जमीन को गलत तरीके से पोर्टल किया गया था। इसके बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सांभली की सरपंच किरणपाल कौर और अमुपूर के सरपंच युद्धवीर सिंह को सस्पेंड कर दिया। अमुपूर में ऐसे चला पूरा घोटाला अमुपूर गांव में सरपंच और आढ़ती ईश्वर चंद वर्ष 2023 से यह खेल खेल रहे थे। जांच में सामने आया कि ईश्वर चंद ने अपने साथ-साथ अपने पुत्र नवीस कुमार और पुत्रवधु पूनम के नाम भी पोर्टल करवा रखे थे। खरीफ सीजन: खरीफ 2023 में ईश्वर चंद के नाम 70 कनाल जमीन का पोर्टल हुआ, जिसमें करीब 7 कनाल 8 मरले जमीन कृषि योग्य नहीं थी। पूनम के नाम 100 कनाल में से 17 कनाल जमीन गैर कृषि योग्य थी, जबकि नवीस कुमार के नाम 8 कनाल जमीन थी, जो खेती योग्य थी। रबी सीजन: रबी 2023-24 में ईश्वर चंद ने करीब 255 कनाल जमीन अपने नाम पोर्टल करवाई, जिसमें 5 कनाल 8 मरले जमीन बंजर थी। वर्ष 2024-25 में नवीस कुमार के नाम 16 कनाल पोर्टल किया गया। खरीफ सीजन: खरीफ 2024 में ईश्वर चंद के नाम 61 कनाल 10 मरले जमीन का पोर्टल हुआ, जिसमें 19 कनाल 19 मरले जमीन खेती योग्य नहीं थी। पूनम के नाम 110 कनाल और नवीस कुमार के नाम 133 कनाल जमीन का पोर्टल हुआ, जिसमें 4 कनाल जमीन गैर कृषि योग्य थी। कुल मिलाकर अमुपूर में 94 एकड़ 3 कनाल 2 मरले जमीन का पोर्टल हुआ, जिसमें 6 एकड़ 5 कनाल 18 मरले जमीन पूरी तरह से बंजर या झाड़ियों वाली थी। सांभली में भी दोहराया गया वही पैटर्न सांभली गांव में यह गड़बड़ी खरीफ 2024 से शुरू हुई। यहां भी पूरा खेल ईश्वर चंद के जरिए ही किया गया। ईश्वर चंद के नाम 175 कनाल जमीन का पोर्टल हुआ, जिसमें 96 कनाल जमीन कृषि योग्य नहीं थी। नवीस कुमार के नाम 147 कनाल जमीन दर्ज की गई, जो पूरी तरह से गौचरान की जमीन थी। पूनम के नाम 68 कनाल 18 मरले जमीन का पोर्टल हुआ, जो खेती योग्य दिखाई गई। कुल 48 एकड़ 7 कनाल 19 मरले जमीन का पोर्टल किया गया, जिसमें 30 एकड़ 3 कनाल 1 मरला जमीन पूरी तरह गैर कृषि योग्य थी। श्मशान, जोहड़ और सरकारी जमीन तक नहीं छोड़ी शिकायतकर्ता के अनुसार इस गिरोह ने किसी भी सरकारी जमीन को नहीं छोड़ा। श्मशान घाट, जोहड़, पब्लिक हेल्थ विभाग की जमीन और गौचरान तक को पोर्टल में शामिल किया गया। कागजों में गेहूं और धान की फसल दिखाई गई, जिसे मंडियों में बेचकर गेटपास भी कटवाए गए और भुगतान भी लिया गया। यह घोटाला लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये का बताया जा रहा है। ऐसे सामने आया पूरा मामला सांभली निवासी बलराज शर्मा ने 9 जुलाई 2025 को जिला उपायुक्त को शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि दोनों पंचायतों के सरपंचों ने गैर काश्त, गैर मुमकिन और बंजर जमीन को भी पोर्टल पर दर्ज करवा दिया। शिकायत के बाद मामले की जांच के लिए आवेदन खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी निसिंग और उप-निदेशक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग करनाल को भेजा गया। 29 जून 2025 और 29 अगस्त 2025 को जांच रिपोर्ट मांगी गई। इसके बाद 8 दिसंबर 2025 और 10 दिसंबर 2025 को कृषि विभाग की रिपोर्ट और 11 दिसंबर 2025 को बीडीपीओ निसिंग की रिपोर्ट प्राप्त हुई, जिनमें गड़बड़ी की पुष्टि हुई। नोटिस के बाद सुनवाई, फिर कार्रवाई संयुक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर 1 दिसंबर 2025 को दोनों सरपंचों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इसके बाद 27 मार्च को दोनों की सुनवाई पूरी की गई। जांच में आरोप साबित होने के बाद प्रशासन ने दोनों सरपंचों को सस्पेंड कर दिया और आगे की जांच शुरू कर दी गई। अब एसडीएम करेंगे आगे की जांच मामले की आगे की जांच नीलोखेड़ी के एसडीएम को सौंपी गई है। जांच पूरी करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इस घोटाले में और कौन-कौन शामिल है और मंडियों तक यह पूरा सिस्टम कैसे चलता रहा।